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जिला अस्पताल में तीन माह से एंटी रेबीज इंजेक्शन खत्म
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 29 Mar 2017 12:24 AM IST
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कुत्ते के काटने पर जिला अस्पताल का रुख न करें तो बेहतर रहेगा। स्वास्थ्य महकमा एंटी रेबीज इंजेक्शन से खाली हाथ है। एंटी रेबीज के लिए जिला अस्पताल तीन माह से मोहताज है। इंजेक्शन नहीं होने के कारण मरीज निराश होकर लौट रहे हैं।
गली-मोहल्लों में कुत्ते छोटे बच्चे और लोगों को शिकार बना रहे हैं। सबसे अधिक मुश्किलें अब मुस्लिम क्षेत्रों में बढ़ गई है। यहां कुत्ते आदमखोर हो गए हैं। उधर, जिले का स्वास्थ्य महकमा दवाइयों, इंजेक्शन से खाली हाथ है। जनवरी से अस्पताल में एंटी रेबीज के इंजेक्शन की किल्लत है। सीएचसी और पीएचसी पर भी बचे इंजेक्शन खत्म हो गए हैं।
जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को निराशा हाथ लग रही है। एंटी रेबीज ओपीडी के चिकित्सक डॉ. संजय भटनागर ने बताया कि अस्पताल में इंजेक्शन खत्म हैं। विवशता में मरीजों को कुछ ही दवाईयों के सहारे इलाज किया जा रहा है। उधर, सीएमओ डॉ. पीएस मिश्रा ने बताया कि प्रदेशभर में ही एंटी रेबीज के इंजेक्शन की कमी है। अस्पताल में भी इंजेक्शन नहीं है। इस बारे में शासन को लिखा गया है। जल्द ही इंजेक्शन आने की उम्मीद है।
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रोजाना 150 मरीज पहुंचे रहे अस्पताल
मुजफ्फरनगर। जिला अस्पताल पर शहर के साथ आसपास के ग्रामीणों के इलाज की भी जिम्मेदारी है। एंटी रेबीज के इंजेक्शन सीएचसी पर भी खत्म हैं। जिसके चलते सीएचसी, पीएचसी के साथ शहर के भी करीब 150 से अधिक मरीज रोजाना अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन उपचार न मिलने से मायूस होकर लौट रहे हैं।
प्राइवेट में इलाज महंगा
मरीजों को प्राइवेट स्तर पर इलाज कराना महंगा पड़ रहा है। कुत्ता काटे के शिकार हुए अमन कौशिक ने बताया कि अस्पताल में इंजेक्शन नहीं मिला तो प्राइवेट मेडिकल स्टोर से खरीदना पड़ा है। प्राइवेट में एक इंजेक्शन 400 रुपये का मिला है, जबकि चिकित्सक ने सप्ताह में तीन इंजेक्शन लगाने के लिए कहा है।
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गली-मोहल्लों में कुत्ते छोटे बच्चे और लोगों को शिकार बना रहे हैं। सबसे अधिक मुश्किलें अब मुस्लिम क्षेत्रों में बढ़ गई है। यहां कुत्ते आदमखोर हो गए हैं। उधर, जिले का स्वास्थ्य महकमा दवाइयों, इंजेक्शन से खाली हाथ है। जनवरी से अस्पताल में एंटी रेबीज के इंजेक्शन की किल्लत है। सीएचसी और पीएचसी पर भी बचे इंजेक्शन खत्म हो गए हैं।
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जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को निराशा हाथ लग रही है। एंटी रेबीज ओपीडी के चिकित्सक डॉ. संजय भटनागर ने बताया कि अस्पताल में इंजेक्शन खत्म हैं। विवशता में मरीजों को कुछ ही दवाईयों के सहारे इलाज किया जा रहा है। उधर, सीएमओ डॉ. पीएस मिश्रा ने बताया कि प्रदेशभर में ही एंटी रेबीज के इंजेक्शन की कमी है। अस्पताल में भी इंजेक्शन नहीं है। इस बारे में शासन को लिखा गया है। जल्द ही इंजेक्शन आने की उम्मीद है।
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रोजाना 150 मरीज पहुंचे रहे अस्पताल
मुजफ्फरनगर। जिला अस्पताल पर शहर के साथ आसपास के ग्रामीणों के इलाज की भी जिम्मेदारी है। एंटी रेबीज के इंजेक्शन सीएचसी पर भी खत्म हैं। जिसके चलते सीएचसी, पीएचसी के साथ शहर के भी करीब 150 से अधिक मरीज रोजाना अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन उपचार न मिलने से मायूस होकर लौट रहे हैं।
प्राइवेट में इलाज महंगा
मरीजों को प्राइवेट स्तर पर इलाज कराना महंगा पड़ रहा है। कुत्ता काटे के शिकार हुए अमन कौशिक ने बताया कि अस्पताल में इंजेक्शन नहीं मिला तो प्राइवेट मेडिकल स्टोर से खरीदना पड़ा है। प्राइवेट में एक इंजेक्शन 400 रुपये का मिला है, जबकि चिकित्सक ने सप्ताह में तीन इंजेक्शन लगाने के लिए कहा है।