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कर्बला की दास्तान सुन रोए शिया सौगवार
Updated Thu, 28 Sep 2017 12:39 AM IST
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करबला की दास्तान सुन रोए शिया सोगवार
मुजफ्फरनगर। मौलाना मोहम्मद रजा ने जब करबला की दास्तान सुनाई तो शिया सोगवार की आंखें नम हो आई। उन्होंने कहा कि खातूने जन्नत हजरत ए फातिमा जैहरा ने वो कुर्बानी दी कि इस्लाम के मानने वाले आज भी जिक्र करते नहीं थकते।
मुहर्रम के मौके पर किदवईनगर में शिया सोगवारों ने मातम किया। मरसिया ख्वानी अख्तर हुसैन, जहीर आलम आदि ने की। हदीसे मौलाना मोहम्मद रजा ने कहा कि सिरतुल नबी और इमाम ए हुसैन और उनके जानशीनों को दुनिया जानती है। जनाब ए जैनब का किरदा अलम लेकर दुनिया को इस्लाम की तारीख आज भी बता रही है। मौलाना की तकरीर के बाद जुलजनाह अलम बरामद हुए। यहां से एक बड़ा मातमी जुलूस इमाम बारगाह सज्जादिया जाहिद हॉल से मातमी अंजुमने नोहे ख्वानी शहजाद हुसैन, सोनी, खुर्शीद, शाह आजम, जफर अब्बास, शबी हैदर आदि करते हुए जैनबिया कॉलेज, दरोगा कोठी से होता हुआ इमाम बारगाह खुर्जे वाला, जोहड़ वाली मस्जिद से मरकजी इमाम बारगाह आरफी से खादरवाला होते हुए इमाम बारगाह नदी वाला पहुंचा। रात्रि में नजर मोहम्मद एडवोकेट के यहां एक मजलिस हुई।
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मुजफ्फरनगर। मौलाना मोहम्मद रजा ने जब करबला की दास्तान सुनाई तो शिया सोगवार की आंखें नम हो आई। उन्होंने कहा कि खातूने जन्नत हजरत ए फातिमा जैहरा ने वो कुर्बानी दी कि इस्लाम के मानने वाले आज भी जिक्र करते नहीं थकते।
मुहर्रम के मौके पर किदवईनगर में शिया सोगवारों ने मातम किया। मरसिया ख्वानी अख्तर हुसैन, जहीर आलम आदि ने की। हदीसे मौलाना मोहम्मद रजा ने कहा कि सिरतुल नबी और इमाम ए हुसैन और उनके जानशीनों को दुनिया जानती है। जनाब ए जैनब का किरदा अलम लेकर दुनिया को इस्लाम की तारीख आज भी बता रही है। मौलाना की तकरीर के बाद जुलजनाह अलम बरामद हुए। यहां से एक बड़ा मातमी जुलूस इमाम बारगाह सज्जादिया जाहिद हॉल से मातमी अंजुमने नोहे ख्वानी शहजाद हुसैन, सोनी, खुर्शीद, शाह आजम, जफर अब्बास, शबी हैदर आदि करते हुए जैनबिया कॉलेज, दरोगा कोठी से होता हुआ इमाम बारगाह खुर्जे वाला, जोहड़ वाली मस्जिद से मरकजी इमाम बारगाह आरफी से खादरवाला होते हुए इमाम बारगाह नदी वाला पहुंचा। रात्रि में नजर मोहम्मद एडवोकेट के यहां एक मजलिस हुई।
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