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भाजपा ने अब बसीकलां से पलायन का मुद्दा उठाया
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 16 Jun 2016 12:42 AM IST
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शाहपुर के बसीकलां में खाली पड़ा मकान।
- फोटो : अमर उजाला
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शामली जनपद के कैराना व कांधला के बाद अब शाहपुर से पलायन का मुद्दा भी भाजपा ने उठाया है। क्षेत्र से पलायन करने वाले परिवारों से संपर्क कर उनसे समस्या जानी जा रही है। भाजपा नेता उमेश मलिक ने प्रेस वार्ता कर शाहपुर के गांव बसीकलां से पलायन कर खानाबदोश लोगों जैसा जीवन जी रहे लोगों की हकीकत बयां की।
शाहपुर क्षेत्र के गांव बसीकलां से पलायन कर परिवारों की सूची तैयार कर भाजपा अब इसे भी हवा देेने की कोशिश में जुटी हुई है। पलायन को लेकर भाजपा नेता उमेश मलिक ने बताया की शाहपुर के गांव बसीकलां के हालात ऐसे हैं कि वहां विशेष समुदाय के लोगों के उत्पीड़न की वजह से परिवार घरबार छोड़ कर जा रहे हैं।
वर्ष 2013 के दंगों में जान बचा कर भागे परिवार आज तक खानाबदोश लोगों की तरह झोपड़ी डालकर रह रहे हैं। पलायन कर गए परिवारों के मकान खाली पड़े हुए हैं। प्रशासन ने उन परिवारों को वापस गांव में लाने के लिए भी कोई पहल नहीं की। भाजपा नेता के साथ आए बसीकलां से पलायन कर चुके लोगों ने बताया की उनके गांव के हालात ऐसे हैं कि वहां उनको सम्मान से रहने नहीं दिया जा रहा था।
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नीटू वाल्मीकि ने बताया कि सात सितंबर 2013 को जब नंगला मंदौड़ पंचायत में जा रहे लोगों पर बसीकलां में हमला किया गया, उसके बाद विशेष समुदाय की भीड़ ने उनके मोहल्ले की ओर कूच किया था, जिससे गांव के सैकड़ों परिवार घरबार छोड़ कर चले गए थे।
मलिक शाहपुर क्षेत्र के गांव बसीकलां के अलावा अन्य गांवों से पलायन कर गए परिवारों की सूची तैयार कर प्रदेश के राज्यपाल व केंद्रीय गृह मंत्री को भेजेंगे। प्रेस वार्ता के दौरान रविन्द्र सिंह, कुलदीप त्यागी, धनकुमार सैनी, एकांश त्यागी, नीटू मौजूद रहे।
गांव में दंगा नहीं हुआ था
क्षेत्र के गांव बसीकलां से पलायन के मुद्दे पर ग्राम प्रधान के पति याकूब राइन व 2013 दंगे के दौरान ग्राम प्रधान रहे हाजी मुरसलीन का कहना है की उनके गांव में किसी प्रकार का कोई दंगा नहीं हुआ। जो लोग किसी वजह से गांव छोड़ कर चले गए थे, उन्हें वापस लाने का प्रयास किया गया, जिनमें से कुछ परिवार वापस आ गए थे।
20 साल से पलायन कर रहा हिंदू: अरोरा
राष्ट्रीय हिंदू शक्ति संगठन की चिंतन बैठक में राष्ट्रीय संयोजक संजय अरोरा ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई कस्बों में 20 वर्षों से हिंदुओं का पलायन हो रहा है।
बालाजी चौक पर एक रेस्टोरेंट में संगठन की बैठक में अरोरा ने कहा कि कैराना और कांधला आतंकवाद के निशाने पर है। 20 वर्षों से पलायन हो रहा है। संगठन घर घर जाकर समाज को जागृत करने का काम करेगा। प्रदेश अध्यक्ष सतेंद्र शर्मा ने कहा कि हमें अपने बच्चों के संस्कार पर विशेष ध्यान देना होगा। समाज के पतन का कारण संस्कार और आहार का शुद्ध नहीं होना है।
