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ट्रामा में जरुरत 50 की, मिला एक डॉक्टर
Updated Wed, 20 Sep 2017 01:04 AM IST
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ट्रामा सेंटर में जरूरत 50 की, मिला एक डॉक्टर
मुजफ्फरनगर। जनपद को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा देने के लिए बने ट्रामा सेंटर पर ताले लटके हैं। यहां स्टाफ की कमी के कारण करोड़ों की यह बिल्डिंग वीरान हो गई है। ट्रामा सेंटर को चलाने के लिए स्पेशल चिकित्सकों के साथ नर्स, वर्करों आदि की करीब 50 लोगों की टीम चाहिए। प्रदेश सरकार का इंसाफ देखिए, यहां स्टाफ के नाम पर एक चिकित्सक की तैनाती की गई है। बाकी 49 लोगों का स्टाफ कब मिलेगा, कोई नहीं जानता। सड़क दुर्घटना, गंभीर हालत के मरीजों समेत विभिन्न हादसों में घायल लोगों को तत्काल बेहतर उपचार के लिए करीब साढ़े तीन करोड़ की लागत से ट्रामा सेंटर बनाया गया है। जनपद में भूमि नहीं मिलने के कारण ट्रामा सेंटर खतौली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बनाया गया है। बिल्डिंग को तैयार हुए एक साल से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन स्वास्थ्य महकमा यहां पर चिकित्सकों और स्टाफ की तैनाती नहीं कर सका है। ट्रामा सेंटर में नर्स, वार्ड ब्वॉय के साथ स्पेशल चिकित्सकों, ईएमओ आदि 50 लोगों का पूरा स्टाफ चाहिए। यहां पर केवल एक सामान्य चिकित्सक की तैनाती की गई है। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि ट्रामा सेंटर के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है। कुल पदों के सापेक्ष करीब 35 लोग भी मिल जाएं तो भी सेंटर चलाया जा सकता है। इसके लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
संविदा वाले भी नहीं दे रहे तरजीह
मुजफ्फरनगर। ट्रामा सेंटर चलाने को जिला स्वास्थ्य महकमा एड़ी-चोटी के जोर लगा रहा है। यहां पर चिकित्सकों और अन्य स्टॉफ को संविदा भी रखने की तैयारी थी, लेकिन प्राइवेट स्तर के चिकित्सकों ने विभाग को कोई तरजीह नहीं दी है, जिसके चलते यह योजना भी लटक गई।
संसाधनों की फाइल भी लटकी
मुजफ्फरनगर। ट्रामा सेंटर की ओटी (ऑपरेशन थिऐटर) में आधुनिक मशीनों के साथ आईसीयू आदि भी बेहतर चाहिए। यहां एमआरआई, सीटी स्कैन आदि मशीन चाहिए। विभाग ने इसका प्रपोजल बनाकर शासन को भेजा हुआ है, लेकिन शासन स्तर पर इसकी भी फाइल अटक गई है।
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मुजफ्फरनगर। जनपद को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा देने के लिए बने ट्रामा सेंटर पर ताले लटके हैं। यहां स्टाफ की कमी के कारण करोड़ों की यह बिल्डिंग वीरान हो गई है। ट्रामा सेंटर को चलाने के लिए स्पेशल चिकित्सकों के साथ नर्स, वर्करों आदि की करीब 50 लोगों की टीम चाहिए। प्रदेश सरकार का इंसाफ देखिए, यहां स्टाफ के नाम पर एक चिकित्सक की तैनाती की गई है। बाकी 49 लोगों का स्टाफ कब मिलेगा, कोई नहीं जानता। सड़क दुर्घटना, गंभीर हालत के मरीजों समेत विभिन्न हादसों में घायल लोगों को तत्काल बेहतर उपचार के लिए करीब साढ़े तीन करोड़ की लागत से ट्रामा सेंटर बनाया गया है। जनपद में भूमि नहीं मिलने के कारण ट्रामा सेंटर खतौली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बनाया गया है। बिल्डिंग को तैयार हुए एक साल से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन स्वास्थ्य महकमा यहां पर चिकित्सकों और स्टाफ की तैनाती नहीं कर सका है। ट्रामा सेंटर में नर्स, वार्ड ब्वॉय के साथ स्पेशल चिकित्सकों, ईएमओ आदि 50 लोगों का पूरा स्टाफ चाहिए। यहां पर केवल एक सामान्य चिकित्सक की तैनाती की गई है। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि ट्रामा सेंटर के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है। कुल पदों के सापेक्ष करीब 35 लोग भी मिल जाएं तो भी सेंटर चलाया जा सकता है। इसके लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
संविदा वाले भी नहीं दे रहे तरजीह
मुजफ्फरनगर। ट्रामा सेंटर चलाने को जिला स्वास्थ्य महकमा एड़ी-चोटी के जोर लगा रहा है। यहां पर चिकित्सकों और अन्य स्टॉफ को संविदा भी रखने की तैयारी थी, लेकिन प्राइवेट स्तर के चिकित्सकों ने विभाग को कोई तरजीह नहीं दी है, जिसके चलते यह योजना भी लटक गई।
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संसाधनों की फाइल भी लटकी
मुजफ्फरनगर। ट्रामा सेंटर की ओटी (ऑपरेशन थिऐटर) में आधुनिक मशीनों के साथ आईसीयू आदि भी बेहतर चाहिए। यहां एमआरआई, सीटी स्कैन आदि मशीन चाहिए। विभाग ने इसका प्रपोजल बनाकर शासन को भेजा हुआ है, लेकिन शासन स्तर पर इसकी भी फाइल अटक गई है।
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