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साम्प्रदायिक दंगे के फैसले हेतु लोई गांव में पंचायत
Updated Mon, 08 Jan 2018 12:53 AM IST
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दोनों समुदायों के लोगों ने शांति की पहल की
बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)।
वर्ष 2013 में सांप्रदायिक दंगे की आग में झुलसे जिले के दोनों समुदायों के लोगों ने शांति की पहल प्रारंभ की है। दंगे के दौरान दर्ज हुए मुकदमे से दोनों समुदायों के लोगों को आज तक परेशानियां झेलनी पड़ रही है। परिवारीजन भी अनायास के तनाव में जीवन जीने को व्यतीत है। इससे निजात दिलाने के लिए लोई गांव में हुई पंचायत में दोनों समुदायों के लोगों ने वैमनस्यता को भूलकर आपस में मिल बैठकर दंगे में दर्ज हुए मुकदमे के फैसले करवाने पर बल दिया। पंचायत में 14 जनवरी को जिला मुख्यालय पर बड़ी पंचायत करने का निर्णय लिया गया। दोनों समुदायों के लोगों ने बताया कि 14 जनवरी के बाद दोनों समुदाय के लोग एकदूसरे के पक्ष में शपथपत्र व बयान देना आरंभ करेंगे।
सितंबर 2013 में जिले में हुए सांप्रदायिक दंगे के बाद बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों का गांवों से पलायन हो गया था। इस दंगे में हिंदू व मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवाए थे। दंगे के दौरान हुए मुकदमों के कारण दोनों समुदायों के बीच खाई बढ़ती चली गई। हालांकि उस दौरान सपा की सरकार व प्रशासन ने दोनों समुदायों के बीच भाईचारा पैदा करने का भरसक प्रयास किया। कस्बा व देहात स्तर पर विभिन्न पंचायतों का आयोजन हुआ। खेल प्रतियोगिताएं हुई, लेकिन प्रशासन व सरकार दोनों समुदायों के बीच खाई खत्म नही कर पाई। दोनों समुदायों के लोग एक दूसरे के मुकदमों के कारण ऊब चुके हैं। दोनों ही समुदाय के लोग विकास में पिछड़ गए हैं। राष्ट्रीय जाट संरक्षण समिति व दंगा संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने दोनों समुदाय के फैसले करवाने की पहल की। इस विषय को लेकर दोनों समुदाय के लोगों ने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से भी वार्ता की। इसी क्रम में रविवार को फुगाना के गांव लोई में राव अंबार खां के निवास पर दोनों समुदाय के लोगों की पंचायत हुई। पंचायत में दोनों समुदाय के सभी वक्ताओं ने फैसलों को जरूरी बताया। पंचायत में सभी वक्ताओं ने कहा कि हिंदू-मुसलमान हिंदुस्तान के रहने वाले हैं। कोई भी एक दूसरे को यहां से नहीं निकाल सकता। हमें आपस में पहले की तरह सौहार्दपूर्ण वातावरण में रहना चाहिए। हमें भेदभाव भूलाकर देश के हित में सोचना चाहिए। सर्वसम्मति से 14 जनवरी को आरकेडी फार्म हाउस में दोनों समुदाय की महापंचायत का निर्णय लिया गया। राष्ट्रीय जाट संरक्षण समिति के अध्यक्ष विपिन बालियान ने बताया कि रविवार को पुरबालियान, कुटबा व पलडा में पंचायत का आयोजन हो चुका है। लोई गांव में उनकी चौथी पंचायत है। दोनों पक्षों के लोग फैसलों से सहमत हैं। 14 जनवरी के बाद दोनों समुदायों के लोग एक दूसरे के पक्ष में अदालतों में जाकर बयान व शपथपत्र देने आरंभ कर देंगे। लोई गांव में हुई पंचायत में पूर्व प्रधान अब्दुल जब्बार, प्रधान दिलशाद, राव अंबार खां, मोहम्मद. जकी, अब्दुल जब्बार, महबूब, अख्तर कुटबा, मोमीन, हाफिज शेरदीन, राशिद अजीम, गठवाला खाप के चौधरी राजेंद्र सिंह मलिक, बाबा श्याम सिंह बहावड़ी, सुमन बालियान, अजय बालियान, राजकुमार हडौली, कुलबीर, चयनपाल कुटबा, डा. लव, सागर सहित जनपद के दोनों समुदाय के लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता चौधरी राजेंद्र सिंह मलिक ने की।
