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रफ्ता-रफ्ता उकेरी सुरों की आत्मा
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 31 Aug 2016 01:22 AM IST
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स्पिक मैके कार्यक्रम में मौजूद कलाकार।
- फोटो : अमर उजाला
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देशव्यापी सांस्कृतिक आंदोलन में संलग्न संस्था स्पिक मैके के तत्वावधान में डीएवी कॉलेज में कलाकार अनुप्रिया देवताले का वादन सुनकर श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो गए। रेडिओ एवं टेलीविजन की टॉप ग्रेड की कलाकार अनुप्रिया देवताले का कार्यक्रम सुनने डीएम डीके सिंह की पत्नी विजया सिंह भी पहुंचीं।
चालीस से अधिक देशों में अपनी कला की धाक जमा चुकीं विदुषी अनुप्रिया देवताले ने अपनी सिद्ध उंगलियों से ज्यों ही वायलिन के तारों को छुआ, संगीत सरिता का प्रवाह फूट पड़ा। प्रात:कालीन राग बसंत मुखारी के अलाप से ही उनकी संगीत साधना की खुशबू माहौल में गमक उठी। रफ्ता-रफ्ता सुरों की आत्मा को उकेरते हुए उन्होंने विलंबित झपताल में मन्द्र और द्रुत तीन ताल में एक के बाद एक रचनाएं प्रस्तुत कीं।
अंत में झाला की प्रस्तुति सुनकर श्रोतागण तालियां बजाने पर मजबूर हो गए। अनुप्रिया ने सिद्ध कर दिया कि उस्ताद अमजद अली खान और पंडित रामनारायण जैसे दिग्गज गुरुओं ने उनकी कला को तराश कर एक नायाब हीरा में यूं तब्दील नहीं किया। कार्यक्रम के अंत में महात्मा गाँधी की प्रिय रामधुन रघुपति राघव राजा राम पेश कर दिखा दिया कि उनका वायलिन बजता नहीं गाता भी है। सभागार में उपस्थित सारे श्रोता थोड़ी देर के लिए गायक बन गए।
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तबले पर उनके साथ विख्यात तबला वादक उस्ताद अख्तर हसन साहब ने बेजोड़ संगत प्रस्तुत की। कार्यक्रम का शुभारम्भ परंपरागत दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। डीएवी कॉलेज की प्रबंध समिति के डॉ एमके बंसल, प्राचार्य डॉ पीके गुप्ता, विजया सिंह, नव्या अग्रवाल एवं प्रीति सिंह ने भी शिरकत की। कलाकारों का स्वागत डॉ बंसल, प्राचार्य डॉ पीके गुप्ता ने किया। प्रबंध समिति के वरिष्ठ सदस्य जयप्रकाश आजाद ने कलाकारों को भेंट प्रदान की।
प्राचार्य डॉ पीके गुप्ता ने कलाकारों सहित सभी का आभार व्यक्त किया। छात्रा शिवानी ने संचालन किया। इस अवसर पर डीएवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शिवकुमार यादव सहित कई स्कूलों के बच्चे भी उपस्थित रहे। डॉ मृदुला मित्तल, गरिमा जैन, राहुल शर्मा, राहुल सेन, अभिनव त्यागी, शुभम सागर, हर्ष ने विशेष योगदान किया। विद्यालय के ललित कला विभाग की छात्रों ने सुन्दर रंगोली बनाकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
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चालीस से अधिक देशों में अपनी कला की धाक जमा चुकीं विदुषी अनुप्रिया देवताले ने अपनी सिद्ध उंगलियों से ज्यों ही वायलिन के तारों को छुआ, संगीत सरिता का प्रवाह फूट पड़ा। प्रात:कालीन राग बसंत मुखारी के अलाप से ही उनकी संगीत साधना की खुशबू माहौल में गमक उठी। रफ्ता-रफ्ता सुरों की आत्मा को उकेरते हुए उन्होंने विलंबित झपताल में मन्द्र और द्रुत तीन ताल में एक के बाद एक रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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अंत में झाला की प्रस्तुति सुनकर श्रोतागण तालियां बजाने पर मजबूर हो गए। अनुप्रिया ने सिद्ध कर दिया कि उस्ताद अमजद अली खान और पंडित रामनारायण जैसे दिग्गज गुरुओं ने उनकी कला को तराश कर एक नायाब हीरा में यूं तब्दील नहीं किया। कार्यक्रम के अंत में महात्मा गाँधी की प्रिय रामधुन रघुपति राघव राजा राम पेश कर दिखा दिया कि उनका वायलिन बजता नहीं गाता भी है। सभागार में उपस्थित सारे श्रोता थोड़ी देर के लिए गायक बन गए।
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तबले पर उनके साथ विख्यात तबला वादक उस्ताद अख्तर हसन साहब ने बेजोड़ संगत प्रस्तुत की। कार्यक्रम का शुभारम्भ परंपरागत दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। डीएवी कॉलेज की प्रबंध समिति के डॉ एमके बंसल, प्राचार्य डॉ पीके गुप्ता, विजया सिंह, नव्या अग्रवाल एवं प्रीति सिंह ने भी शिरकत की। कलाकारों का स्वागत डॉ बंसल, प्राचार्य डॉ पीके गुप्ता ने किया। प्रबंध समिति के वरिष्ठ सदस्य जयप्रकाश आजाद ने कलाकारों को भेंट प्रदान की।
प्राचार्य डॉ पीके गुप्ता ने कलाकारों सहित सभी का आभार व्यक्त किया। छात्रा शिवानी ने संचालन किया। इस अवसर पर डीएवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शिवकुमार यादव सहित कई स्कूलों के बच्चे भी उपस्थित रहे। डॉ मृदुला मित्तल, गरिमा जैन, राहुल शर्मा, राहुल सेन, अभिनव त्यागी, शुभम सागर, हर्ष ने विशेष योगदान किया। विद्यालय के ललित कला विभाग की छात्रों ने सुन्दर रंगोली बनाकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।