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नवाजिश के लिए बंद हुए सपा के दरवाजे  

Tue, 14 Jun 2016 12:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Tue, 14 Jun 2016 12:16 AM IST
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Expulsion from SP
नवाजिश। - फोटो : अमर उजाला
एमएलसी और राज्यसभा चुनाव में क्रास वोटिंग के फेर में फंसे बुढ़ाना विधायक नवाजिश आलम पर सपा हाईकमान की गाज गिर गई है। नवाजिश के फैसले की पटकथा पहले ही तैयार हो गई थी। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से नवाजिश के पिता पूर्व सांसद अमीर आलम की दूरियां कवाल कांड के बाद से ही बढ़ गई थीं। अखिलेश सरकार में आलम फैमिली को वो सम्मान नहीं मिला, जिसे वह चाहते थे। 
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सपा से निलंबित किए गए बुढ़ाना के विधायक नवाजिश आलम के फैसले से जिले की सियासत में हलचल मच गई है। मुसलिम राजनीति में उनके पिता पूर्व सांसद अमीर आलम का अलग मुकाम रहा है। नेताजी की कृपा कभी जमकर बरसी थी। अनिल अंबानी के इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा की सीट सपा सुप्रीमो ने अमीर आलम को दी थी। विधानसभा चुनाव में उनके बेटे नवाजिश को मनमाफिक बुढ़ाना सीट पर चुनाव लड़वाया गया था। उन्हें भारी मतों से जीत मिली। 
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अब अखिलेश सरकार में नवाजिश को मंत्री बनाए जाने की उम्मीदें थीं, क्योंकि मुसलिम चेहरा होने के साथ वह युवा एमएलए भी थे। कारण चाहे जो भी रहे हों, लेकिन आलम फैमिली को बीते चार साल में पार्टी वो सम्मान नहीं दे पाई, जिसकी चाह थी। रही सही कसर वर्ष 2013 के कवाल कांड में पूरी कर दी। पूर्व सांसद अमीर आलम पर मलिकपुरा के ममेरे भाइयों गौरव और सचिन के हत्यारोपियों को थाने से छुड़वाने का आरोप लगा।
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हालांकि न्यायिक जांच में यह साबित नहीं हो पाया। लेकिन कवाल की घटना से सपा से आलम कुनबे की दूरियां बढ़ती चली गईं। बीच में एक वक्त ऐसा भी आया, जब खुद पूर्व सांसद आलम ने राजनीति से सन्यास की घोषणा कर दी। हालांकि हाईकमान ने मामले को ठंडे तरीके से निपटा लिया और समर्थकों की सभा कर आलम ने अपना फैसला वापस ले लिया।

सपा जिले में आलम को नहीं खोना चाहती थी, क्योंकि पार्टी का वह बड़ा मुसलिम चेहरा थे। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव में सपा ने उन्हें बिजनौर से प्रत्याशी बनाया। दंगे के बाद बदले सियासी हालातों में उनका टिकट काट दिया गया। तब से आलम और नवाजिश सियासी तौर पर कभी सपा सुप्रीमो के करीब नजर नहीं आए। मंत्रिमंडल का कई बार विस्तार हुआ,


मगर नवाजिश को जगह नहीं मिल सकी। क्रास वोटिंग अप्रत्याशित नहीं है, क्योंकि नवाजिश आलम ने पहले ही तय कर लिया था। बसपा से उनकी नजदीकियों की चर्चा अरसे से राजनीतिक हलकों में हो रही थी। पार्टी को भी ऐसी सुगबुगाहट थी, इसीलिए आगामी विधानसभा चुनाव में अभी तक उन्हें बुढ़ाना से दोबारा प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया था। आगे की रणनीति क्या रहेगी, यह अभी आलम फैमिली ने खुलासा नहीं किया है। 
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