बच्चे के संस्कारों की मूल माता होती है-शास्त्री

Meerut Bureau Updated Mon, 14 Aug 2017 01:24 AM IST
वेद ज्ञान मनुष्यों के संपूर्ण जीवन का संस्कार
खतौली(मुजफ्फरनगर)। आर्य समाज शिवपुरी में आयोजित वेद प्रचार समारोह में कंवरपाल शास्त्री ने कहा कि बच्चे के संस्कारों की मूल माता होती है। किशोर अवस्था में पिता एवं आचार्य संस्कारों का मूल है, लेकिन वेद ज्ञान तो मनुष्यों के संपूर्ण जीवन के संस्कारों का मूल है।
स्वामी सत्यवेश महाराज ने ढोंग, आडंबर व अंधविश्वासों का खंडन किया। उन्होंने भौतिक और अध्यात्मिक उन्नति करना ही शिक्षा का उद्देश्य बताया। कुमारी सुकीर्ति ने कहा कि ईश्वर हर काल में प्रत्येक स्थान पर रहता है। मुख्य अतिथि सीओ डा. राजीव कुमार रहे। कार्यक्रम में मास्टर घनश्याम प्रेमी ने भजन प्रस्तुत किए। हरीशचंद, प्रमोद आर्य, जयपाल, सुभाष, पवन कौशिक, रणसिंह आर्य, मोहिनी आर्य, सुशील आर्य, ब्रजगोपाल आर्य, रामअवतार आर्य, पंडित रामदेव शास्त्री, डा. राजीव कुमार आर्य, आदेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।

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