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श्रद्धालुओं की कमी से शुक्रतालनगरी हुई बेरौनक
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 28 Nov 2016 12:34 AM IST
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सूना पड़ा शुक्रताल का गंगाघाट।
- फोटो : अमर उजाला
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देश में नोटबंदी के कारण शुकतीर्थ की रौनक पर प्रभाव दिखाई देने लगा है। गंगा घाट से लेकर मंदिरों और आश्रमों में श्रद्धालुओं की कमी के चलते उदासी छायी हुई है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की खरीदारी पर गुजारा कर रहे दुकानदार खाली बैठे हैं।
तीर्थनगरी शुक्रताल में दिनभर श्रद्धालुओं के आवागमन और उनकी सेवा में व्यस्त रहने वाली नगरी वर्तमान में सुनसान प्रतीत हो रही है। श्रद्धालुओं की कमी के चलते गंगाघाट पर आसन लगाए पुरोहित खाली बैठकर दिन काट रहे हैं। ढाबा मालिक व चाय विक्रताओं ने बताया कि नोटबंदी के कारण उनकी दुकानदारी आधे से कम रह गई है। जिस कारण उनकी रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है।
शुक्रताल के प्रमुख धाम शुकदेव, दंडी आश्रम, हनुमान धाम, महेश्वर आश्रम, शिवधाम, शनिधाम, गणेशधाम, पितांबरा धाम, दुर्गा धाम, सिद्धपीठ धाम, बालाजी धाम आदि ने श्रद्धालुओं की कमी के कारण वातावरण अत्यंत शांत हो गया है। बसों से लेकर टैक्सी, टेंपू चालक हाथ पर हाथ धर कर बैठे हैं। नोटबंदी के कारण छायी उदासी को लेकर साधु और संत व नगरवासियों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही है।
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तीर्थनगरी शुक्रताल में दिनभर श्रद्धालुओं के आवागमन और उनकी सेवा में व्यस्त रहने वाली नगरी वर्तमान में सुनसान प्रतीत हो रही है। श्रद्धालुओं की कमी के चलते गंगाघाट पर आसन लगाए पुरोहित खाली बैठकर दिन काट रहे हैं। ढाबा मालिक व चाय विक्रताओं ने बताया कि नोटबंदी के कारण उनकी दुकानदारी आधे से कम रह गई है। जिस कारण उनकी रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है।
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शुक्रताल के प्रमुख धाम शुकदेव, दंडी आश्रम, हनुमान धाम, महेश्वर आश्रम, शिवधाम, शनिधाम, गणेशधाम, पितांबरा धाम, दुर्गा धाम, सिद्धपीठ धाम, बालाजी धाम आदि ने श्रद्धालुओं की कमी के कारण वातावरण अत्यंत शांत हो गया है। बसों से लेकर टैक्सी, टेंपू चालक हाथ पर हाथ धर कर बैठे हैं। नोटबंदी के कारण छायी उदासी को लेकर साधु और संत व नगरवासियों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही है।
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