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मुजफ्फरनगर के लद्दावाला में डस्टबिन खाली, दूसरी जगह शुरू कर दिया डलावघर
Wed, 20 Mar 2019 12:25 AM IST
Deepak Kausik
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Published by: Deepak Kausik
Updated Wed, 20 Mar 2019 12:25 AM IST
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शहर में बनाए गए कूड़ेदान।
- फोटो : अमर उजाला
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मुजफ्फरनगर शहर में डलावघरों को खत्म करने के लिए लगाए गए अंडर ग्राउंड डस्टबिन शोपीस बनने लगे हैं। खासतौर से लद्दावाला में लगे चार डस्टबिन यूं ही पड़े रहते हैं और सफाई कर्मचारियों ने दूसरी जगह डलावघर शुरू कर दिया। वे रोजाना रेहड़ों से दूसरी जगह कूड़ा डाल रहे हैं।
शहर की सफाई के बाद कूड़ा डलावघरों में इकट्ठा किया जाता है और यहां से नगर पालिका के बड़े वाहनों में भरकर किदवईनगर स्थित एटूजेड़ प्लांट में ले जाया जाता है। मोहल्ला लद्दावाला में बड़ा डलावघर था। स्थानीय लोगों ने इस डलावघर को खत्म कर वहां से रास्ता शुरू कर दिया था।
इसके विरोध में सफाई कर्मचारियों ने हड़ताल की तो डलावघर पुन: शुरू हो गया। बाद में प्रशासन ने एमडीए के माध्यम से यहां पर चार अंडरग्राउंड डस्टबिन स्थापित करा दिए। प्रत्येक की लागत लगभग साढ़े पांच लाख रुपये बताई जाती है। आसपास चबूतरा बनाकर बैठने के लिए बेंच भी बनवा दी गई। यहां तो डलावघर खत्म हो गया,
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लेकिन सफाई कर्मचारियों ने इससे करीब 200 मीटर दूर अहिल्याबाई चौक की ओर कूड़ा डालना शुरू कर दिया। गंदगी और कीचड़ के कारण लोगों का यहां से गुजरना मुश्किल हो गया है। रोजाना रेहड़ा चालक सफाई कर्मचारी यहां पर कूड़ा डाल रहे हैं, जबकि अंडरग्राउंड डस्टबिन खाली पड़े रहते हैं। चर्च के पास और बघरा तांगा स्टैंड पर लगाए गए डस्टबिन का भी यही हाल है।
रेहड़ों से नहीं डाला जा सकता कूड़ा
अंडरग्राउंड डस्टबिन में केवल लोग थोड़ा-थोड़ा करके ही कूड़ा डाल सकते हैं। रेहड़ों से इनमें कूड़ा नहीं डाला जा सकता। स्थानीय लोग आते हैं और अपने घरों का कूड़ा इन डस्टबिन में डाल देते हैं। इससे मोहल्ले में कूड़ा डालने की सफाई तो खत्म हो गई, लेकिन क्षेत्र से रेहड़ों में कूड़ा डालने वाले सफाई कर्मचारियों को कोई फायदा नहीं मिला। लद्दावाला में कूड़ा डालने वाले सफाई कर्मचारियों को अब जिला अस्पताल के बाहर कूड़ा डालने को कहा जा रहा है।
धीरे-धीरे बदल रही व्यवस्था
नगर पालिका के नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरएस राठी का कहना है कि लद्दावाला में धीरे-धीरे व्यवस्था बदल रही है। वहां कूड़ा डालने वाले अधिकांश सफाई कर्मचारी जिला अस्पताल के बाहर डलावघर में जा रहे हैं। कुछ बचे हैं, उन्हें भी धीरे-धीरे डायवर्ट कर दिया जाएगा।
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शहर की सफाई के बाद कूड़ा डलावघरों में इकट्ठा किया जाता है और यहां से नगर पालिका के बड़े वाहनों में भरकर किदवईनगर स्थित एटूजेड़ प्लांट में ले जाया जाता है। मोहल्ला लद्दावाला में बड़ा डलावघर था। स्थानीय लोगों ने इस डलावघर को खत्म कर वहां से रास्ता शुरू कर दिया था।
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इसके विरोध में सफाई कर्मचारियों ने हड़ताल की तो डलावघर पुन: शुरू हो गया। बाद में प्रशासन ने एमडीए के माध्यम से यहां पर चार अंडरग्राउंड डस्टबिन स्थापित करा दिए। प्रत्येक की लागत लगभग साढ़े पांच लाख रुपये बताई जाती है। आसपास चबूतरा बनाकर बैठने के लिए बेंच भी बनवा दी गई। यहां तो डलावघर खत्म हो गया,
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लेकिन सफाई कर्मचारियों ने इससे करीब 200 मीटर दूर अहिल्याबाई चौक की ओर कूड़ा डालना शुरू कर दिया। गंदगी और कीचड़ के कारण लोगों का यहां से गुजरना मुश्किल हो गया है। रोजाना रेहड़ा चालक सफाई कर्मचारी यहां पर कूड़ा डाल रहे हैं, जबकि अंडरग्राउंड डस्टबिन खाली पड़े रहते हैं। चर्च के पास और बघरा तांगा स्टैंड पर लगाए गए डस्टबिन का भी यही हाल है।
रेहड़ों से नहीं डाला जा सकता कूड़ा
अंडरग्राउंड डस्टबिन में केवल लोग थोड़ा-थोड़ा करके ही कूड़ा डाल सकते हैं। रेहड़ों से इनमें कूड़ा नहीं डाला जा सकता। स्थानीय लोग आते हैं और अपने घरों का कूड़ा इन डस्टबिन में डाल देते हैं। इससे मोहल्ले में कूड़ा डालने की सफाई तो खत्म हो गई, लेकिन क्षेत्र से रेहड़ों में कूड़ा डालने वाले सफाई कर्मचारियों को कोई फायदा नहीं मिला। लद्दावाला में कूड़ा डालने वाले सफाई कर्मचारियों को अब जिला अस्पताल के बाहर कूड़ा डालने को कहा जा रहा है।
धीरे-धीरे बदल रही व्यवस्था
नगर पालिका के नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरएस राठी का कहना है कि लद्दावाला में धीरे-धीरे व्यवस्था बदल रही है। वहां कूड़ा डालने वाले अधिकांश सफाई कर्मचारी जिला अस्पताल के बाहर डलावघर में जा रहे हैं। कुछ बचे हैं, उन्हें भी धीरे-धीरे डायवर्ट कर दिया जाएगा।