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मुआवजे को लेकर भाकियू ने हुंकार भरी
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 24 Aug 2016 01:09 AM IST
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भाकियू की बैठक में मौजूद कार्यकर्ता।
- फोटो : अमर उजाला
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खतौली में फ्रंट कॉरिडोर के लिए रेलवे की ओर से किसानों की भूमि का अधिग्रहण करने के बाद मुआवजे की मांग को लेकर किसानों की पंचायत में भाकियू ने दो सितंबर को रेलवे ट्रैक जाम करने की चेतावनी दी है। गांव भैंसी में ग्राम प्रधान सुनील अहलावत के घेर में हुई किसानों की पंचायत में जनपद के 26 ग्रामों के लोग मौजूद थे।
इस दौरान भाकियू जिलाध्यक्ष राजू अहलावत ने कहा कि रेलवे ने 26 ग्रामों के किसानों की 11 लाख वर्ग मीटर भूमि अधिग्रहण की है, मगर अभी तक भूमि के हिसाब से मुआवजा तय नहीं किया है। उन्होंने कहा कि अधिग्रहण की गई भूमि का बेस रेट कम है। इसका बेस रेट आवासीय होना चाहिए। नए कानून में कृषि रेट का कोई प्रावधान नहीं है, बल्कि जिस उद्देश्य से भूमि अधिग्रहण की जा रही है, उसके हिसाब से किसानों को उसका मूल्य मिलना चाहिए।
आर्बिटेटर कमिश्नर नहीं डीएम होना चाहिए। किसानों को फसल के नुकसान की भरपाई हो, प्रभावित किसान परिवार के एक सदस्य को रेलवे में नौकरी देने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगे पूरी नहीं की जाती हैं तो दो सितंबर को रेलवे ट्रैक पर तंबू लगाकर रेल संचालन बाधित किया जाएगा। इस मामले में जिला प्रशासन तथा रेलवे ने किसानों के साथ टकराव की स्थित पैदा की तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और रेल विभाग की होगी। पंचायत में भारी संख्या में किसान मौजूद थे।
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इस दौरान भाकियू जिलाध्यक्ष राजू अहलावत ने कहा कि रेलवे ने 26 ग्रामों के किसानों की 11 लाख वर्ग मीटर भूमि अधिग्रहण की है, मगर अभी तक भूमि के हिसाब से मुआवजा तय नहीं किया है। उन्होंने कहा कि अधिग्रहण की गई भूमि का बेस रेट कम है। इसका बेस रेट आवासीय होना चाहिए। नए कानून में कृषि रेट का कोई प्रावधान नहीं है, बल्कि जिस उद्देश्य से भूमि अधिग्रहण की जा रही है, उसके हिसाब से किसानों को उसका मूल्य मिलना चाहिए।
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आर्बिटेटर कमिश्नर नहीं डीएम होना चाहिए। किसानों को फसल के नुकसान की भरपाई हो, प्रभावित किसान परिवार के एक सदस्य को रेलवे में नौकरी देने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगे पूरी नहीं की जाती हैं तो दो सितंबर को रेलवे ट्रैक पर तंबू लगाकर रेल संचालन बाधित किया जाएगा। इस मामले में जिला प्रशासन तथा रेलवे ने किसानों के साथ टकराव की स्थित पैदा की तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और रेल विभाग की होगी। पंचायत में भारी संख्या में किसान मौजूद थे।
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