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एकजुटता से ही मिलेगा जाटों को आरक्षण
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 16 Jun 2016 12:30 AM IST
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मुजफ्फरनगर में जाट आरक्षण के लिए आयोजित सम्मेलन में मौजूद अतिथि।
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण को लेकर जाटों ने राजनीतिक रूप से एकजुट होने का संकल्प लिया। अखिल भारतीय जाट महासभा के राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह ने कहा कि भाजपा जाटों को आरक्षण देने के मुद्दे पर लीपा पोती में लगी हैं।
सरकुलर रोड स्थित एक बैंक्वेट हॉल में जनपद जाट महासभा और अखिल उत्तर प्रदेश युुवा जाट महासभा के संयुक्त सम्मेलन में आरक्षण के लिए एकजुटता होने का आह्वान किया गया। युद्धवीर सिंह ने कहा कि जाट आरक्षण का मामला 1949 से लंबित है।
1990 में चौधरी अजित सिंह ने 131 सांसदों के हस्ताक्षर का ज्ञापन तत्कालीन प्रधानमंत्री को सौंपकर आरक्षण की दबी आवाज उठाई थी। यूपीए सरकार में केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण की घोषणा हुई, लेकिन केंद्र और हरियाणा की भाजपा सरकार के ढुलमुल रवैये के कारण मिला आरक्षण छिन गया। इसके लिए जाट समाज को सियासी बिखराव से बचकर एकजुट होना होगा।
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विशिष्ट अतिथि पुष्पेंद्र चौधरी ने कहा कि जमीन की जोत घट चुकी है। किसानों के बच्चों का भविष्य खतरे में हैं। दूसरी समकक्ष जातियां आरक्षण का लाभ उठा रही हैं। चौधरी मांगेराम तेवतिया, रण सिंह शौकीन, नवीन चौधरी, रामपाल वर्मा, धर्मेंद्र तोमर, वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान कुमार, राज सिंह, ओमपाल सिंह, मुकेश प्रधान, विदित प्रधान ने विचार रखे।
अध्यक्षता जाट महासभा के अध्यक्ष देवी सिंह सिंभालका और संचालन सुधीर भारतीय ने किया। रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी, पूर्व विधायक राजपाल बालियान, पूर्व मंत्री धर्मवीर बालियान, योगराज सिंह, ब्लाक प्रमुख अमित चौधरी, हर्ष राठी, आकाशवीर बालियान, अंकुर राठी,
अंकित चौधरी, हंसराज जावला, जिला पंचायत सदस्य संजय राठी, पराग चौधरी, जगवीर सिंह आदि मौजूद रहे। सम्मेलन के बीच पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र सिंह को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन में हरियाणा में गिरफ्तार समाज के युवकों को रिहा करने और सही जांच कराने की मांग की गई।
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सरकुलर रोड स्थित एक बैंक्वेट हॉल में जनपद जाट महासभा और अखिल उत्तर प्रदेश युुवा जाट महासभा के संयुक्त सम्मेलन में आरक्षण के लिए एकजुटता होने का आह्वान किया गया। युद्धवीर सिंह ने कहा कि जाट आरक्षण का मामला 1949 से लंबित है।
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1990 में चौधरी अजित सिंह ने 131 सांसदों के हस्ताक्षर का ज्ञापन तत्कालीन प्रधानमंत्री को सौंपकर आरक्षण की दबी आवाज उठाई थी। यूपीए सरकार में केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण की घोषणा हुई, लेकिन केंद्र और हरियाणा की भाजपा सरकार के ढुलमुल रवैये के कारण मिला आरक्षण छिन गया। इसके लिए जाट समाज को सियासी बिखराव से बचकर एकजुट होना होगा।
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विशिष्ट अतिथि पुष्पेंद्र चौधरी ने कहा कि जमीन की जोत घट चुकी है। किसानों के बच्चों का भविष्य खतरे में हैं। दूसरी समकक्ष जातियां आरक्षण का लाभ उठा रही हैं। चौधरी मांगेराम तेवतिया, रण सिंह शौकीन, नवीन चौधरी, रामपाल वर्मा, धर्मेंद्र तोमर, वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान कुमार, राज सिंह, ओमपाल सिंह, मुकेश प्रधान, विदित प्रधान ने विचार रखे।
अध्यक्षता जाट महासभा के अध्यक्ष देवी सिंह सिंभालका और संचालन सुधीर भारतीय ने किया। रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी, पूर्व विधायक राजपाल बालियान, पूर्व मंत्री धर्मवीर बालियान, योगराज सिंह, ब्लाक प्रमुख अमित चौधरी, हर्ष राठी, आकाशवीर बालियान, अंकुर राठी,
अंकित चौधरी, हंसराज जावला, जिला पंचायत सदस्य संजय राठी, पराग चौधरी, जगवीर सिंह आदि मौजूद रहे। सम्मेलन के बीच पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र सिंह को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन में हरियाणा में गिरफ्तार समाज के युवकों को रिहा करने और सही जांच कराने की मांग की गई।