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मुझे मार डालेंगे... बचा लीजिए अध्यक्ष जी... मैसेज भेजा और पांच घंटे बाद चली गई जान

Sun, 27 Sep 2020 10:52 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 27 Sep 2020 10:52 AM IST
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Will kill me Save me sent the message and bjp leader died after five hours in Moradabad
भाजपा नेता ने मौत से पहले भेजा था व्हाट्सएप मैसेज। - फोटो : अमर उजाला

‘अध्यक्ष जी, यहां यह स्थिति है कि कोई डॉक्टर नहीं है। यह लोग अपना रिसर्च कर रहे हैं। मुझे अच्छे में ही मार डालेंगे। मुझे बचा लीजिए, आज की रात कठिन है।’ 

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यह व्हाट्सएप पर भेजे गए उस मैसेज का मजमून है जो भाजपा के महानगर मंत्री एवं पार्षद राकेश खरे ने अपनी मौत से मात्र पांच घंटे पहले ही भाजपा महानगर अध्यक्ष धर्मेंद्र नाथ मिश्रा को किया था। विडंबना यह रही कि बावजूद इसके राकेश को बचाया नहीं जा सका। यह मैसेज उनके परिजनों को अब उनके मोबाइल से मिला तो वे सकते में आ गए। 
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उनका कहना है कि गड़बड़ी हुई है। हमें तो इस मैसेज के बारे में बताया ही नहीं। वे अधिकारियों से इस बाबत जांच की मांग करेंगे। कटघर निवासी राकेश खरे (40) को तबीयत खराब होने पर पहले कॉसमास और उसके बाद टीएमयू में 29 अगस्त को भर्ती कराया गया था। उनकी पत्नी लक्ष्मी ने बताया कि आठ सितंबर को वहां से उनकी मौत की खबर आई। 
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बताया कि सुबह सात बजे उन्होंने दम तोड़ दिया। लक्ष्मी के मुताबिक उन्होंने अब उनका मोबाइल ऐसे ही चेक किया तो देखा कि उनके द्वारा एक मैसेज भाजपा महानगर अध्यक्ष धर्मेंद्र नाथ मिश्रा को डाला गया था। उसी रात वह मैसेज दो बजे डाला गया था जिसमें उन्होंने खुद को बचाने की मार्मिक अपील की थी। इसके अलावा यह भी  सवाल उठाया था कि उन पर कोई रिसर्च हो रहा है। 

लक्ष्मी के मुताबिक हैरत की बात यह है कि उन्हें धर्मेंद्र नाथ मिश्रा ने इस मैसेज के बारे में बताया ही नहीं। निश्चित रूप से गड़बड़ी हुई है। इसकी जांच होनी चाहिए। राकेश के भाई रामबाबू खरे के मुताबिक राकेश भाजपा के एक जुझारू कार्यकर्ता थे। उन्हीं पर  उनका पूरा परिवार निर्भर था। घर में पत्नी के अलावा बेटा (14) व बेटी (12) वर्षीय हैं। उन्होंने कहा कि इस बारे में वे अधिकारियों से तथा भाजपा के पदाधिकाररियों से भी मिलेंगे।

मैने तो यह मैसेज इसलिए राकेश के परिजनों को नहीं दिखाया कि वह स्थिति ऐसी नहीं थी कि उन्हें दिखाता। वे और परेशान होते। राकेश निश्चित रूप से बेहद  जुझारू था और उसके जाने से पार्टी को बड़ा झटका लगा है। हमने उसके उपचार में कोई कोताही नहीं होने दी थी। लगातार जिलाधिकारी से बात की और जिलाधिकारी ने भी लगातार टीएमयू में बात कर उनसे बेहतर से बेहतर उपचार की व्यवस्था कराई। चूंकि राकेश की हालत बेहद खराब हो गई थी और फेफड़े काम  नहीं कर रहे थे, इसलिए उन्हें बचाया नहीं जा सका। मेरी पूरी सहानुभूति उनके परिवार के साथ है और पूरा संगठन इस परिवार के साथ खड़ा है।

-धर्मेंद्र नाथ मिश्रा, महानगरअध्यक्ष भाजपा

हमने राकेश खरे को बचाने में बहुत ताकत लगाई थी। भाजपा पदाधिकारियों के अलावा डीएम खुद उनके उपचार को लेकर गंभीर थे। उन्हें दो बार प्लाज्मा दिया गया। अमेरिकी रेमडेसिविर दवाई दी गई। आधुनिक तकनीक (एचएनसी) हाई फ्लो नेजल केन्युला दिया गया। वेंटीलेटर पर रखा पर वह रिकवर नहीं कर पाए। चूंकि उनका वजन ज्यादा था, डायबिटिक थे और फेफड़ों में भी परेशानी थी। 
-वीके सिंह, प्रभारी कोविड सेंटर टीएमयू

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