{"_id":"58a4c7da4f1c1bd157d84325","slug":"who-look-forward-muslim-together-with-him","type":"story","status":"publish","title_hn":"जो आगे दिखा.. मुस्लिम उसी के साथ आया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जो आगे दिखा.. मुस्लिम उसी के साथ आया
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Thu, 16 Feb 2017 03:08 AM IST
विज्ञापन
muslim
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुसलमानों से हाथी का साथी बनने की उलमा की अपील भी बसपा के काम नहीं आई। मुस्लिम वोटरों ने अपील को नजर अंदाज कर दिया। मुस्लिम वोटरों का झुकाव बसपा की ओर नहीं रहा। मंडल में साइकिल बेलगाम दौड़ी। अगर कहीं बंटे भी तो एआईएमआईएम आरएलडी की ओर झुकाव हुआ।
जबकि बसपा के समर्थन में अपील करने वालों मशाइख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष और जामा मस्जिद दिल्ली के शाही इमाम सहित दूसरे उलमा शामिल थे। पहले चरण के मतदान से पहले विधानसभा के मतदान से पहले आल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद मो. अशरफ किछौछवी, दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी, शिया धर्मगुरु मौलाना कल्वे जव्वाद, उलमा काउंसिल के मौलाना रिशाद, देवबंद के मौलाना सलमान हाशमी, सकलैनी खानकाह सहित अन्य उलमा ने मुसलमानों से बसपा के समर्थन में अपील की थी।
यहीं नहीं स्थानीय स्तर पर भी उलमा ने बसपा के समर्थन की अपील की थी। ऐसा माना जा रहा था कि उलमा की अपील रंग लाएगी और मुस्लिम वोटर साइकिल को छोड़ हाथी के साथी बन जाएंगे। लेकिन दूसरे चरण के चुनाव में मंडल में इस अपील का कोई असर नहीं दिखा।
विज्ञापन
मुस्लिम इलाकों में बंपर वोटिंग हुई। अपील को नजरअंदाज करते हुए मुस्लिम वोटरों ने साइकिल को बेलगाम दौड़ाई। यहीं नहीं मतदान केंद्रों के बाहर निकलने के बाद खुलकर बोलने से भी परहेज नहीं किया। मंडल में मुरादाबाद, अमरोहा, रामपुर, संभल में सपा मुस्लिमाें की पहली पसंद बनी। बसपा को अपील का कोई तवज्जों नहीं मिला।
सीएम ने खुद के लिए मांगा था वोट-मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी सभाओं में मतदाताओं से प्रत्याशियों की गलती को माफ करने की अपील की थी। मंच से प्रत्याशियों का नहीं खुद का चुनाव बताया था। इसका भी असर देखने को मिला।
विज्ञापन
जबकि बसपा के समर्थन में अपील करने वालों मशाइख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष और जामा मस्जिद दिल्ली के शाही इमाम सहित दूसरे उलमा शामिल थे। पहले चरण के मतदान से पहले विधानसभा के मतदान से पहले आल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद मो. अशरफ किछौछवी, दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी, शिया धर्मगुरु मौलाना कल्वे जव्वाद, उलमा काउंसिल के मौलाना रिशाद, देवबंद के मौलाना सलमान हाशमी, सकलैनी खानकाह सहित अन्य उलमा ने मुसलमानों से बसपा के समर्थन में अपील की थी।
विज्ञापन
यहीं नहीं स्थानीय स्तर पर भी उलमा ने बसपा के समर्थन की अपील की थी। ऐसा माना जा रहा था कि उलमा की अपील रंग लाएगी और मुस्लिम वोटर साइकिल को छोड़ हाथी के साथी बन जाएंगे। लेकिन दूसरे चरण के चुनाव में मंडल में इस अपील का कोई असर नहीं दिखा।
विज्ञापन
मुस्लिम इलाकों में बंपर वोटिंग हुई। अपील को नजरअंदाज करते हुए मुस्लिम वोटरों ने साइकिल को बेलगाम दौड़ाई। यहीं नहीं मतदान केंद्रों के बाहर निकलने के बाद खुलकर बोलने से भी परहेज नहीं किया। मंडल में मुरादाबाद, अमरोहा, रामपुर, संभल में सपा मुस्लिमाें की पहली पसंद बनी। बसपा को अपील का कोई तवज्जों नहीं मिला।
सीएम ने खुद के लिए मांगा था वोट-मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी सभाओं में मतदाताओं से प्रत्याशियों की गलती को माफ करने की अपील की थी। मंच से प्रत्याशियों का नहीं खुद का चुनाव बताया था। इसका भी असर देखने को मिला।