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बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)।
वर्ष 2013 में सांप्रदायिक दंगे की आग में झुलसे जिले के दोनों समुदायों के लोगों ने शांति की पहल प्रारंभ की है। दंगे के दौरान दर्ज हुए मुकदमे से दोनों समुदायों के लोगों को आज तक परेशानियां झेलनी पड़ रही है। परिवारीजन भी अनायास के तनाव में जीवन जीने को व्यतीत है। इससे निजात दिलाने के लिए लोई गांव में हुई पंचायत में दोनों समुदायों के लोगों ने वैमनस्यता को भूलकर आपस में मिल बैठकर दंगे में दर्ज हुए मुकदमे के फैसले करवाने पर बल दिया। पंचायत में 14 जनवरी को जिला मुख्यालय पर बड़ी पंचायत करने का निर्णय लिया गया। दोनों समुदायों के लोगों ने बताया कि 14 जनवरी के बाद दोनों समुदाय के लोग एकदूसरे के पक्ष में शपथपत्र व बयान देना आरंभ करेंगे।
सितंबर 2013 में जिले में हुए सांप्रदायिक दंगे के बाद बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों का गांवों से पलायन हो गया था। इस दंगे में हिंदू व मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवाए थे। दंगे के दौरान हुए मुकदमों के कारण दोनों समुदायों के बीच खाई बढ़ती चली गई। हालांकि उस दौरान सपा की सरकार व प्रशासन ने दोनों समुदायों के बीच भाईचारा पैदा करने का भरसक प्रयास किया। कस्बा व देहात स्तर पर विभिन्न पंचायतों का आयोजन हुआ। खेल प्रतियोगिताएं हुई, लेकिन प्रशासन व सरकार दोनों समुदायों के बीच खाई खत्म नही कर पाई। दोनों समुदायों के लोग एक दूसरे के मुकदमों के कारण ऊब चुके हैं। दोनों ही समुदाय के लोग विकास में पिछड़ गए हैं। राष्ट्रीय जाट संरक्षण समिति व दंगा संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने दोनों समुदाय के फैसले करवाने की पहल की। इस विषय को लेकर दोनों समुदाय के लोगों ने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से भी वार्ता की। इसी क्रम में रविवार को फुगाना के गांव लोई में राव अंबार खां के निवास पर दोनों समुदाय के लोगों की पंचायत हुई। पंचायत में दोनों समुदाय के सभी वक्ताओं ने फैसलों को जरूरी बताया। पंचायत में सभी वक्ताओं ने कहा कि हिंदू-मुसलमान हिंदुस्तान के रहने वाले हैं। कोई भी एक दूसरे को यहां से नहीं निकाल सकता। हमें आपस में पहले की तरह सौहार्दपूर्ण वातावरण में रहना चाहिए। हमें भेदभाव भूलाकर देश के हित में सोचना चाहिए। सर्वसम्मति से 14 जनवरी को आरकेडी फार्म हाउस में दोनों समुदाय की महापंचायत का निर्णय लिया गया। राष्ट्रीय जाट संरक्षण समिति के अध्यक्ष विपिन बालियान ने बताया कि रविवार को पुरबालियान, कुटबा व पलडा में पंचायत का आयोजन हो चुका है। लोई गांव में उनकी चौथी पंचायत है। दोनों पक्षों के लोग फैसलों से सहमत हैं। 14 जनवरी के बाद दोनों समुदायों के लोग एक दूसरे के पक्ष में अदालतों में जाकर बयान व शपथपत्र देने आरंभ कर देंगे। लोई गांव में हुई पंचायत में पूर्व प्रधान अब्दुल जब्बार, प्रधान दिलशाद, राव अंबार खां, मोहम्मद. जकी, अब्दुल जब्बार, महबूब, अख्तर कुटबा, मोमीन, हाफिज शेरदीन, राशिद अजीम, गठवाला खाप के चौधरी राजेंद्र सिंह मलिक, बाबा श्याम सिंह बहावड़ी, सुमन बालियान, अजय बालियान, राजकुमार हडौली, कुलबीर, चयनपाल कुटबा, डा. लव, सागर सहित जनपद के दोनों समुदाय के लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता चौधरी राजेंद्र सिंह मलिक ने की।
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