{"_id":"599f2feb4f1c1b157f8b4697","slug":"161503604715-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कम नहीं हो रही पीड़ितों की मुश्किलें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कम नहीं हो रही पीड़ितों की मुश्किलें
Updated Fri, 25 Aug 2017 01:44 AM IST
विज्ञापन
कम नहीं हो रही पीड़ितों की मुश्किलें
मुजफ्फरनगर। खतौली के कलिंग उत्कल ट्रेन हादसे में अपनों को खो चुके परिवारों की मुश्किलें अभी भी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। तमाम परिवारों के लोग पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं। पीड़ितों को कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा है। हादसे में मारे गए कई लोग ऐसे हैं, जो सरकारी सेवा में थे। उनके आश्रितों को नौकरी देने की प्रक्रिया में मृत्यु प्रमाण आवश्यक है। इसके अलावा मृतकों के बैंक खातों और जमीन नाम होने के मामले में भी मृत्यु प्रमाण पत्र जरूरी है।
उड़ीसा के पुरी से हरिद्वार जा रहे कलिंग उत्कल एक्सप्रेस शनिवार को खतौली में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। रेलवे के पीडब्ल्यूआई विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही दो दर्जन परिवारों पर कहर बनकर टूटी। उत्कल के डिरेल होने पर 23 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 97 यात्री अस्पतालों में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उत्कल में मारे गए 23 यात्रियों में से 20 के शवों का पोस्टमार्टम जीआरपी मुजफ्फरनगर की ओर से यहां कराया गया, जबकि दो का पोस्टमार्टम मेरठ और एक महिला यात्री सावित्री का पोस्टमार्टम गाजियाबाद में हुआ है। मुजफ्फरनगर में 20 में से 19 मृतकों की पहचान होने पर जीआरपी ने शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिए थे, जबकि एक शव की शिनाख्त नहीं होने पर बृहस्पतिवार को उसके शव का अज्ञात में अंतिम संस्कार कर दिया गया। उत्कल हादसे में अपनों को सदा के लिए खो चुके पीड़ित परिवारों की परेशानी अभी खत्म नहीं हुई है, जबकि जीआरपी और प्रशासन ने शवों का पोस्टमार्टम करा कर और घायलों को अस्पतालों में पहुंचाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है। मृतकों के परिजनों की सुध लेना वाला कोई नहीं है।
पीड़ित परिजन मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण-पत्र लेने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों और जीआरपी अफसरों के पास चक्कर लगा रहे हैं, मगर कहीं पर भी उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है। मृतक आश्रितों को सरकारी नौकरी और अन्य बीमा क्लेम करने में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण-पत्र की जरूरत पड़ेगी। हादसे में मरे सहारनपुर निवासी सुमित गर्ग के परिजन श्यामकुमार गुप्ता, शहर के इंद्रा कालोनी निवासी मृतक रामपाल शर्मा के बेटे सुमित शर्मा, सोमित शर्मा का कहना है कि उन्हें अभी तक पीएम रिपोर्ट नहीं मिली है, न ही उन्हें यह बताया जा रहा है कि मृत्यु प्रमाण-पत्र कहां से बनेंगे। उत्कल हादसे में उनके परिजनों की मौत हुई, इसका अभी तक उनके पास कोई कागजात नहीं है। पीड़ितों का कहना है मृतकों और घायलों का सामान भी जीआरपी चौकी खतौली में रखा है, जिसे लेने के लिए कई बार चक्कर काटने पड़े हैं। कोई भी अधिकारी सही बात नहीं बता रहा है। जीआरपी कार्यालय से कुछ फोन नंबर की स्लिप देकर पीछा छुड़ा लिया जा रहा है। जीआरपी एसओ का कहना है कि गाजियाबाद जीआरपी सीओ कार्यालय से पीएम रिपोर्ट जारी की जाएगी।
विज्ञापन
खतौली ब्लॉक से होंगे मृत्यु प्रमाण पत्र जारी
उत्कल हादसे का घटनास्थल खतौली ग्रामीण पंचायत क्षेत्र है, इस तरह नियम के अनुसार सभी मृतकों के मृत्यु प्रमाण पत्र खतौली ब्लॉक के ग्रामीण खतौली ग्राम पंचायत के सब रजिस्ट्रार की ओर से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होंगे। अब ऐसे में सबसे बड़ी परेशानी उन पीड़ित परिजनों को होगी, जो मध्य प्रदेश, मुनैरा, ग्वालियर, आगरा, सहारनपुर जैसे दूरदराज क्षेत्र के हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी जल्द नहीं मिलेगी
मृतकों के परिजनों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी जल्दी नहीं मिल सकेगी। जीआरपी मुजफ्फरनगर थाने के एसओ किशन अवतार का कहना है कि सभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट एसएसपी के माध्यम से जीआरपी को मिलेंगी। उत्कल हादसे की जांच जीआरपी सीओ गाजियाबाद रणवीर सिंह कर रहे हैं, इसलिए एसएसपी के माध्यम से सभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सीओ को गाजियाबाद भेजी जाएंगी, क्योंकि वो जांच का हिस्सा है। इसके बाद ही गाजियाबाद से परिजनों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल सकेगी, इस प्रक्रिया में समय लगेगा।
एसडीएम को सौंपी जिम्मेदारी : डीएम
