{"_id":"5c9522a9bdec2214623089dc","slug":"41553277609-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेहनत और लगन से तालीम हासिल करें मदरसा छात्र: सुफियान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेहनत और लगन से तालीम हासिल करें मदरसा छात्र: सुफियान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवबंद (सहारनपुर)। इस्लामी तालीम के दूसरे बड़े इदारे दारुल उलूम वक्फ में पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन हुआ। जिसमें स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को पुरस्कारों का वितरण किया गया।
शुक्रवार को दारुल उलूम वक्फ में आयोजित हुए कार्यक्रम में अध्यक्षता कर रहे संस्था के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी ने कहा कि वर्तमान दौर में मदरसों, इस्लाम और मुसलमानों को बदनाम करने के लिए कुछ ताकतें साजिशें रच रही हैं। जिन्हें नाकाम करना हम सबकी जिम्मेदारी है। इसलिए छात्रों को चाहिए कि वह पूरी ईमानदारी, मेहनत और लगन के साथ दीनी तालीम हासिल करें और उसकी सही तस्वीर दुनिया के सामने पेश करें। शेखुल हदीस मौलाना अहमद खिजर शाह मसूदी ने कहा कि छात्रों को चाहिए कि वह बुजुर्गों के नक्शे कदम पर चलकर अपनी जिंदगी को उनके जैसी बनाएं और उम्मत की समस्याओं को दूर करें। इसके साथ ही यह जिम्मेदारी भी बनती है कि तालीम हासिल करने के बाद उसकी रोशनी को दूर दूर तक फैलाकर अशिक्षा के अंधयारे को दूर किया जाए। अंत में मौलाना सुफियान कासमी ने सबसे बड़ी कक्षा दौर-ए-हदीस समेत अन्य कक्षाओं में उच्च अंक प्राप्त कर स्थान हासिल करने वाले छात्रों को पुरस्कार स्वरुप कीमती पुस्तकें भेंट की। संचालन मौलाना मुफ्ती अहसान कासमी ने किया। इस मौके पर डा. शेकब कासमी, मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर, मौलाना इस्लाम कासमी, मौैलाना सिकंदर अली समेत मदरसा छात्र व उस्ताद मौजूद रहे।
विज्ञापन
शुक्रवार को दारुल उलूम वक्फ में आयोजित हुए कार्यक्रम में अध्यक्षता कर रहे संस्था के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी ने कहा कि वर्तमान दौर में मदरसों, इस्लाम और मुसलमानों को बदनाम करने के लिए कुछ ताकतें साजिशें रच रही हैं। जिन्हें नाकाम करना हम सबकी जिम्मेदारी है। इसलिए छात्रों को चाहिए कि वह पूरी ईमानदारी, मेहनत और लगन के साथ दीनी तालीम हासिल करें और उसकी सही तस्वीर दुनिया के सामने पेश करें। शेखुल हदीस मौलाना अहमद खिजर शाह मसूदी ने कहा कि छात्रों को चाहिए कि वह बुजुर्गों के नक्शे कदम पर चलकर अपनी जिंदगी को उनके जैसी बनाएं और उम्मत की समस्याओं को दूर करें। इसके साथ ही यह जिम्मेदारी भी बनती है कि तालीम हासिल करने के बाद उसकी रोशनी को दूर दूर तक फैलाकर अशिक्षा के अंधयारे को दूर किया जाए। अंत में मौलाना सुफियान कासमी ने सबसे बड़ी कक्षा दौर-ए-हदीस समेत अन्य कक्षाओं में उच्च अंक प्राप्त कर स्थान हासिल करने वाले छात्रों को पुरस्कार स्वरुप कीमती पुस्तकें भेंट की। संचालन मौलाना मुफ्ती अहसान कासमी ने किया। इस मौके पर डा. शेकब कासमी, मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर, मौलाना इस्लाम कासमी, मौैलाना सिकंदर अली समेत मदरसा छात्र व उस्ताद मौजूद रहे।
विज्ञापन