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ड्रैगन फ्रूट की खेती से हो रही कमाई
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चरथावल गुनियाजुड्डी के चरण सिंह खेत में ड्रैगन फल से पहले खिला सफेद फूल।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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ड्रैगन फ्रूट की खेती से हो रही कमाई
चरथावल (मुजफ्फरनगर)। गुनियाजुड्ड़ी गांव के चरण सिंह करीब डेढ़ साल पहले वह कोलकाता घूमने गए, तो वहां उन्हें विदेशी ड्रैगन फ्रूट (कमलम) लुभा गया। तभी उन्होंने 800 पेड़ बुक करा दिए। गांव में चार बीघा जमीन में पिलरों पर पेड़ लगाकर उत्पादन शुरू किया। खासकर जंगली जानवरों से बचाव के लिए खेत के चारों तरफ झटका मशीन से हल्का करंट दिया गया है।
बकौल चरण सिंह उन्होंने ट्रांसपोर्ट के जरिए 115 रुपये की दर से पेड़ मंगाए थे। 200 पिलरों पर सभी पेड़ मानक के अनुरूप जगह छोड़कर लगाए हैं। यहां की जलवायु माकूल है और कीट पतंगों से बचाव के लिए जैविक विधि का प्रयोग मुफीद रहता है। 16 महीने बाद पेड़ों ने पहली मर्तबा फल देना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि आसपास के जिलों में इस फल का उत्पादन नहीं होता। सफेद रंग का फूल खिलने के बाद गुलाबी रंग में फल पेड़ों पर पकता है। आसपास गांव के लोग देखने को लालायित रहते हैं। इस फल की खेती से ग्रामीणों में कौतूहल बना है। दक्षिणी अमेरिका के वैरायटी वाले फल की पैदावार के लिए खेतों में जंगली जानवरों और आमजन से सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए हैं। झटका मशीन से हल्का करंट छोड़ना पड़ता है, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
दुकानों पर 300 रुपये प्रति किलो तक सप्लाई
पहली मर्तबा पके हुए फलों को बड़े शहरों की फ्रूटस की दुकानों पर सप्लाई करना शुरू कर दिया है। यह विलायती फल महंगा होने के कारण आम लोगों के स्वाद से दूर है, लेकिन बड़े घरों की शान है। आयुर्वेदिक चिकित्सक अनेक बीमारियों से बचाव के लिए इस फल को उपयोगी मानते हैं। रुड़की, सहारनपुर और देवबंद की बड़ी फलों की दुकानों पर सप्लाई कर रहे हैं। 250 से 300 रुपये प्रति किलो तक दुकानों पर सप्लाई करते हैं। हालांकि महानगरों में दुकानों पर इसका खुदरा भाव 500 रुपये से 600 रुपये किलो तक बताया जाता है।
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सहफसली खेती कर ले रहे दोगुनी आय
ड्रैगन फल के साथ चार बीघा जमीन में वह आलू, मिर्च, उड़द, गागली आदि की फसल लगाकर दोगुनी आय ले रहे हैं। परिचित मेरठ दिल्ली, देहरादून, ऋषिकेश आदि से बाग देखने आते हैं। 10 पेड़ विदेशी वैरायटी के एप्पल बेर और पांच पेड़ सेव के लगाए हैं, जो पहाड़ी इलाके के स्थान पर प्लेन में ही अच्छा फल देते हैं।
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चरथावल (मुजफ्फरनगर)। गुनियाजुड्ड़ी गांव के चरण सिंह करीब डेढ़ साल पहले वह कोलकाता घूमने गए, तो वहां उन्हें विदेशी ड्रैगन फ्रूट (कमलम) लुभा गया। तभी उन्होंने 800 पेड़ बुक करा दिए। गांव में चार बीघा जमीन में पिलरों पर पेड़ लगाकर उत्पादन शुरू किया। खासकर जंगली जानवरों से बचाव के लिए खेत के चारों तरफ झटका मशीन से हल्का करंट दिया गया है।
बकौल चरण सिंह उन्होंने ट्रांसपोर्ट के जरिए 115 रुपये की दर से पेड़ मंगाए थे। 200 पिलरों पर सभी पेड़ मानक के अनुरूप जगह छोड़कर लगाए हैं। यहां की जलवायु माकूल है और कीट पतंगों से बचाव के लिए जैविक विधि का प्रयोग मुफीद रहता है। 16 महीने बाद पेड़ों ने पहली मर्तबा फल देना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि आसपास के जिलों में इस फल का उत्पादन नहीं होता। सफेद रंग का फूल खिलने के बाद गुलाबी रंग में फल पेड़ों पर पकता है। आसपास गांव के लोग देखने को लालायित रहते हैं। इस फल की खेती से ग्रामीणों में कौतूहल बना है। दक्षिणी अमेरिका के वैरायटी वाले फल की पैदावार के लिए खेतों में जंगली जानवरों और आमजन से सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए हैं। झटका मशीन से हल्का करंट छोड़ना पड़ता है, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
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दुकानों पर 300 रुपये प्रति किलो तक सप्लाई
पहली मर्तबा पके हुए फलों को बड़े शहरों की फ्रूटस की दुकानों पर सप्लाई करना शुरू कर दिया है। यह विलायती फल महंगा होने के कारण आम लोगों के स्वाद से दूर है, लेकिन बड़े घरों की शान है। आयुर्वेदिक चिकित्सक अनेक बीमारियों से बचाव के लिए इस फल को उपयोगी मानते हैं। रुड़की, सहारनपुर और देवबंद की बड़ी फलों की दुकानों पर सप्लाई कर रहे हैं। 250 से 300 रुपये प्रति किलो तक दुकानों पर सप्लाई करते हैं। हालांकि महानगरों में दुकानों पर इसका खुदरा भाव 500 रुपये से 600 रुपये किलो तक बताया जाता है।
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सहफसली खेती कर ले रहे दोगुनी आय
ड्रैगन फल के साथ चार बीघा जमीन में वह आलू, मिर्च, उड़द, गागली आदि की फसल लगाकर दोगुनी आय ले रहे हैं। परिचित मेरठ दिल्ली, देहरादून, ऋषिकेश आदि से बाग देखने आते हैं। 10 पेड़ विदेशी वैरायटी के एप्पल बेर और पांच पेड़ सेव के लगाए हैं, जो पहाड़ी इलाके के स्थान पर प्लेन में ही अच्छा फल देते हैं।

चरथावल के गुनियाजुड्डी में उत्पादित ड्रैगन फल- फोटो : MUZAFFARNAGAR

चरथावल गुनियाजुड्डी के चरण सिंह खेत में ड्रैगन फल की तरीके से लगाई बेल- फोटो : MUZAFFARNAGAR

चरथावल गुनियाजुड्डी के चरण सिंह खेत में ड्रैगन फल दिखाते हुए- फोटो : MUZAFFARNAGAR