फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   अंग्रेजो में रहा दूधली का ख़ौफ़

अंग्रेजो में रहा दूधली का ख़ौफ़

Tue, 15 Aug 2017 12:59 AM IST
Updated Tue, 15 Aug 2017 12:59 AM IST
विज्ञापन
अंग्रेजो में रहा दूधली का ख़ौफ़
स्वतंत्रता संग्राम में गांव के क्रांतिकारियों की अमिट दास्तां
विज्ञापन

चरथावल (मुजफ्फरनगर)। आजादी की जंग में दूधली गांव के क्रांतिकारियों से फिरंगी हुकूमत ख़ौफ़ खाती थी। वैसे तो जिले में स्वतंत्रता संग्राम का गौरवमयी इतिहास है। अंग्रेजों को दूधली के वीरों की फ़ौज फूटी आंख नहीं भाती थी। देशभक्त आशाराम शर्मा को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए ब्रिटिश सरकार ने 500 रुपया का इनाम रखा था।
दूधली गांव की मिट्टी ने जिले में सबसे ज्यादा क्रांतिकारी पैदा किए। आजादी की लड़ाई के लिए आशाराम शर्मा ने सरकारी नौकरी तक छोड़ दी थी। उनके पुत्र वेदप्रकाश शर्मा ( 82) बताते हैं कि पिता पर अंग्रेजों ने सात मुकदमे दर्ज किए थे। चार में बरी हुए, तीन में सजा हुई। बरेली और उन्नाव जेल में कैद काटी। मुजफ्फरनगर कारागार में मां मनोहारी देवी के साथ मिलने जाते थे, तो वह अंग्रेजों के उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष को स्वाभिमान मानते थे। दो दशक तक दूधली के सरपंच रहे बुजुर्ग भूपेंद्र सिंह बताते हैं कि आर्य समाज भवन में आंदोलन की गुपचुप योजना बनती थी। कलक्टर पीडब्लू मार्श हर महीने उनके बाग में कैंप लगाकर समस्याएं सुनते थे, मगर दूधली में क्रांति की मशाल जलती रही। उनके बाबा लेखराज खुद वर्ष 1931 में ब्रिटिश सरकार में पीसीएस थे। पूर्व प्रधान महेंद्र सिंह के मुताबिक आशाराम शर्मा की आजादी में भूमिका अमिट हैं। बाबा टीकाराम सिंह के घर क्रांतिकारी जुटते थे। अंग्रेजों ने आशाराम को देखते ही गोली मारने का हुक्म दे रखा था। वह वर्ष 1944-45 में डिस्ट्रिक्ट बोर्ड के सदस्य बने और फिर ग्राम प्रधान भी। व्यक्तिगत सत्याग्रह में दूधली के वीरों को कड़ी कैद की सजाए मिली और नकद जुर्माना भी लगा। रोहाना रेलवे स्टेशन पर आग लगाने, टेलीफोन लाइन काटने और पटरी उखाड़ने पर आत्माराम गुप्ता को नौ मार्च, 1943 को एक साल छह माह की सजा सुनाई गई थी। उन्हें वर्ष 1941 में भी सात माह की कैद और 40 रुपया जुर्माना लगा था। स्वतंत्रता संग्राम में दूधली के बलिदान पर आज की युवा पीढ़ी फख्र कर सकती है। हालांकि गांव में स्मृतियां मिट रही हैं। आजादी आंदोलन का गवाह आर्य समाज पुनरुद्धार की आशा में खड़ा है।
विज्ञापन

- क्रांतिकारियों ने काटी थी जेल, भरा था जुर्माना
चरथावल। स्वतंत्रता संग्राम के रिकार्ड में जेल की सजा पाए जिन क्रांतिकारियों का जिक्र है, उनमें आशाराम शर्मा पुत्र भोंदूमल, आत्माराम गुप्ता पुत्र काशीराम, चौहल सिंह पुत्र तुंगल सिंह, बाबा टीकाराम पुत्र गोपाल, तिलकराम पुत्र भैरों सिंह, धूम सिंह पुत्र गोविंद सहाय, नत्थू उर्फ मल्हू पुत्र ब्रहमानंद, ब्रहमजीत पुत्र दलमीर , मंगलू पुत्र बीरू, मुकुंद पुत्र इंद्रराज, रघुवीर सिंह पुत्र मुख़्तार, राम सिंह पुत्र शेखर चंद्र, रघुवीर पुत्र हरबंस सिंह, लक्ष्मी चंद्र पुत्र काशीराम, श्याम सिंह पुत्र बलदेवा, शाहमल पुत्र बारु सिंह, सावंत सिंह पुत्र उमराव और जयपाल पुत्र सज्जन सिंह शामिल है। यहां से 32 लोगों ने आजादी का बिगुल फूंका था। उनमें से अब कोई भी सिपाही इस दुनिया में नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

हैदराबाद सत्याग्रह में की थी भागीदारी
चरथावल। दूधली आर्य समाज में हैदराबाद सत्याग्रह का शिलापट लगा है, जिसमें 11 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम अंकित है। सोनू पुंडीर बताते है कि महाशय सरदार सिंह ने उनके बाबा महावीर सिंह के नेतृत्व में कुल 11 सत्याग्रहियों को हैदराबाद भेजा था। ठाकुर निरंजन सिंह, नानक सिंह, महावीर सिंह, टीका सिंह, घिस्सा सिंह, ब्रहमजीत, टीका, पंडित कालूराम, लाला मुरारी लाल, नानू सिंह और दाताराम ने जेल की सजा भुगती थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed