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शहीद विकास सिंघल के परिवार पर टूटा गम का पहाड़
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गांव पचेंड़ा में शहीद विकास सिंघल के आवास पर शोकाकुल परिजन और महिलाएं।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
शहीद विकास सिंघल के परिवार पर टूटा गम का पहाड़
मुजफ्फरनगर। छत्तीसगढ़ के सुकमा में सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट गांव पचेंडा निवासी विकास सिंघल के शहीद हो जाने से परिवार के सदस्यों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा। पूरे गांव में कोहराम मच गया। खबर मिलते ही लोग विकास के परिवार को ढांढस बंधाने के लिए घर पहुंच गए। कौशल विकास राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल व विधायक प्रमोद उटवाल ने भी पचेंडा पहुंचकर पीड़ित परिवार को सांत्वना दी। शहीद के चाचा मनोज सिंघल ने बताया कि शहीद की पार्थिव शरीर मंगलवार यानि आज सुबह दस बजे गांव लाई जाएगी। इसके बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा।
गांव पचेंडा निवासी विकास सिंघल अपने पूरे परिवार के इकलौते सैनिक थे। शुरूआत से ही विकास सेना में शामिल होने को लेकर बेहद उत्साहित रहते थे। चाचा मनोज सिंघल और भाई पंकज ने बताया कि शुरूआती शिक्षा के बाद सेना के प्रति अपने इसी जुनून के चलते विकास वर्ष 2010 में सीआरपीएफ में भर्ती हो गए थे। भर्ती के बाद भी वे लगातार खुद को साबित करते रहे, जिनकी अति दक्षता को देख उनका प्रमोशन डिप्टी कमांडेंट के पद पर कर दिया गया। इसके बाद विकास सिंघल को सीआरपीएफ की बड़े ऑपरेशन करने वाली कोबरा विंग में भेज दिया गया। वर्ष 2020 की शुरूआत में ही विकास सिंघल को छत्तीसगढ़ में भेज दिया गया। करीब छह माह नक्सल प्रभावित क्षेत्र मेें ड्यूटी देने के उपरांत उनका स्थानांतरण मध्यप्रदेश किया गया, लेकिन यहां से तीन माह बाद ही करीब एक पखवाड़े पूर्व उन्हें फिर से छत्तीसगढ़ भेज दिया गया। यहां उनकी तैनाती नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में हुई, जहां रविवार को नक्सलियों द्वारा बिछाए गए आईईडी में हुए विस्फोट की चपेट में आकर विकास सिंघल शहीद हो गए।
कृष्णापुरी निवासी पारुल से छह साल पूर्व हुई थी शादी
मुजफ्फरनगर। विकास सिंघल की शादी करीब छह साल पूर्व शहर के मोहल्ला कृष्णापुरी निवासी पारुल से हुई थी। दंपती के दो बच्चे हैं, जिनमें पांच साल की बेटी निष्ठा व दो साल का बेटा केशव शामिल हैं। विकास की पत्नी दोनों बच्चों के साथ छत्तीसगढ़ में ही रह रहीं हैं, जो मंगलवार को शव के साथ ही घर आएंगी। शहीद के परिवार में पिता विरेंद्र सिंघल, बड़ा भाई नीरज सिंघल व छोटा भाई पंकज है। इनमें नीरज की शादी हो चुकी है और वे गांव मुस्तफाबाद में मेडिकल स्टोर चलाते हैं, जबकि पंकज प्राइवेट जॉब करते हैं। विकास की चार बहनें पूनम, सुमन, सरिता व सोनिया हैं। सभी बहनों की शादी हो चुकी है। मां मधु सिंघल गृहिणी हैं।
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दो दिन पूर्व हुई थी परिजनों से मोबाइल पर बात
मुजफ्फरनगर। विकास सिंघल पत्नी व बच्चों के साथ तैनाती स्थल पर रहने के बावजूद गांव पचेंडा में रह रहे अपने पूरे परिवार के लगातार संपर्क में रहते थे। करीब एक साल पूर्व वे अवकाश लेकर पचेंडा में परिवार से मिलने आए थे। इसके बाद लगभग रोजाना ही वे मोबाइल पर बात कर मां मधु सिंघल, पिता विरेंद्र व दोनों भाइयों से कुशलक्षेम लेते रहते थे। भाई पंकज ने बताया कि आखिरी बार विकास ने शनिवार शाम मोबाइल पर पूरे परिवार से बात कर सबकी कुशलक्षेम जानी थी। रविवार शाम भी परिजन रोजाना की तरह उनकी कॉल आने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन रात करीब 8.30 बजे भाई पंकज को मोबाइल पर सीआरपीएफ मुख्यालय से कॉल कर विकास सिंघल के घायल होने व रायपुर के हॉस्पिटल में आईसीयू में भर्ती कराए जाने की जानकारी दी गई। इसके बाद पूरा परिवार उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहकर उनके स्वास्थ्य लाभ की ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे। इसके बाद देर रात 12.30 फिर से सीआरपीएफ मुख्यालय द्वारा पंकज के मोबाइल पर कॉल कर बताया गया कि डॉक्टर्स ने विकास को जवाब दे दिया है और उन्हें बचाना लगभग नामुमकिन है। इसके बाद से ही परिवार में कोहराम मच गया।
