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बांटने से बढ़ता है ज्ञान: मौलाना मदनी
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दस्तारबंदी कार्यक्रम में विचार रखते दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ कासमी
- फोटो : DEVBAND
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दारुल उलूम जकरिया में हुआ दस्तारबंदी कार्यक्रम
देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि इस्लामी तालीम हासिल करने के बाद छात्र देश-दुनिया के कोने-कोने में इसकी रोशनी फैलाने का काम करें, क्योंकि ज्ञान बांटने से बढ़ता है।
सहारनपुर-मुजफ्फरनगर हाईवे स्थित मदरसा दारुल उलूम जकरिया में आयोजित दस्तारबंदी कार्यक्रम में मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मदरसे दीन के किले हैं। जिनसे अच्छे और सच्चे इंसान बनकर निकलते हैं, जो दुनिया के कोने-कोने में पहुंचकर ज्ञान बांटने का काम कर रहे हैं। मौलाना मदनी ने छात्रों को बुखारी शरीफ का अंतिम पाठ भी पढ़ाया। संस्था के मोहतमिम मुफ्ती शरीफ खान कासमी ने कहा कि फारिग होने के बाद छात्रों की जिम्मेदारी बढ़ गई हैं। उन्हें बाहर निकल कर तालीमी क्षेत्र में कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ेगा। जिससे घबराने की जरूरत नहीं है। कार्यक्रम में मौलाना अरशद मदनी सहित उलमा ने दौर-ए-हदीस व मुफ्ती का कोर्स पूरा करने वालों छात्रों की दस्तारबंदी की। एक छात्र का निकाह भी पढ़ाया गया। शुरूआत छात्र मो. उमर की नात-ए-पाक से हुई। अंत में मुफ्ती मुंतजिर-उल-हसन ने दुआ कराई। इसमें मुफ्ती हारून, मुफ्ती शाहनूर खान, मौलाना नोमान हमद, कारी मो. सलमान, कारी अम्मार, कारी फारुख, अजीम आदि मौजूद रहे।
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देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि इस्लामी तालीम हासिल करने के बाद छात्र देश-दुनिया के कोने-कोने में इसकी रोशनी फैलाने का काम करें, क्योंकि ज्ञान बांटने से बढ़ता है।
सहारनपुर-मुजफ्फरनगर हाईवे स्थित मदरसा दारुल उलूम जकरिया में आयोजित दस्तारबंदी कार्यक्रम में मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मदरसे दीन के किले हैं। जिनसे अच्छे और सच्चे इंसान बनकर निकलते हैं, जो दुनिया के कोने-कोने में पहुंचकर ज्ञान बांटने का काम कर रहे हैं। मौलाना मदनी ने छात्रों को बुखारी शरीफ का अंतिम पाठ भी पढ़ाया। संस्था के मोहतमिम मुफ्ती शरीफ खान कासमी ने कहा कि फारिग होने के बाद छात्रों की जिम्मेदारी बढ़ गई हैं। उन्हें बाहर निकल कर तालीमी क्षेत्र में कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ेगा। जिससे घबराने की जरूरत नहीं है। कार्यक्रम में मौलाना अरशद मदनी सहित उलमा ने दौर-ए-हदीस व मुफ्ती का कोर्स पूरा करने वालों छात्रों की दस्तारबंदी की। एक छात्र का निकाह भी पढ़ाया गया। शुरूआत छात्र मो. उमर की नात-ए-पाक से हुई। अंत में मुफ्ती मुंतजिर-उल-हसन ने दुआ कराई। इसमें मुफ्ती हारून, मुफ्ती शाहनूर खान, मौलाना नोमान हमद, कारी मो. सलमान, कारी अम्मार, कारी फारुख, अजीम आदि मौजूद रहे।
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