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भागवत दिव्य ज्ञान की जनक ः ओमानंद
अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 17 Oct 2016 04:03 PM IST
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शुकदेव आश्रम में स्वामी ओमानंद से आशीर्वाद लेते कथावाचक।
- फोटो : अमर उजाला
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मुजफ्फरनगर के मोरना में भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत दिव्य ज्ञान की जनक है। इसमें भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अद्भुत मिश्रण है। भागवत जीवन और मृत्यु के सत्य का बोध कराती है।
श्री डोंगरे जी भागवत भवन में कथा व्यास हरिद्वार के स्वामी अकामानंद गिरी जी महाराज की भागवत कथा का शुभारंभ स्वामी ओमानंद ने किया। उन्होंने कहा कि भगवान वेदव्यास जी ने अपनी आत्म शांति के लिए नारद जी के उपदेश से भागवत की रचना की थी। भागवत संसार के भय को दूर करती है। ज्ञानी मरते हुए भी हंसता है और सांसारिक जीते हुए भी मरता है। ज्ञान हंसना नहीं सिखाता, बस रोने का कारण मिटा देता है।
ऐसे ही अज्ञान रोने नहीं देता बस हंसने के कारणों को मिटा देता है। उन्होंने कहा कि ज्ञानी हर स्थिति में प्रसन्न रहता है कि वो जानता है जो मिला वह कभी उसका था ही नहीं और जो कुछ मुझसे छूट रहा है, वह भी उसका नहीं है। परिवर्तन ही दुनिया का शाश्वत सत्य है। मूढता में नहीं ज्ञान में जीना चाहिए, ताकि हर स्थिति में प्रसन्न रह सके। श्रीकृष्ण परमधाम धर्मार्थ ट्रस्ट भारत माता पूरम भूपतवाला हरिद्वार के निर्देशन में आयोजित कथा में यज्ञमान आरएस सैनी और आरपी अग्रवाल जयपुर ने संतो का सम्मान किया।
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उधर, शरद पूर्णिमा महापर्व पर भागवत जन्मभूमि श्रीशुकदेव आश्रम में लातूर महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, चैन्नई सहित अन्य चार कथाओं की अमृत वर्षा शुरू हुई।
मंसूरपुर। भाजपाइयों की ओर से बूथ समीक्षा के लिए बैठक आयोजित की गई। इसमें जिला प्रभारी रामपाल पुंडीर ने वहलना मंडल बूथ की समीक्षा की। वहलना मंडल अध्यक्ष नकुल उपाध्यक्ष के आवास पर बैठक में जगदीश पांचाल, संजय धीमान, विजय कश्यप, हरिराम, राजबीर सिंह लछेड़ा, हरीश आदि रहे।
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श्री डोंगरे जी भागवत भवन में कथा व्यास हरिद्वार के स्वामी अकामानंद गिरी जी महाराज की भागवत कथा का शुभारंभ स्वामी ओमानंद ने किया। उन्होंने कहा कि भगवान वेदव्यास जी ने अपनी आत्म शांति के लिए नारद जी के उपदेश से भागवत की रचना की थी। भागवत संसार के भय को दूर करती है। ज्ञानी मरते हुए भी हंसता है और सांसारिक जीते हुए भी मरता है। ज्ञान हंसना नहीं सिखाता, बस रोने का कारण मिटा देता है।
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ऐसे ही अज्ञान रोने नहीं देता बस हंसने के कारणों को मिटा देता है। उन्होंने कहा कि ज्ञानी हर स्थिति में प्रसन्न रहता है कि वो जानता है जो मिला वह कभी उसका था ही नहीं और जो कुछ मुझसे छूट रहा है, वह भी उसका नहीं है। परिवर्तन ही दुनिया का शाश्वत सत्य है। मूढता में नहीं ज्ञान में जीना चाहिए, ताकि हर स्थिति में प्रसन्न रह सके। श्रीकृष्ण परमधाम धर्मार्थ ट्रस्ट भारत माता पूरम भूपतवाला हरिद्वार के निर्देशन में आयोजित कथा में यज्ञमान आरएस सैनी और आरपी अग्रवाल जयपुर ने संतो का सम्मान किया।
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उधर, शरद पूर्णिमा महापर्व पर भागवत जन्मभूमि श्रीशुकदेव आश्रम में लातूर महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, चैन्नई सहित अन्य चार कथाओं की अमृत वर्षा शुरू हुई।
मंसूरपुर। भाजपाइयों की ओर से बूथ समीक्षा के लिए बैठक आयोजित की गई। इसमें जिला प्रभारी रामपाल पुंडीर ने वहलना मंडल बूथ की समीक्षा की। वहलना मंडल अध्यक्ष नकुल उपाध्यक्ष के आवास पर बैठक में जगदीश पांचाल, संजय धीमान, विजय कश्यप, हरिराम, राजबीर सिंह लछेड़ा, हरीश आदि रहे।