अध्यक्षता दिल्ली से आए संत लोकेश शर्मा और संचालन सोनू माहेश्वरी ने किया। उत्तराखंड अध्यक्ष हेमा शर्मा, दिल्ली अध्यक्ष हिमांशु मित्तल, हरियाणा अध्यक्ष सौरभ चौहान, पंजाब अध्यक्ष मनोज सिंगला, यूपी संयोजक मनोज अग्निहोत्री ने विचार रखे। कार्यक्रम में अमरीश शर्मा, अशोक त्यागी, मुकेश वर्मा, बीएस मलिक, नीरज माहेश्वरी, पवन राना, एस कुमार, अंकित पाल, शिवपाल, संजीव वर्मा आदि रहे।
पाकिस्तान में भी पलायन की हलचल
हिंदुओं के कैराना छोड़ने के मुद्दे ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी हलचल मचा दी है। एक समुदाय के पलायन की बात राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बनते ही उस पर पाकिस्तान की निगाहें भी टिक गई हैं। कराची, लाहौर और इस्लामाबाद में बसे रिश्तेदार फोन पर कैराना के सच की जानकारी जुटा रहे हैं।
भाजपा सांसद हुकुम सिंह का मुद्दा देश की सीमाएं लांघकर पाकिस्तान भी पहुंच गया है। कैराना और कांधला को बीते एक दशक में छोड़कर जा चुके परिवारों की सूची जारी होने के बाद सूबे में ही सियासी आरोप-प्रत्यारोप नहीं बढ़े, बल्कि पाक में यहां की हर हलचल पर निगाहें टिक गई हैं। बंटवारे के बाद ऐसे अनगिनत परिवार हैं, जो पाक में जाकर बस गए।
वह अपने नाते-रिश्तेदारों से सच जानने की कोशिश में हैं। यहां की कई बेटियां पाक के शहरों में ब्याही हैं। हालात चाहे कितने भी तनावपूर्ण रहे, लेकिन समझौता एक्सप्रेस के जरिए कैराना के मुसलिमों की आवाजाही पाक में होती रही। रिश्ते की मजबूत डोर के साथ एक कड़वा सच यह भी है कि पाक से जुड़े अवैध कारोबार की जड़ें कैराना तक फैली हैं।
कैराना के वसीमुल्ला कहते हैं कि नाते-रिश्तेदारों ने यहां के सच को जानना चाहा है। उनके मुताबिक कुछ दहशत में और कुछ कारोबार की तरक्की के लिए बाहर गए हैं। अभी भी उनके परिवार के सदस्य यहां रहते हैं। खालापार के शकील अहमद की बेटी कराची में ब्याही हैं। वह कहते हैं कि जब से टीवी पर कैराना का मुद्दा छिड़ा है, तब से रिश्तेदार भी सच जानने को उतावले हैं।
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शाहपुर क्षेत्र के गांव बसीकलां से पलायन कर परिवारों की सूची तैयार कर भाजपा अब इसे भी हवा देेने की कोशिश में जुटी हुई है। पलायन को लेकर भाजपा नेता उमेश मलिक ने बताया की शाहपुर के गांव बसीकलां के हालात ऐसे हैं कि वहां विशेष समुदाय के लोगों के उत्पीड़न की वजह से परिवार घरबार छोड़ कर जा रहे हैं।
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वर्ष 2013 के दंगों में जान बचा कर भागे परिवार आज तक खानाबदोश लोगों की तरह झोपड़ी डालकर रह रहे हैं। पलायन कर गए परिवारों के मकान खाली पड़े हुए हैं। प्रशासन ने उन परिवारों को वापस गांव में लाने के लिए भी कोई पहल नहीं की। भाजपा नेता के साथ आए बसीकलां से पलायन कर चुके लोगों ने बताया की उनके गांव के हालात ऐसे हैं कि वहां उनको सम्मान से रहने नहीं दिया जा रहा था।
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नीटू वाल्मीकि ने बताया कि सात सितंबर 2013 को जब नंगला मंदौड़ पंचायत में जा रहे लोगों पर बसीकलां में हमला किया गया, उसके बाद विशेष समुदाय की भीड़ ने उनके मोहल्ले की ओर कूच किया था, जिससे गांव के सैकड़ों परिवार घरबार छोड़ कर चले गए थे।
