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सर्कस में बालिका को दी गईं यातनाएं
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Mar 2017 11:54 PM IST
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भोपा। सर्कस में 14 वर्षीय एक बालिका को यातनाएं देने का मामला सामने आया है। बालिका किसी तरह से सर्कस संचालकों के चंगुल से निकलकर नन्हेड़ी गांव में एक श्रमिक के घर शरण ली। सर्कस संचालकों ने बालिका का नाम पूनम से बदल कर शबनम रख दिया था।
भोपा क्षेत्र के गांव नन्हेड़ी निवासी युवक ने शनिवार को पुलिस को जानकारी देते हुए बताया कि थाना छपार के बसेडा गांव में बीते माह संत रविदास जयंती पर मेले का आयोजन किया गया था। मेले में सर्कस भी लगा हुआ था। युवक के मुताबिक इसी दौरान खेतो में काम करते समय एक बालिका उसके पास आई, जो काफी घबराई हुई थी। उसने बालिका को काफी समझाबुझाकर उससे पूछताछ कर जानकारी ली। इस पर उसने बताया कि वह सर्कस से निकल भागी है।
बालिका का आरोप है सर्कस संचालकों उसके साथ अक्सर मारपीट करते थे। उसने बताया कि मेरा नाम पूनम था, जिसको बदल कर शबनम कर दिया। बालिका से घर के बारे में जानकारी चाही, तो वह ज्यादा कुछ नहीं बता पाई। केवल खतौली कस्बे का नाम लेती है। युवक ने बताया कि यह सूचना ग्राम ग्राम प्रधान सहित पुलिस को भी दे दी थी। बालिका की देखरेख युवक का दूसरा भाई कर रहा है, जिसके कोई संतान नहीं है। बालिका की बातों से लगता है वह दस वर्षों से सर्कस वालों के कब्जे में थी। भोपा थाना प्रभारी प्रभाकर कैंतुरा का कहना है कि बालिका ठीक से कुछ नहीं बता पा रही है। मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।
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भोपा क्षेत्र के गांव नन्हेड़ी निवासी युवक ने शनिवार को पुलिस को जानकारी देते हुए बताया कि थाना छपार के बसेडा गांव में बीते माह संत रविदास जयंती पर मेले का आयोजन किया गया था। मेले में सर्कस भी लगा हुआ था। युवक के मुताबिक इसी दौरान खेतो में काम करते समय एक बालिका उसके पास आई, जो काफी घबराई हुई थी। उसने बालिका को काफी समझाबुझाकर उससे पूछताछ कर जानकारी ली। इस पर उसने बताया कि वह सर्कस से निकल भागी है।
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बालिका का आरोप है सर्कस संचालकों उसके साथ अक्सर मारपीट करते थे। उसने बताया कि मेरा नाम पूनम था, जिसको बदल कर शबनम कर दिया। बालिका से घर के बारे में जानकारी चाही, तो वह ज्यादा कुछ नहीं बता पाई। केवल खतौली कस्बे का नाम लेती है। युवक ने बताया कि यह सूचना ग्राम ग्राम प्रधान सहित पुलिस को भी दे दी थी। बालिका की देखरेख युवक का दूसरा भाई कर रहा है, जिसके कोई संतान नहीं है। बालिका की बातों से लगता है वह दस वर्षों से सर्कस वालों के कब्जे में थी। भोपा थाना प्रभारी प्रभाकर कैंतुरा का कहना है कि बालिका ठीक से कुछ नहीं बता पा रही है। मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।
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