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सूफी हजरत ख्वाजा पीरखुशहाल नहीं रहे

Mon, 17 Apr 2017 12:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Mon, 17 Apr 2017 12:12 AM IST
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Death of Sufi Hazrat Khwaja Pir Khushhal
सूफी संत हजरत ख्वाजा पीरखुशहाल। - फोटो : अमर उजाला
मोरना के प्रसिद्ध सूफी हजरत ख्वाजा पीरखुशहाल का रविवार सवेरे इंतकाल हो गया। 105 वर्षीय पीरखुशहाल काफी समय से बीमार चल रहे थे। दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। निधन की खबर से उनके अनुयायियों में शोक व्याप्त हो गया। अंतिम दर्शन के लिए अनुयायियों का बिहारगढ़ स्थित उनकी चिल्लागाह पर तांता लग रहा है। सोमवार को उन्हें सुपुर्देखाक किया जाएगा। 
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सूफी ख्वाजा पीरखुशहाल का जन्म अफगानिस्तान में हुआ था। 1945 में पीर खुशहाल ने दारुल उलूम देवबंद से मौलवीयत की उपाधि प्राप्त की थी। उसके उपरांत उन्होंने मुजफ्फरनगर के खालापार और खतौली क्षेत्र के गांव मौहम्मदपुर लोहड्डा में सूफियाना इबादत आरंभ की। 1965 में सूफी संत मोरना क्षेत्र के बिहारगढ़ के बिहड़ों में तपस्या करने लगे। 17 वर्ष तक रोजे (उपवास) रखते हुए उन्होंने अपने अमल को कामिल बनाकर सिद्धि प्राप्त की। इसके बाद काफी संख्या में लोग उनकी दुआ से शिफा पाने लगे, जिससे उनकी ख्याति की धूम देश के अलावा विदेश तक फैल गई। 
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थाईलैंड, श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान के अलावा खाड़ी देशों सहित अनेक देशों में उनके भारी तादाद में अनुयायी हो गए। मोरना क्षेत्र के ग्राम बिहारगढ़ स्थित चिल्लागाह पर आज भी लोग आस्था रखते हैं। वह काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। लंबी बीमारी के चलते पीर खुशहाल को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रविवार सवेरे करीब 3:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्हें चिल्लागाह पर दफनाने की तैयारी की गई है।
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सोमवार को उन्हें सुपुर्द खाक किया जाएगा। इस दौरान भारी संख्या में अनुयायियों की आने की संभावना है। रविवार को सीओ अकील अहमद और भोपा थाना प्रभारी विजय सिंह ने चिल्लागाह जाकर सुरक्षा इंतजाम का जायजा लिया तथा पुलिस टीम को सुरक्षा के निर्देश दिए। पीर खुशहाल अपने पीछे पत्नी नाजिया आफरीदी सहित, पांच पुत्रियां यासमीन खान, खिरजा खान, असरा खान, हीरा खान, हनिया खान को छोड़ गए हैं।
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