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परिवहन निगम को बसों के संचालन की फिक्र
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 13 Feb 2017 11:56 PM IST
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उत्तर प्रदेश परिवहन
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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प्रदेश के दूसरे चरण मतदान तथा उत्तराखंड में होने वाले चुनाव को लेकर रोडवेज परिवहन निगम की भी सांसें फूल रही हैं। 15 फरवरी को मतदान होगा। ऐसे में डिपो की बसों के चुनावी क्षेत्रों में संचालन की फिक्र सता रही है। पहले से ही बसें कम होने पर संचालन प्रभावित होने से आय पर भी प्रभाव पड़ेगा। इसको लेकर डिपो अधिकारियों ने संचालन का खाका तैयार किया है।
सूबे में प्रथम चरण के मतदान के अब दूृसरे चरण की तैयारियां जोरों पर हैं। दूसरे चरण में सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स को लेकर रोडवेज की बसें गई हुई हैं। करीब 87 बसें चुनाव में हैं। अब परिवहन निगम के सामने समस्या यह है कि अपने प्रदेश के साथ ही पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में भी 15 फरवरी को ही मतदान होना है। चुनावी माहौल में बसों का संचालन इन क्षेत्रों में नहीं हो सकता है।
वहीं, डिपो की करीब 40 से अधिक बसें दिल्ली, देहरादून और हरिद्वार रूट पर लगी हुई हैं। यह लंबी दूरी की बसें डिपो की कमाई का जरिया हैं। इसके अलावा भी लोकल क्षेत्र सहारनपुर, बिजनौर, नजीबाबाद आदि क्षेत्रों में निगम की बसें जाती हैं, लेकिन इन क्षेत्रों में चुनाव होने के कारण बसों का संचालन नहीं हो सकेगा, जबकि निगम की बसों के अलावा उत्तराखंड और दिल्ली में अनुबंधित नहीं जा सकती हैं।
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ऐसे में विभागीय अफसरों के माथे पर पसीना उतर आया है। 15 फरवरी को उत्तराखंड जाने वाली बसों का रूट बदला गया है। एआरएम बीपी अग्रवाल ने बताया कि दूसरे के चरण के चुनाव वाले जनपदों और उत्तराखंड को जाने वाली बसों का संचालन मेरठ, दिल्ली के साथ लोकल में रखा गया है। अनुबंधित बसों को भी आनंद विहार तक भेजा जाएगा। चुनाव वाले दिन इन क्षेत्रों में बसों के फेरे बढ़ाए गए हैं, ताकि आय पर कोई प्रभाव न पड़ सके।
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सूबे में प्रथम चरण के मतदान के अब दूृसरे चरण की तैयारियां जोरों पर हैं। दूसरे चरण में सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स को लेकर रोडवेज की बसें गई हुई हैं। करीब 87 बसें चुनाव में हैं। अब परिवहन निगम के सामने समस्या यह है कि अपने प्रदेश के साथ ही पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में भी 15 फरवरी को ही मतदान होना है। चुनावी माहौल में बसों का संचालन इन क्षेत्रों में नहीं हो सकता है।
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वहीं, डिपो की करीब 40 से अधिक बसें दिल्ली, देहरादून और हरिद्वार रूट पर लगी हुई हैं। यह लंबी दूरी की बसें डिपो की कमाई का जरिया हैं। इसके अलावा भी लोकल क्षेत्र सहारनपुर, बिजनौर, नजीबाबाद आदि क्षेत्रों में निगम की बसें जाती हैं, लेकिन इन क्षेत्रों में चुनाव होने के कारण बसों का संचालन नहीं हो सकेगा, जबकि निगम की बसों के अलावा उत्तराखंड और दिल्ली में अनुबंधित नहीं जा सकती हैं।
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ऐसे में विभागीय अफसरों के माथे पर पसीना उतर आया है। 15 फरवरी को उत्तराखंड जाने वाली बसों का रूट बदला गया है। एआरएम बीपी अग्रवाल ने बताया कि दूसरे के चरण के चुनाव वाले जनपदों और उत्तराखंड को जाने वाली बसों का संचालन मेरठ, दिल्ली के साथ लोकल में रखा गया है। अनुबंधित बसों को भी आनंद विहार तक भेजा जाएगा। चुनाव वाले दिन इन क्षेत्रों में बसों के फेरे बढ़ाए गए हैं, ताकि आय पर कोई प्रभाव न पड़ सके।