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वन्य जीव से हो गया पूरे घर का लगाव
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 03 Dec 2015 12:32 AM IST
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बुढ़ाना। वन्य जीव से स्नेह का दिलचस्प मामला क्षेत्र के गांव सागड़ी में छाया हुआ है। खेत में काम कर खाना खाते समय एक किसान को नील गाय का बच्चा मिल गया। प्यार-दुलार से वह पीछे-पीछे घर आ गया और अब यह बच्चा किसान परिवार का हिस्सा बन चुका है। खेत की रखवाली करने के साथ ही वह किसान के साथ घूमता है।
तहसील क्षेत्र के गांव सागड़ी निवासी सेवानिवृत्त राजस्व अमीन बलजोर सिंह का छोटा बेटा अरविंद घर की खेती संभालता है। उसके दो बड़े भाई बाहर रहते हैं। अरविंद करीब बीस दिन पहले खेत में पानी दे रहा था। इसी दौरान खाना खाते समय गन्ने के खेत से नील गाय का बच्चा निकलकर उसके पास आकर बैठ गया। किसान ने भी हिस्से की एक रोटी उसे खिला दी। बस फिर क्या था नील गाय के बच्चे का किसान के साथ नाता जुड़ गया। खेत पर कार्य खत्म करने के बाद वह घर जाने लगा तो नील गाय का बच्चा उसके पीछे हो लिया।
गांव की गलियों से किसान गुजरा तो ग्रामीण यह दृश्य देखकर भौचक रह गए। घर जाने के बाद बच्चा परिवार तथा घर के पालतू पशुओं के बीच घुल मिल गया। अब वह सबका चहेता है। वह घेर में खुला रहता है। किसान ने घेर में सब्जियां भी उगाई हैं, लेकिन वह कोई नुकसान नहीं करता। वह किसान के साथ उसके पीछे खेत पर भी आता-जाता है। घेर का मुख्य द्वार खुला रहने पर वह खेत में अकेला चला जाता है।
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जंगली जानवरों को खेत में नुकसान नहीं करने देता। इतना ही नहीं वह दूसरी मंजिल पर परिजनों के बीच आ जाता है। पिता बलजोर सिंह का कहना है कि नील गाय का बच्चा अरविंद को अकेले खेत में नहीं जाने देता। उसी के साथ आता-जाता है।
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तहसील क्षेत्र के गांव सागड़ी निवासी सेवानिवृत्त राजस्व अमीन बलजोर सिंह का छोटा बेटा अरविंद घर की खेती संभालता है। उसके दो बड़े भाई बाहर रहते हैं। अरविंद करीब बीस दिन पहले खेत में पानी दे रहा था। इसी दौरान खाना खाते समय गन्ने के खेत से नील गाय का बच्चा निकलकर उसके पास आकर बैठ गया। किसान ने भी हिस्से की एक रोटी उसे खिला दी। बस फिर क्या था नील गाय के बच्चे का किसान के साथ नाता जुड़ गया। खेत पर कार्य खत्म करने के बाद वह घर जाने लगा तो नील गाय का बच्चा उसके पीछे हो लिया।
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गांव की गलियों से किसान गुजरा तो ग्रामीण यह दृश्य देखकर भौचक रह गए। घर जाने के बाद बच्चा परिवार तथा घर के पालतू पशुओं के बीच घुल मिल गया। अब वह सबका चहेता है। वह घेर में खुला रहता है। किसान ने घेर में सब्जियां भी उगाई हैं, लेकिन वह कोई नुकसान नहीं करता। वह किसान के साथ उसके पीछे खेत पर भी आता-जाता है। घेर का मुख्य द्वार खुला रहने पर वह खेत में अकेला चला जाता है।
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जंगली जानवरों को खेत में नुकसान नहीं करने देता। इतना ही नहीं वह दूसरी मंजिल पर परिजनों के बीच आ जाता है। पिता बलजोर सिंह का कहना है कि नील गाय का बच्चा अरविंद को अकेले खेत में नहीं जाने देता। उसी के साथ आता-जाता है।