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हाइवे पर पुल के पास मिला था ग्रामीण का शव
Updated Sat, 01 Dec 2018 12:55 AM IST
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बुढ़ाना। उकारवली निवासी किसान नरेश की मौत के मामले में परिजनों ने तहसीलदार और कर्मचारियों पर आरोप लगाया है। कहा कि तहसीलदार और कर्मचारियों द्वारा उन्हें प्रताड़ित किया जाता था। जिस कारण उनकी मौत हो हुई है। परिजनों ने चेतावनी दी कि जब तक तहसीलदार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नही होगी वे उसका अंतिम संस्कार नही करेंगे।
कोतवाली क्षेत्र के गांव उकावली का रहने वाला नरेश त्यागी (55) पुत्र ओमदत्त 26 नवंबर को अचानक घर से कहीं चला गया था। दो दिन पहले नरेश का शव मेरठ जनपद के सरधना थाने की पुलिस ने अपने क्षेत्र के गांव बपारसी पुल के पास से बरामद किया था। पुलिस की सूचना पर पहुंचे परिजनों ने मोर्चरी में नरेश त्यागी की शनाख्त की थी। पोस्टमार्टम के बाद नरेश के शव को परिजन घर पर ले आए। परिजनों ने शव को घर के आंगन में रखकर उसकी मौत में तहसीलदार और स्टाफ का हाथ होने का आरोप लगाया। मृतक के पुत्र सतेंद्र ने बताया कि उसके पिता किसी ग्रामीण के ट्रैक्टर के लोन में गारंटर थे। लोन अदा नहीं होने के कारण तहसीलदार व तहसील के कर्मचारी उसके पिता पर ऋण जमा करवाने का दबाव बना रहे थे। आरोप है कि उनके पिता को तहसीलदार व तहसील के कर्मचारियों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था। जिसके कारण उसके पिता की मौत हुई है। घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम नितिन गौर, सीओ हरिराम यादव व तहसीलदार मनोज कुमार ग्रामीणों के बीच पहुुंचे। मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने तहसीलदार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की। समाचार लिखे जाने तक अधिकारी ग्रामीणों से वार्ता करने में लगे हैं। उधर, तहसीलदार मनोज कुमार ने बताया कि मृतक के परिजनों द्वारा लगाया गया आरोप निराधार है।
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कोतवाली क्षेत्र के गांव उकावली का रहने वाला नरेश त्यागी (55) पुत्र ओमदत्त 26 नवंबर को अचानक घर से कहीं चला गया था। दो दिन पहले नरेश का शव मेरठ जनपद के सरधना थाने की पुलिस ने अपने क्षेत्र के गांव बपारसी पुल के पास से बरामद किया था। पुलिस की सूचना पर पहुंचे परिजनों ने मोर्चरी में नरेश त्यागी की शनाख्त की थी। पोस्टमार्टम के बाद नरेश के शव को परिजन घर पर ले आए। परिजनों ने शव को घर के आंगन में रखकर उसकी मौत में तहसीलदार और स्टाफ का हाथ होने का आरोप लगाया। मृतक के पुत्र सतेंद्र ने बताया कि उसके पिता किसी ग्रामीण के ट्रैक्टर के लोन में गारंटर थे। लोन अदा नहीं होने के कारण तहसीलदार व तहसील के कर्मचारी उसके पिता पर ऋण जमा करवाने का दबाव बना रहे थे। आरोप है कि उनके पिता को तहसीलदार व तहसील के कर्मचारियों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था। जिसके कारण उसके पिता की मौत हुई है। घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम नितिन गौर, सीओ हरिराम यादव व तहसीलदार मनोज कुमार ग्रामीणों के बीच पहुुंचे। मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने तहसीलदार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की। समाचार लिखे जाने तक अधिकारी ग्रामीणों से वार्ता करने में लगे हैं। उधर, तहसीलदार मनोज कुमार ने बताया कि मृतक के परिजनों द्वारा लगाया गया आरोप निराधार है।
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