मलिक शाहपुर क्षेत्र के गांव बसीकलां के अलावा अन्य गांवों से पलायन कर गए परिवारों की सूची तैयार कर प्रदेश के राज्यपाल व केंद्रीय गृह मंत्री को भेजेंगे। प्रेस वार्ता के दौरान रविन्द्र सिंह, कुलदीप त्यागी, धनकुमार सैनी, एकांश त्यागी, नीटू मौजूद रहे।
गांव में दंगा नहीं हुआ था
क्षेत्र के गांव बसीकलां से पलायन के मुद्दे पर ग्राम प्रधान के पति याकूब राइन व 2013 दंगे के दौरान ग्राम प्रधान रहे हाजी मुरसलीन का कहना है की उनके गांव में किसी प्रकार का कोई दंगा नहीं हुआ। जो लोग किसी वजह से गांव छोड़ कर चले गए थे, उन्हें वापस लाने का प्रयास किया गया, जिनमें से कुछ परिवार वापस आ गए थे।
20 साल से पलायन कर रहा हिंदू: अरोरा
राष्ट्रीय हिंदू शक्ति संगठन की चिंतन बैठक में राष्ट्रीय संयोजक संजय अरोरा ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई कस्बों में 20 वर्षों से हिंदुओं का पलायन हो रहा है।
बालाजी चौक पर एक रेस्टोरेंट में संगठन की बैठक में अरोरा ने कहा कि कैराना और कांधला आतंकवाद के निशाने पर है। 20 वर्षों से पलायन हो रहा है। संगठन घर घर जाकर समाज को जागृत करने का काम करेगा। प्रदेश अध्यक्ष सतेंद्र शर्मा ने कहा कि हमें अपने बच्चों के संस्कार पर विशेष ध्यान देना होगा। समाज के पतन का कारण संस्कार और आहार का शुद्ध नहीं होना है।
अध्यक्षता दिल्ली से आए संत लोकेश शर्मा और संचालन सोनू माहेश्वरी ने किया। उत्तराखंड अध्यक्ष हेमा शर्मा, दिल्ली अध्यक्ष हिमांशु मित्तल, हरियाणा अध्यक्ष सौरभ चौहान, पंजाब अध्यक्ष मनोज सिंगला, यूपी संयोजक मनोज अग्निहोत्री ने विचार रखे। कार्यक्रम में अमरीश शर्मा, अशोक त्यागी, मुकेश वर्मा, बीएस मलिक, नीरज माहेश्वरी, पवन राना, एस कुमार, अंकित पाल, शिवपाल, संजीव वर्मा आदि रहे।
पाकिस्तान में भी पलायन की हलचल
हिंदुओं के कैराना छोड़ने के मुद्दे ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी हलचल मचा दी है। एक समुदाय के पलायन की बात राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बनते ही उस पर पाकिस्तान की निगाहें भी टिक गई हैं। कराची, लाहौर और इस्लामाबाद में बसे रिश्तेदार फोन पर कैराना के सच की जानकारी जुटा रहे हैं।
भाजपा सांसद हुकुम सिंह का मुद्दा देश की सीमाएं लांघकर पाकिस्तान भी पहुंच गया है। कैराना और कांधला को बीते एक दशक में छोड़कर जा चुके परिवारों की सूची जारी होने के बाद सूबे में ही सियासी आरोप-प्रत्यारोप नहीं बढ़े, बल्कि पाक में यहां की हर हलचल पर निगाहें टिक गई हैं। बंटवारे के बाद ऐसे अनगिनत परिवार हैं, जो पाक में जाकर बस गए।
वह अपने नाते-रिश्तेदारों से सच जानने की कोशिश में हैं। यहां की कई बेटियां पाक के शहरों में ब्याही हैं। हालात चाहे कितने भी तनावपूर्ण रहे, लेकिन समझौता एक्सप्रेस के जरिए कैराना के मुसलिमों की आवाजाही पाक में होती रही। रिश्ते की मजबूत डोर के साथ एक कड़वा सच यह भी है कि पाक से जुड़े अवैध कारोबार की जड़ें कैराना तक फैली हैं।
कैराना के वसीमुल्ला कहते हैं कि नाते-रिश्तेदारों ने यहां के सच को जानना चाहा है। उनके मुताबिक कुछ दहशत में और कुछ कारोबार की तरक्की के लिए बाहर गए हैं। अभी भी उनके परिवार के सदस्य यहां रहते हैं। खालापार के शकील अहमद की बेटी कराची में ब्याही हैं। वह कहते हैं कि जब से टीवी पर कैराना का मुद्दा छिड़ा है, तब से रिश्तेदार भी सच जानने को उतावले हैं।