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दूधाहेडी का युवक दीक्षा लेकर बना सन्यासी,
Updated Wed, 30 May 2018 12:13 AM IST
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आकाश से बन गया अखिलानंद नाथ, गुरु गोरखनाथ में है अटूट आस्था
फोटो समाचार
अमर उजाला ब्यूरो
मंसूरपुर।
गांव दूधाहेड़ी का एक युवक दीक्षा लेकर सन्यासी बन गया है। वह अग्नि के धूनी के बीच बैठकर तपस्या कर रहा है। उसकी तपस्या 41 दिन तक चलेगी। नेशनल हाइवे पर श्री राम वाटिका में शरीर को झुलसा देने वाली गर्मी में अग्नि के धूनी के बीच तपस्या करते हुए उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती है।
गांव दूधाहेडी निवासी आकाश पुत्र राम कुमार शर्मा ने सहारनपुर से संस्कृत विषय में एमए किया है। बचपन से ही आकाश का झुकाव पूजा पाठ एवं भक्ति की ओर था। वह साधु संतों की बातें सुनना पसंद करता था। गुरु गोरखनाथ में उसकी अटूट आस्था है। गोरखपुर में वह साधु सन्यासियों के संपर्क में आया। वहां पर उसके साथियों ने उसका नाम आकाश से अखिलानंद नाथ रख दिया। उन्होंने बताया कि अपनी इच्छाओं को वश में करने और समाज उत्थान के लिए वह 41 दिन की तपस्या कर रहा है। उन्होंने 21 मई को 11 अग्नि के धूनी के बीच तपस्या शुरू की है, जो 30 जून को समाप्त होगी। उस दिन विशाल भंडारा आयोजित किया जाएगा। पिता रामकुमार ने बताया कि वह बेटे के निर्णय से खुश हैं। वह उसकी सहायता कर रहे हैं।
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मंसूरपुर।
गांव दूधाहेड़ी का एक युवक दीक्षा लेकर सन्यासी बन गया है। वह अग्नि के धूनी के बीच बैठकर तपस्या कर रहा है। उसकी तपस्या 41 दिन तक चलेगी। नेशनल हाइवे पर श्री राम वाटिका में शरीर को झुलसा देने वाली गर्मी में अग्नि के धूनी के बीच तपस्या करते हुए उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती है।
गांव दूधाहेडी निवासी आकाश पुत्र राम कुमार शर्मा ने सहारनपुर से संस्कृत विषय में एमए किया है। बचपन से ही आकाश का झुकाव पूजा पाठ एवं भक्ति की ओर था। वह साधु संतों की बातें सुनना पसंद करता था। गुरु गोरखनाथ में उसकी अटूट आस्था है। गोरखपुर में वह साधु सन्यासियों के संपर्क में आया। वहां पर उसके साथियों ने उसका नाम आकाश से अखिलानंद नाथ रख दिया। उन्होंने बताया कि अपनी इच्छाओं को वश में करने और समाज उत्थान के लिए वह 41 दिन की तपस्या कर रहा है। उन्होंने 21 मई को 11 अग्नि के धूनी के बीच तपस्या शुरू की है, जो 30 जून को समाप्त होगी। उस दिन विशाल भंडारा आयोजित किया जाएगा। पिता रामकुमार ने बताया कि वह बेटे के निर्णय से खुश हैं। वह उसकी सहायता कर रहे हैं।
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