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18 करोड़ में बनेगा महिलाओं के लिए वातानुकूलित अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Sun, 11 Sep 2016 01:14 AM IST
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निर्माणाधीन अस्पताल।
- फोटो : अमर उजाला
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महिला चिकित्सा पर प्रदेश सरकार मेहरबान है। जिले की महिलाओं के लिए 18 करोड़ की लागत से एयरकंडीशनर हॉस्पिटल बनने जा रहा है। महिलाओं और जच्चा-बच्चा के लिए जिला महिला चिकित्सालय में आधुनिक अस्पताल का निर्माण हो रहा है। चिकित्सालय में तमाम आधुनिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी। करीब 18 करोड़ रुपये से बनने वाला यह महिला चिकित्सालय नवंबर माह में शुरू हो जाएगा।
जिला महिला चिकित्सालय काफी पुराना हो चुका है। 100 बेड के महिला चिकित्सालय में महिला मरीजों की प्रतिदिन की ओपीडी और भर्ती के कारण बिल्डिंग कम पड़ रही है। हालांकि भर्ती मरीजों की संख्या को देखते हुए चिकित्सालय में 30 अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की गई है। बावजूद इसके मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में एक बेड पर दो मरीजों के रहने की व्यवस्था करना डॉक्टरों की मजबूरी है।
महिला चिकित्सालय में प्रतिदिन 600-700 मरीजों की ओपीडी होती है और रोजाना 25-30 डिलीवरी भी होती है। जिनमें से करीब 12 डिलीवरी ऑपरेशन के जरिए होती हैं। ऐसे में ऑपरेशन वाले मरीजों को एक सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती रखना जरूरी है। महिला चिकित्सालय में बेड कम होने पर विभागीय अधिकारियों ने शासन से 100 बेड के नए अस्पताल की संस्तुति की थी, जिसे शासन ने गत वर्ष मंजूरी दी थी।
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शासन से मंजूरी के बाद महिला चिकित्सालय परिसर में ही 100 बेड के नए आधुनिक महिला चिकित्सालय का निर्माण चल रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य आर्गेनाइजेशन (एनएचएम) के अंतर्गत जी प्लस फाइव श्रेणी में यह महिला चिकित्सालय छह मंजिल का बन रहा है। यह चिकित्सालय ओपीडी, ओटी, कलर डोपलर, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, लैब, एसएनसीयू आदि सभी आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा।
अस्पताल में महिलाओं और जच्चा-बच्चा के उपचार के हर आधुनिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध रहेगी। सीएमओ डॉ. सुबोध कुमार ने बताया कि महिला चिकित्सालय का निर्माण प्रगति पर है और नवंबर माह तक इसे शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस आधुनिक चिकित्सालय में हर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। महिला चिकित्सालय में मौजूद चिकित्सकों के अलावा भी अन्य स्पेशलिस्ट डॉक्टरों और स्टाफ की संविदा पर नियुक्ति की जाएगी।
महिला चिकित्सालय में एसएनसीयू खुली
पूर्व मंत्री स्व. चितरंजन स्वरूप के प्रयास से महिला चिकित्सालय में बच्चा एसएनसीयू (सिक न्यू बर्न केयर यूनिट) खुली है। बच्चा नर्सरी के नाम से पहचानी जाने वाली यह यूनिट जिले के नागरिकों लिए बड़ी सौगात है। बच्चों की यह केयर यूनिट आधुनिक मशीनों से लैस है। समय से पहले जन्मे बच्चों, जन्म के समय बच्चों को पीलिया होने, ऑक्सीजन की कमी होने आदि कंडीशन में अभी तक बच्चों को रेफर किया जाता रहा है,
