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अनंत चतुर्दशी पर श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 16 Sep 2016 01:28 AM IST
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शुक्रताल में गंगा पूजन करती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
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मोरना में अनंत चतुर्दशी के पावन पर्व पर दूर दराज से आए श्रद्धालुओं ने धर्मनगरी शुक्रताल में मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। इस मौकेे पर श्रद्धालुओं ने दान कर श्री विष्णु भगवान की विशेष पूजा अर्चना में भाग लिया। नगरी के विभिन्न मंदिरों के दर्शन कर आश्रमों में अनेक प्रकार के धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेकर धर्म लाभ उठाया।
उत्तर भारत की पौराणिक धर्मनगरी शुक्रताल के मुख्य गंगा घाट पर अनंत चतुर्दशी के पावन पर्व पर श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ हर-हर महादेव, जय गंगा मैया के जयकारे लगाकर मां गंगा में डुबकी लगाई। प्राचीन परंपरा के अनुसार बृहस्पतिवार के दिन श्री विष्णु भगवान 14 सर्पों के रूप में श्रद्धालुओं के सामने प्रकट होते हैं। पूजा करने से मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। दांए हाथ की बाजू पर एक साल तक अनंत डोर बांधने से मानव इच्छा को प्राप्त करता है।
श्रद्धालुओं ने अन्न, वस्त्र, मक्का, घी तेल आदि का दान कर ब्राह्मणों को भोजन खिलाकर आशीर्वाद लिया। वहीं नगरी के शुकदेव आश्रम के प्राचीन वट वृक्ष की परिक्रमा कर ब्रह्मलीन स्वामी कल्याण देव महाराज की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके समाज उत्थान के लिए किये गये कार्यों को याद किया।
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दंडी आश्रम, हनुमान धाम, गणेश धाम, शनिधाम, गोड़िया मठ, शिव धाम, महेश्वर आश्रम धाम, दुर्गा धाम, पीताम्बरा धाम, नीलकंठ धाम, सिद्धपीठ धाम, मानव निर्माण आश्रम आदि के मंदिरों में भगवान के दर्शन किये। वहीं इस मौके पर आश्रम और धर्मशालाओं में आयोजित सत्संग और भागवत कथाओं में भाग लेकर धर्म लाभ कमाया।
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उत्तर भारत की पौराणिक धर्मनगरी शुक्रताल के मुख्य गंगा घाट पर अनंत चतुर्दशी के पावन पर्व पर श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ हर-हर महादेव, जय गंगा मैया के जयकारे लगाकर मां गंगा में डुबकी लगाई। प्राचीन परंपरा के अनुसार बृहस्पतिवार के दिन श्री विष्णु भगवान 14 सर्पों के रूप में श्रद्धालुओं के सामने प्रकट होते हैं। पूजा करने से मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। दांए हाथ की बाजू पर एक साल तक अनंत डोर बांधने से मानव इच्छा को प्राप्त करता है।
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श्रद्धालुओं ने अन्न, वस्त्र, मक्का, घी तेल आदि का दान कर ब्राह्मणों को भोजन खिलाकर आशीर्वाद लिया। वहीं नगरी के शुकदेव आश्रम के प्राचीन वट वृक्ष की परिक्रमा कर ब्रह्मलीन स्वामी कल्याण देव महाराज की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके समाज उत्थान के लिए किये गये कार्यों को याद किया।
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