{"_id":"62aa22697fbe100a6256f4b7","slug":"400-artisans-who-cook-jaggery-will-be-trained-muzaffarnagar-news-mrt59302579","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुड़ पकाने वाले 400 कारीगर होंगे प्रशिक्षित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुड़ पकाने वाले 400 कारीगर होंगे प्रशिक्षित
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुड़ पकाने वाले 400 कारीगर होंगे प्रशिक्षित
मुजफ्फरनगर। जिले में एक जनपद एक उत्पाद योजना के तहत गुड़ बनाने वाले कारीगरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। गुड़ की गुणवत्ता और परंपरागत तरीकों को विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार ने यह कदम उठाया है। इस सत्र में गुड़ पकाने वाले 400 लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा। जिला उद्योग केंद्र ने इसके लिए आवेदन मांगे हैं।
प्रदेश सरकार ने एक जनपद-एक उत्पाद में यहां गुड़ को शामिल किय है। गुड़ उत्पादन में यह जिला पूरे देश में पहले स्थान पर है। हर साल पांच हजार कोल्हुओं के माध्यम से यहां गुड़ बनता है। एशिया की सबसे बड़ी गुड़ मंडी भी यहीं पर है। यहां गुड़ के सीजन के समय गुड़ का भंडारण हो जाता है। पूरे साल देश भर में यहां से गुड़ पहुंचता रहता है। जिले में गुड़ की गुणवत्ता बढ़ाने और शुद्धता पर जोर देने के लिए जिला उद्योग केंद्र गुड़ पकाने वालों को प्रशिक्षण दे रहा है। कोल्हुओं पर गुड़ बनाने के परंपरागत कार्य में लगे लोग ही प्रशिक्षण में शामिल होंगे।
वर्ष 2022-23 में 400 गुड़ पकाने वालों को प्रशिक्षण का लक्ष्य रखा गया है। जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से प्रशिक्षण के लिए आवेदन लिए जाते हैं। दस दिन के प्रशिक्षण के बाद सभी को गुड़ तैयार करने के सामान की टूल किट भी दी जाती है। सरकार और जिला प्रशासन का यह प्रयास है कि गुड़ में मसाले का कम प्रयोग हो और शुद्ध गुड़ आम जनता तक पहुंचे।
विज्ञापन
गुड़ को लेकर कई योजना तैयार
जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त परमहंस मौर्य का कहना है कि एक जनपद एक उत्पाद में गुड़ को शामिल करने के लिए सरकार ने कई योजनाएं बनाई हैं। हम जिले में आधुनिक कोल्हू भी लगा रहे हैं। गुड़ बनाने वाले कारीगरों को प्रशिक्षित भी कर रहे हैं। गुड़ की गुणवत्ता और शुद्धता ही हमारा ध्येय हैं।
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। जिले में एक जनपद एक उत्पाद योजना के तहत गुड़ बनाने वाले कारीगरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। गुड़ की गुणवत्ता और परंपरागत तरीकों को विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार ने यह कदम उठाया है। इस सत्र में गुड़ पकाने वाले 400 लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा। जिला उद्योग केंद्र ने इसके लिए आवेदन मांगे हैं।
प्रदेश सरकार ने एक जनपद-एक उत्पाद में यहां गुड़ को शामिल किय है। गुड़ उत्पादन में यह जिला पूरे देश में पहले स्थान पर है। हर साल पांच हजार कोल्हुओं के माध्यम से यहां गुड़ बनता है। एशिया की सबसे बड़ी गुड़ मंडी भी यहीं पर है। यहां गुड़ के सीजन के समय गुड़ का भंडारण हो जाता है। पूरे साल देश भर में यहां से गुड़ पहुंचता रहता है। जिले में गुड़ की गुणवत्ता बढ़ाने और शुद्धता पर जोर देने के लिए जिला उद्योग केंद्र गुड़ पकाने वालों को प्रशिक्षण दे रहा है। कोल्हुओं पर गुड़ बनाने के परंपरागत कार्य में लगे लोग ही प्रशिक्षण में शामिल होंगे।
विज्ञापन
वर्ष 2022-23 में 400 गुड़ पकाने वालों को प्रशिक्षण का लक्ष्य रखा गया है। जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से प्रशिक्षण के लिए आवेदन लिए जाते हैं। दस दिन के प्रशिक्षण के बाद सभी को गुड़ तैयार करने के सामान की टूल किट भी दी जाती है। सरकार और जिला प्रशासन का यह प्रयास है कि गुड़ में मसाले का कम प्रयोग हो और शुद्ध गुड़ आम जनता तक पहुंचे।
विज्ञापन
गुड़ को लेकर कई योजना तैयार
जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त परमहंस मौर्य का कहना है कि एक जनपद एक उत्पाद में गुड़ को शामिल करने के लिए सरकार ने कई योजनाएं बनाई हैं। हम जिले में आधुनिक कोल्हू भी लगा रहे हैं। गुड़ बनाने वाले कारीगरों को प्रशिक्षित भी कर रहे हैं। गुड़ की गुणवत्ता और शुद्धता ही हमारा ध्येय हैं।