तब परिजन बच्चों को प्राइवेट बच्चा नर्सरी या मेरठ, दिल्ली ने जाने को बेबस रहते थे, मगर अब ऐसा नहीं होता। ऐसे बच्चों को अब एसएनसीयू में रखा जाता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुज राजवंशी ने बताया कि बच्चों की देखरेख के लिए 24 घंटे स्टॉफ और डॉक्टर नियुक्त रहते हैं। बच्चे को हर दो घंटे बाद पास ही भर्ती मां का दूध पिलवाया जाता है। महिला सीएमएस डॉ अमिता गर्ग ने बताया कि यहां पर एसएनसीयू खुलना जनपदवासियों के लिए बड़ी उपलब्धि है। केयर यूनिट में फिलहाल तीन बाल रोग विशेषज्ञ हैं, दो डॉक्टरों की और नियुक्ति की जाएगी।
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जिला महिला चिकित्सालय काफी पुराना हो चुका है। 100 बेड के महिला चिकित्सालय में महिला मरीजों की प्रतिदिन की ओपीडी और भर्ती के कारण बिल्डिंग कम पड़ रही है। हालांकि भर्ती मरीजों की संख्या को देखते हुए चिकित्सालय में 30 अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की गई है। बावजूद इसके मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में एक बेड पर दो मरीजों के रहने की व्यवस्था करना डॉक्टरों की मजबूरी है।
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महिला चिकित्सालय में प्रतिदिन 600-700 मरीजों की ओपीडी होती है और रोजाना 25-30 डिलीवरी भी होती है। जिनमें से करीब 12 डिलीवरी ऑपरेशन के जरिए होती हैं। ऐसे में ऑपरेशन वाले मरीजों को एक सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती रखना जरूरी है। महिला चिकित्सालय में बेड कम होने पर विभागीय अधिकारियों ने शासन से 100 बेड के नए अस्पताल की संस्तुति की थी, जिसे शासन ने गत वर्ष मंजूरी दी थी।
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शासन से मंजूरी के बाद महिला चिकित्सालय परिसर में ही 100 बेड के नए आधुनिक महिला चिकित्सालय का निर्माण चल रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य आर्गेनाइजेशन (एनएचएम) के अंतर्गत जी प्लस फाइव श्रेणी में यह महिला चिकित्सालय छह मंजिल का बन रहा है। यह चिकित्सालय ओपीडी, ओटी, कलर डोपलर, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, लैब, एसएनसीयू आदि सभी आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा।
अस्पताल में महिलाओं और जच्चा-बच्चा के उपचार के हर आधुनिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध रहेगी। सीएमओ डॉ. सुबोध कुमार ने बताया कि महिला चिकित्सालय का निर्माण प्रगति पर है और नवंबर माह तक इसे शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस आधुनिक चिकित्सालय में हर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। महिला चिकित्सालय में मौजूद चिकित्सकों के अलावा भी अन्य स्पेशलिस्ट डॉक्टरों और स्टाफ की संविदा पर नियुक्ति की जाएगी।
महिला चिकित्सालय में एसएनसीयू खुली
पूर्व मंत्री स्व. चितरंजन स्वरूप के प्रयास से महिला चिकित्सालय में बच्चा एसएनसीयू (सिक न्यू बर्न केयर यूनिट) खुली है। बच्चा नर्सरी के नाम से पहचानी जाने वाली यह यूनिट जिले के नागरिकों लिए बड़ी सौगात है। बच्चों की यह केयर यूनिट आधुनिक मशीनों से लैस है। समय से पहले जन्मे बच्चों, जन्म के समय बच्चों को पीलिया होने, ऑक्सीजन की कमी होने आदि कंडीशन में अभी तक बच्चों को रेफर किया जाता रहा है,
तब परिजन बच्चों को प्राइवेट बच्चा नर्सरी या मेरठ, दिल्ली ने जाने को बेबस रहते थे, मगर अब ऐसा नहीं होता। ऐसे बच्चों को अब एसएनसीयू में रखा जाता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुज राजवंशी ने बताया कि बच्चों की देखरेख के लिए 24 घंटे स्टॉफ और डॉक्टर नियुक्त रहते हैं। बच्चे को हर दो घंटे बाद पास ही भर्ती मां का दूध पिलवाया जाता है। महिला सीएमएस डॉ अमिता गर्ग ने बताया कि यहां पर एसएनसीयू खुलना जनपदवासियों के लिए बड़ी उपलब्धि है। केयर यूनिट में फिलहाल तीन बाल रोग विशेषज्ञ हैं, दो डॉक्टरों की और नियुक्ति की जाएगी।