जिलाधिकारी जीएस प्रियदर्शी का कहना है कि प्रशासन पीड़ितों के साथ है, उन्हें हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने में यदि कोई समस्या आएगी तो प्रशासन हैल्प करेगा। इसके लिए एसडीएम सदर को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। खतौली के कलिंग उत्कल ट्रेन हादसे में अपनों को खो चुके परिवारों की मुश्किलें अभी भी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। तमाम परिवारों के लोग पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं। पीड़ितों को कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा है। हादसे में मारे गए कई लोग ऐसे हैं, जो सरकारी सेवा में थे। उनके आश्रितों को नौकरी देने की प्रक्रिया में मृत्यु प्रमाण आवश्यक है। इसके अलावा मृतकों के बैंक खातों और जमीन नाम होने के मामले में भी मृत्यु प्रमाण पत्र जरूरी है।
उड़ीसा के पुरी से हरिद्वार जा रहे कलिंग उत्कल एक्सप्रेस शनिवार को खतौली में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। रेलवे के पीडब्ल्यूआई विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही दो दर्जन परिवारों पर कहर बनकर टूटी। उत्कल के डिरेल होने पर 23 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 97 यात्री अस्पतालों में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उत्कल में मारे गए 23 यात्रियों में से 20 के शवों का पोस्टमार्टम जीआरपी मुजफ्फरनगर की ओर से यहां कराया गया, जबकि दो का पोस्टमार्टम मेरठ और एक महिला यात्री सावित्री का पोस्टमार्टम गाजियाबाद में हुआ है। मुजफ्फरनगर में 20 में से 19 मृतकों की पहचान होने पर जीआरपी ने शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिए थे, जबकि एक शव की शिनाख्त नहीं होने पर बृहस्पतिवार को उसके शव का अज्ञात में अंतिम संस्कार कर दिया गया। उत्कल हादसे में अपनों को सदा के लिए खो चुके पीड़ित परिवारों की परेशानी अभी खत्म नहीं हुई है, जबकि जीआरपी और प्रशासन ने शवों का पोस्टमार्टम करा कर और घायलों को अस्पतालों में पहुंचाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है। मृतकों के परिजनों की सुध लेना वाला कोई नहीं है।
विज्ञापन
पीड़ित परिजन मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण-पत्र लेने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों और जीआरपी अफसरों के पास चक्कर लगा रहे हैं, मगर कहीं पर भी उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है। मृतक आश्रितों को सरकारी नौकरी और अन्य बीमा क्लेम करने में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण-पत्र की जरूरत पड़ेगी। हादसे में मरे सहारनपुर निवासी सुमित गर्ग के परिजन श्यामकुमार गुप्ता, शहर के इंद्रा कालोनी निवासी मृतक रामपाल शर्मा के बेटे सुमित शर्मा, सोमित शर्मा का कहना है कि उन्हें अभी तक पीएम रिपोर्ट नहीं मिली है, न ही उन्हें यह बताया जा रहा है कि मृत्यु प्रमाण-पत्र कहां से बनेंगे। उत्कल हादसे में उनके परिजनों की मौत हुई, इसका अभी तक उनके पास कोई कागजात नहीं है। पीड़ितों का कहना है मृतकों और घायलों का सामान भी जीआरपी चौकी खतौली में रखा है, जिसे लेने के लिए कई बार चक्कर काटने पड़े हैं। कोई भी अधिकारी सही बात नहीं बता रहा है। जीआरपी कार्यालय से कुछ फोन नंबर की स्लिप देकर पीछा छुड़ा लिया जा रहा है। जीआरपी एसओ का कहना है कि गाजियाबाद जीआरपी सीओ कार्यालय से पीएम रिपोर्ट जारी की जाएगी।
विज्ञापन
खतौली ब्लॉक से होंगे मृत्यु प्रमाण पत्र जारी
उत्कल हादसे का घटनास्थल खतौली ग्रामीण पंचायत क्षेत्र है, इस तरह नियम के अनुसार सभी मृतकों के मृत्यु प्रमाण पत्र खतौली ब्लॉक के ग्रामीण खतौली ग्राम पंचायत के सब रजिस्ट्रार की ओर से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होंगे। अब ऐसे में सबसे बड़ी परेशानी उन पीड़ित परिजनों को होगी, जो मध्य प्रदेश, मुनैरा, ग्वालियर, आगरा, सहारनपुर जैसे दूरदराज क्षेत्र के हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी जल्द नहीं मिलेगी
मृतकों के परिजनों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी जल्दी नहीं मिल सकेगी। जीआरपी मुजफ्फरनगर थाने के एसओ किशन अवतार का कहना है कि सभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट एसएसपी के माध्यम से जीआरपी को मिलेंगी। उत्कल हादसे की जांच जीआरपी सीओ गाजियाबाद रणवीर सिंह कर रहे हैं, इसलिए एसएसपी के माध्यम से सभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सीओ को गाजियाबाद भेजी जाएंगी, क्योंकि वो जांच का हिस्सा है। इसके बाद ही गाजियाबाद से परिजनों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल सकेगी, इस प्रक्रिया में समय लगेगा।
एसडीएम को सौंपी जिम्मेदारी : डीएम
जिलाधिकारी जीएस प्रियदर्शी का कहना है कि प्रशासन पीड़ितों के साथ है, उन्हें हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने में यदि कोई समस्या आएगी तो प्रशासन हैल्प करेगा। इसके लिए एसडीएम सदर को जिम्मेदारी सौंपी गई है।