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सऊदी का तब्लीगी जमात की गतिविधियों पर बैन का फैसला गलत: दारुल उलूम
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मौलाना मुफ्ती शरीफ खान
- फोटो : DEVBAND
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तब्लीगी जमात पर आरोप बेबुनियाद: मोहतमिम
देवबंद (सहारनपुर)। इस्लामी तालीम के सबसे बड़े मरकज दारुल उलूम ने सऊदी अरब हुकूमत द्वारा तब्लीगी जमात की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि तब्लीगी जमात पर लगाए गए आरोप सरासर बेबुनियाद हैं। सऊदी हुकूमत को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। क्योंकि तब्लीगी जमात का कार्य लोगों को बुराइयों से बचाकर उन्हें मस्जिद की तरफ ले जाना है।
रविवार को जारी बयान में मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि तब्लीगी जमात अपनी स्थापना के पहले दिन से ही मुसलमानों को मस्जिदों से जोड़ने का कार्य कर रही है और इसका फैलाव लगभग पूरी दुनिया में है। जमात से जुड़े लोगों पर बिदअत, शिर्क और दहशतगर्दी जैसे आरोप बेबुनियाद है। दारुल उलूम इसकी कड़े शब्दों में निंदा करता है। उन्होंने सऊदी हुकूमत से मांग की कि वह तब्लीगी जमात की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले पर पुनर्विचार करे। साथ ही जमात के खिलाफ इस तरह की मुहिम से बचे।
तब्लीगी जमात के समर्थन में आंदोलन शुरू करें सभी विद्वान: उलमा
देवबंद। अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुल वाजदी ने सऊदी हुकूमत के फैसले पर चिंता जताई। साथ ही कहा कि वहां की हुकूमत से जमात को लेकर इस तरह के गैर जिम्मेदाराना रवैये की उम्मीद नहीं थी। अगर तब्लीगी जमात को लेकर सऊदी हुकूमत को कोई कदम उठाना था तो उसे भारत सहित अन्य देशों के विद्वानों के सामने इस पर विचार करना चाहिए था।
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जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि तब्लीगी जमात को लेकर सऊदी सरकार का जो रुख सामने आया है वह बेहद निंदनीय है। जमात पूरी दुनिया में शांति और सद्भावना के साथ अपना धार्मिक कर्तव्य निभाती है। धर्म और मस्जिदों से दूर लोगों को नमाज के करीब आने के लिए प्रोत्साहित करती है। सऊदी हुकूमत का फैसला सरासर गलत है।
मदरसा दारुल उलूम जकारिया के मोहतमिम मुफ्ती शरीफ खान कासमी ने कहा कि सऊदी सरकार दुनिया भर के मुसलमानों के प्रति उदार थी और इस्लाम को विश्व स्तर पर फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी। लेकिन आज उसका रवैया निंदनीय है। कहा कि सभी तब्लीगी जमात के समर्थन में आंदोलन शुरू करें और सऊदी सरकार की गलत फहमी को दूर करने का प्रयास करें।
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देवबंद (सहारनपुर)। इस्लामी तालीम के सबसे बड़े मरकज दारुल उलूम ने सऊदी अरब हुकूमत द्वारा तब्लीगी जमात की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि तब्लीगी जमात पर लगाए गए आरोप सरासर बेबुनियाद हैं। सऊदी हुकूमत को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। क्योंकि तब्लीगी जमात का कार्य लोगों को बुराइयों से बचाकर उन्हें मस्जिद की तरफ ले जाना है।
रविवार को जारी बयान में मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि तब्लीगी जमात अपनी स्थापना के पहले दिन से ही मुसलमानों को मस्जिदों से जोड़ने का कार्य कर रही है और इसका फैलाव लगभग पूरी दुनिया में है। जमात से जुड़े लोगों पर बिदअत, शिर्क और दहशतगर्दी जैसे आरोप बेबुनियाद है। दारुल उलूम इसकी कड़े शब्दों में निंदा करता है। उन्होंने सऊदी हुकूमत से मांग की कि वह तब्लीगी जमात की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले पर पुनर्विचार करे। साथ ही जमात के खिलाफ इस तरह की मुहिम से बचे।
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तब्लीगी जमात के समर्थन में आंदोलन शुरू करें सभी विद्वान: उलमा
देवबंद। अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुल वाजदी ने सऊदी हुकूमत के फैसले पर चिंता जताई। साथ ही कहा कि वहां की हुकूमत से जमात को लेकर इस तरह के गैर जिम्मेदाराना रवैये की उम्मीद नहीं थी। अगर तब्लीगी जमात को लेकर सऊदी हुकूमत को कोई कदम उठाना था तो उसे भारत सहित अन्य देशों के विद्वानों के सामने इस पर विचार करना चाहिए था।
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जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि तब्लीगी जमात को लेकर सऊदी सरकार का जो रुख सामने आया है वह बेहद निंदनीय है। जमात पूरी दुनिया में शांति और सद्भावना के साथ अपना धार्मिक कर्तव्य निभाती है। धर्म और मस्जिदों से दूर लोगों को नमाज के करीब आने के लिए प्रोत्साहित करती है। सऊदी हुकूमत का फैसला सरासर गलत है।
मदरसा दारुल उलूम जकारिया के मोहतमिम मुफ्ती शरीफ खान कासमी ने कहा कि सऊदी सरकार दुनिया भर के मुसलमानों के प्रति उदार थी और इस्लाम को विश्व स्तर पर फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी। लेकिन आज उसका रवैया निंदनीय है। कहा कि सभी तब्लीगी जमात के समर्थन में आंदोलन शुरू करें और सऊदी सरकार की गलत फहमी को दूर करने का प्रयास करें।

मौलाना नदीमुल वाजदी- फोटो : DEVBAND

मौलाना कारी इस्हाक गोरा- फोटो : DEVBAND

मौलाना अबुल कासिम नोमानी- फोटो : DEVBAND