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रेलवे दोहरीकरण का कार्य ठप कर मजदूरों को भगाया
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 31 May 2016 12:49 AM IST
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रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण के विरोध में हंगामा करते भाकियू कार्यकर्ता।
- फोटो : अमर उजाला
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किसानों की भूमि का मुआवजा तय नहीं होने से आक्रोशित भाकियू कार्यकर्ताओं ने सोमवार को मंसूरपुर में चल रहा रेलवे दोहरीकरण का कार्य ठप कर दिया। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने मजदूरों से ठेकेदार की कैटकिलर मशीन (मिट्टी को समतल करने वाली मशीन) छीन ली और मजदूरों को भगा दिया और वहां खड़े ट्रकों के टायरों की हवा निकाल दी। भाकियू जिलाध्यक्ष राजू अहलावत ने चेतावनी देते हुए कहा कि रेलवे विभाग के ठेकेदार को तब तक मशीन वापस नहीं देंगे, जब तक मुआवजा तय नहीं किया जाएगा।
रेलवे ने मेरठ से लेकर टपरी तक डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर के लिए डबल लाइन निकालने के लिए जनपद के किसानों की करीब 11 हजार मीटर भूमि को अधिग्रहण किया था। रेलवे ने किसानों की इस भूमि का अभी तक मुआवजा तय नहीं किया है। जिसको लेकर किसानों में भारी आक्रोश है। आक्रोशित किसानों की भूमि का मुआवजा तय न होने से गुस्साए भाकियू कार्यकर्ताओं ने 25 मई को गांव भैंसी के सामने चल रहे रेलवे दोहरीकरण के कार्य को ठप कर दिया था।
किसानों की मांग थी कि जब तक मुआवजा तय नहीं होता, तब तक कार्य ठप रखा जाएगा। सोमवार को भाकियू को खबर लगी कि मंसूरपुर में रेलवे की ओर से कार्य किया जा रहा है। खबर मिलने पर भाकियू जिलाध्यक्ष राजू अहलावत के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ता सीधे मंसूरपुर पहुंचे। आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने शुगर मिल के पीछे चल रहेे लाइन के दोहरीकरण के कार्य को बंद कराते हुए मजदूरों से कैटकिलर मशीन छीन ली।
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इतना ही नहीं वहां खड़े करीब आठ ट्रकों के टायरों की हवा निकाल कर चाबियां अपने कब्जे में ले ली और मजदूरों को वहां से भगा दिया। भाकियू कार्यकर्ता छीनी गई मशीन को गांव भैंसी लेकर चले आए। जिससे रेल अधिकारियों में हड़कंप मचा गया। गांव भैंसी मेें जिलाध्यक्ष राजू अहलावत के आवास पर रेलवे के एक्सीईएन प्रवीण कुमार, जेई वेदपाल सहित तीन-चार अधिकारी वार्ता करने पहुंचे।
वार्ता के दौरान अधिकारियों ने बताया कि रेलवे मंत्रालय ने एसएलओ सहारनपुर के खाते में किसानों की भूमि के 200 करोड़ रुपया पूर्व में ही भेज दिया था। अधिकारियों ने जिलाध्यक्ष से सहारनपुर पहुंचकर एसएलओ से बातचीत करने की बात की। जिस पर जिलाध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि वे सहारनपुर कतई नहीं जाएंगे, जो मुआवजा तय होगा। किसानों के गांवों में पहुंच कर ही तय होगा।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ठेकेदार की छीनी गई मशीन को मुआवजा तय होने से पहले किसी भी सूरत में वापस नहीं करेंगे। अगर रेलवे विभाग ने कार्य शुरू किया तो, भाकियू रेलवे ट्रक उखाड़ कर ट्रेनों का संचालन ठप कर देगी। देर शाम तक चली वार्ता में कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका था।
रेलवे ने मेरठ से लेकर टपरी तक डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर के लिए डबल लाइन निकालने के लिए जनपद के किसानों की करीब 11 हजार मीटर भूमि को अधिग्रहण किया था। रेलवे ने किसानों की इस भूमि का अभी तक मुआवजा तय नहीं किया है। जिसको लेकर किसानों में भारी आक्रोश है। आक्रोशित किसानों की भूमि का मुआवजा तय न होने से गुस्साए भाकियू कार्यकर्ताओं ने 25 मई को गांव भैंसी के सामने चल रहे रेलवे दोहरीकरण के कार्य को ठप कर दिया था।
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किसानों की मांग थी कि जब तक मुआवजा तय नहीं होता, तब तक कार्य ठप रखा जाएगा। सोमवार को भाकियू को खबर लगी कि मंसूरपुर में रेलवे की ओर से कार्य किया जा रहा है। खबर मिलने पर भाकियू जिलाध्यक्ष राजू अहलावत के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ता सीधे मंसूरपुर पहुंचे। आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने शुगर मिल के पीछे चल रहेे लाइन के दोहरीकरण के कार्य को बंद कराते हुए मजदूरों से कैटकिलर मशीन छीन ली।
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इतना ही नहीं वहां खड़े करीब आठ ट्रकों के टायरों की हवा निकाल कर चाबियां अपने कब्जे में ले ली और मजदूरों को वहां से भगा दिया। भाकियू कार्यकर्ता छीनी गई मशीन को गांव भैंसी लेकर चले आए। जिससे रेल अधिकारियों में हड़कंप मचा गया। गांव भैंसी मेें जिलाध्यक्ष राजू अहलावत के आवास पर रेलवे के एक्सीईएन प्रवीण कुमार, जेई वेदपाल सहित तीन-चार अधिकारी वार्ता करने पहुंचे।
वार्ता के दौरान अधिकारियों ने बताया कि रेलवे मंत्रालय ने एसएलओ सहारनपुर के खाते में किसानों की भूमि के 200 करोड़ रुपया पूर्व में ही भेज दिया था। अधिकारियों ने जिलाध्यक्ष से सहारनपुर पहुंचकर एसएलओ से बातचीत करने की बात की। जिस पर जिलाध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि वे सहारनपुर कतई नहीं जाएंगे, जो मुआवजा तय होगा। किसानों के गांवों में पहुंच कर ही तय होगा।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ठेकेदार की छीनी गई मशीन को मुआवजा तय होने से पहले किसी भी सूरत में वापस नहीं करेंगे। अगर रेलवे विभाग ने कार्य शुरू किया तो, भाकियू रेलवे ट्रक उखाड़ कर ट्रेनों का संचालन ठप कर देगी। देर शाम तक चली वार्ता में कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका था।