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हड़ताल की घोषणा से प्रभावित हुई बैंकिंग सेवाएं
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मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना। निजीकरण के विरोध में केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ कामगार संगठनों ने देश व्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। दो दिवसीय हड़ताल को बैंक संघों ने समर्थन किया है। जिस कारण सभी बैंकों में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हुई। अधिकतर सभी बैंकों के अधिकारी अपनी-अपनी शाखाओं में मौजूद रहे।
मार्च के अंतिम सप्ताह में बैंकों की दो दिवसीय हड़ताल की घोषणा के कारण कस्बा व देहात की सभी बैंकों की सभी शाखाओं में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हुई। किसी बैंक में आधे से अधिक कर्मचारी तथा किसी बैंक में आधे व उससे कम कर्मचारी मौजूद रहे। बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा बुढ़ाना के अधिकारी अशरफ अली तथा पंजाब नैशनल बैंक की शाखा बुढ़ाना के शाखा प्रबंधक हरेंद्र सिंह आदि ने बताया कि सभी बैंकों के कई-कई संगठन हैं। जो अधिकारी व कर्मचारी जिस संगठन से संबंधित है, वे उसी के निर्देशों के अनुसार कार्य करते हैं। कुछ बैंक संघों की देशव्यापी हड़ताल की घोषणा से अधिकतर व्यापारियों में मायूसी दिखाई दी। ग्रामीणों में कम परेशानी दिखाई दी। व्यापारी राजेश संगल, अभिषेक संगल, महेश जैन व मेडिकल लाइन के व्यापारी टीटन सैनी का कहना है कि कैश के लेनदेन अथवा ड्राफ्ट आदि बनवाने में उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ा। मार्च के अंतिम दो दिनों में बैंकों की क्लोजिंग कार्य के कारण वैसे भी पेरेशानी होती है। मार्च के अंतिम सप्ताह में हड़ताल की घोषणा गलत है। कुछ व्यापारियों ने बैंक कर्मचारियों व अधिकारियों के निजीकरण के विरोध को उचित ठहराया।
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मार्च के अंतिम सप्ताह में बैंकों की दो दिवसीय हड़ताल की घोषणा के कारण कस्बा व देहात की सभी बैंकों की सभी शाखाओं में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हुई। किसी बैंक में आधे से अधिक कर्मचारी तथा किसी बैंक में आधे व उससे कम कर्मचारी मौजूद रहे। बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा बुढ़ाना के अधिकारी अशरफ अली तथा पंजाब नैशनल बैंक की शाखा बुढ़ाना के शाखा प्रबंधक हरेंद्र सिंह आदि ने बताया कि सभी बैंकों के कई-कई संगठन हैं। जो अधिकारी व कर्मचारी जिस संगठन से संबंधित है, वे उसी के निर्देशों के अनुसार कार्य करते हैं। कुछ बैंक संघों की देशव्यापी हड़ताल की घोषणा से अधिकतर व्यापारियों में मायूसी दिखाई दी। ग्रामीणों में कम परेशानी दिखाई दी। व्यापारी राजेश संगल, अभिषेक संगल, महेश जैन व मेडिकल लाइन के व्यापारी टीटन सैनी का कहना है कि कैश के लेनदेन अथवा ड्राफ्ट आदि बनवाने में उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ा। मार्च के अंतिम दो दिनों में बैंकों की क्लोजिंग कार्य के कारण वैसे भी पेरेशानी होती है। मार्च के अंतिम सप्ताह में हड़ताल की घोषणा गलत है। कुछ व्यापारियों ने बैंक कर्मचारियों व अधिकारियों के निजीकरण के विरोध को उचित ठहराया।
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