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मुजफ्फरनगर। छत्तीसगढ़ के सुकमा में सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट गांव पचेंडा निवासी विकास सिंघल के शहीद हो जाने से परिवार के सदस्यों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा। पूरे गांव में कोहराम मच गया। खबर मिलते ही लोग विकास के परिवार को ढांढस बंधाने के लिए घर पहुंच गए। कौशल विकास राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल व विधायक प्रमोद उटवाल ने भी पचेंडा पहुंचकर पीड़ित परिवार को सांत्वना दी। शहीद के चाचा मनोज सिंघल ने बताया कि शहीद की पार्थिव शरीर मंगलवार यानि आज सुबह दस बजे गांव लाई जाएगी। इसके बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा।
गांव पचेंडा निवासी विकास सिंघल अपने पूरे परिवार के इकलौते सैनिक थे। शुरूआत से ही विकास सेना में शामिल होने को लेकर बेहद उत्साहित रहते थे। चाचा मनोज सिंघल और भाई पंकज ने बताया कि शुरूआती शिक्षा के बाद सेना के प्रति अपने इसी जुनून के चलते विकास वर्ष 2010 में सीआरपीएफ में भर्ती हो गए थे। भर्ती के बाद भी वे लगातार खुद को साबित करते रहे, जिनकी अति दक्षता को देख उनका प्रमोशन डिप्टी कमांडेंट के पद पर कर दिया गया। इसके बाद विकास सिंघल को सीआरपीएफ की बड़े ऑपरेशन करने वाली कोबरा विंग में भेज दिया गया। वर्ष 2020 की शुरूआत में ही विकास सिंघल को छत्तीसगढ़ में भेज दिया गया। करीब छह माह नक्सल प्रभावित क्षेत्र मेें ड्यूटी देने के उपरांत उनका स्थानांतरण मध्यप्रदेश किया गया, लेकिन यहां से तीन माह बाद ही करीब एक पखवाड़े पूर्व उन्हें फिर से छत्तीसगढ़ भेज दिया गया। यहां उनकी तैनाती नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में हुई, जहां रविवार को नक्सलियों द्वारा बिछाए गए आईईडी में हुए विस्फोट की चपेट में आकर विकास सिंघल शहीद हो गए।
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कृष्णापुरी निवासी पारुल से छह साल पूर्व हुई थी शादी
मुजफ्फरनगर। विकास सिंघल की शादी करीब छह साल पूर्व शहर के मोहल्ला कृष्णापुरी निवासी पारुल से हुई थी। दंपती के दो बच्चे हैं, जिनमें पांच साल की बेटी निष्ठा व दो साल का बेटा केशव शामिल हैं। विकास की पत्नी दोनों बच्चों के साथ छत्तीसगढ़ में ही रह रहीं हैं, जो मंगलवार को शव के साथ ही घर आएंगी। शहीद के परिवार में पिता विरेंद्र सिंघल, बड़ा भाई नीरज सिंघल व छोटा भाई पंकज है। इनमें नीरज की शादी हो चुकी है और वे गांव मुस्तफाबाद में मेडिकल स्टोर चलाते हैं, जबकि पंकज प्राइवेट जॉब करते हैं। विकास की चार बहनें पूनम, सुमन, सरिता व सोनिया हैं। सभी बहनों की शादी हो चुकी है। मां मधु सिंघल गृहिणी हैं।
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दो दिन पूर्व हुई थी परिजनों से मोबाइल पर बात
मुजफ्फरनगर। विकास सिंघल पत्नी व बच्चों के साथ तैनाती स्थल पर रहने के बावजूद गांव पचेंडा में रह रहे अपने पूरे परिवार के लगातार संपर्क में रहते थे। करीब एक साल पूर्व वे अवकाश लेकर पचेंडा में परिवार से मिलने आए थे। इसके बाद लगभग रोजाना ही वे मोबाइल पर बात कर मां मधु सिंघल, पिता विरेंद्र व दोनों भाइयों से कुशलक्षेम लेते रहते थे। भाई पंकज ने बताया कि आखिरी बार विकास ने शनिवार शाम मोबाइल पर पूरे परिवार से बात कर सबकी कुशलक्षेम जानी थी। रविवार शाम भी परिजन रोजाना की तरह उनकी कॉल आने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन रात करीब 8.30 बजे भाई पंकज को मोबाइल पर सीआरपीएफ मुख्यालय से कॉल कर विकास सिंघल के घायल होने व रायपुर के हॉस्पिटल में आईसीयू में भर्ती कराए जाने की जानकारी दी गई। इसके बाद पूरा परिवार उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहकर उनके स्वास्थ्य लाभ की ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे। इसके बाद देर रात 12.30 फिर से सीआरपीएफ मुख्यालय द्वारा पंकज के मोबाइल पर कॉल कर बताया गया कि डॉक्टर्स ने विकास को जवाब दे दिया है और उन्हें बचाना लगभग नामुमकिन है। इसके बाद से ही परिवार में कोहराम मच गया।