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Moradabad News: हमारी खुशनसीबी है कि हम भारत में रहते हैं...
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मुरादाबाद। जमीं पर घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं। हमारी खुशनसीबी है कि हम भारत में रहते हैं। मुंबई के मशहूर शायर महशर आफरीदी ने जब मंच से यह कलाम पढ़ा तो कलक्ट्रेट कवि सम्मेलन एवं मुशायरा ग्राउंड तालियों से गूंज उठा। मौका था उत्तर प्रदेश मिनिस्ट्रीयल कलक्ट्रेट कर्मचारी संघ की मुरादाबाद शाखा की ओर से आयोजित विराट कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का।
सोमवार शाम 6:30 बजे से शुरू हुए इस कार्यक्रम में देशभर से आए नामचीन कवियों व शायरों ने रचनाएं पढ़ीं। साहित्य प्रेमी श्रोताओं ने अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों के साथ देर रात तक इसका आनंद लिया। कार्यक्रम की शुरुआत एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त, कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह व डीएम मानवेंद्र सिंह ने मां सरस्वती के सामने दीप जलाकर की। इसके बाद कवि मयंक शर्मा ने अपनी कविता से समां बांधा। उन्होंने पढ़ा कि मृत्तिका की सर्जना में तेल बाती सा जलूं, एक दीपक तुम बनो और एक दीपक मैं बनूं। इसके बाद एक एक कर दिग्गजों ने अपने कलाम पढ़े। प्रवीण राही ने सुनाया कि जो बंदे इधर से उधर जा रहे थे, सबब मैंने पूछा तो हकला रहे थे। करें गर्व कैसे न उन सैनिकों पर, तिरंगे में लिपटे जो घर जा रहे थे। गाजियाबाद से आए शायर राज कौशिक ने पढ़ा कि सौ बहाने हैं जहां पर तो रुलाने के लिए, एक बहाना ढूंढ लो हंसने हंसाने के लिए। शोहरतों की ख्वाहिशों का ये तमाशा खूब है, लोग पंजों पर खड़े हैं कद बढ़ाने के लिए।
फरीदाबाद से आए कवि दिनेश रघुवंशी ने पढ़ा कि हमेशा तन गए आगे जो तोपों के दहानों के, कोई कीमत नहीं होती क्या प्राणों की जवानों के। बड़े लोगों की औलादें तो कैंडल मार्च करती हैं, जो अपने प्राण देते हैं वो बेटे हैं किसानों के। कवि सर्वेश अस्थाना ने सुनाया कि रिश्तों में तकरार बहुत है, लेकिन इनमें प्यार बहुत है। सारी दुनिया खुश रखने को, बस अपना परिवार बहुत है।
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कवयित्री डॉ. भावना तिवारी ने पढ़ा कि जो बाग लगाया था मैंने, उस पर अधिकार नहीं मेरा। जो पांव बढ़ाया था मैंने उस पर अधिकार नहीं मेरा। डॉ. कृष्ण कुमार नाज ने कहा कि जिस घर में वफा और मोहब्बत न मिलेगी, उस घर में कोई चीज सलामत न मिलेगी। बाजार में बैठे हो तो इतना भी समझ लो, कीमत तो मिलेगी मगर इज्जत न मिलेगी। कवि राज बहादुर राज ने पढ़ा कि बूढ़ी मां पीछे रही, छूटी पीपल छांव। जो चाहा वो मिल गया, अब क्यों ढूंढें गांव। कशिश वारसी ने सुनाया कि कुछ बात है मेहमान नवाजी में हमारी, आ जाते हैं जो गम तो पलट कर नहीं जाते।
कवि राहुल शर्मा ने पढ़ा कि अगर लिखोगे वसीयत अपनी तो जान पाओगे ये हकीकत, तुम्हारी अपनी ही मिल्कियत में तुम्हारा हिस्सा कहीं नहीं है। शायर फरीद शम्सी ने पढ़ा कि सिर्फ अल्फाज हैं तहरीर नहीं है उसकी, अब सच अगर पूछिये तसरीर नहीं है उसकी। मशहूर शायर मंसूर उस्मानी ने कहा कि उससे बातें तो खूब कीं लेकिन सिलसिला प्यार तक नहीं पहुंचा।
कविता से रामलला को नमन व नीतीश पर कटाक्ष
कवियों ने मंच से अपनी रचनाओं के जरिये अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के बाद रामलला को नमन किया। हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया। साथ ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर कटाक्ष भी किया। फिरोजाबाद से आए कवि लटूरी लट्ठ ने पढ़ा कि हिंदू घर में दीप जला, मुस्लिम घर में उजियारे हैं। मोमिन ने धूप जलाई जब, खुशबू ने पैर पसारे हैं। दोनों के घर महक उठे, सुंदरतम द्वारे द्वारे हैं। मशहूर शायरा शबीना अदीब ने भी हिंदू मुस्लिम एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अपनी डाली से बिछड़े अलग हो गए। पेड़ के सारे पत्ते अलग हो गए। ईश्वर भी वही है खुदा भी वही, जाने क्यूं उसके बंदे अलग हो गए। प्रयागराज से आए कवि श्लेष गौतम ने कहा कि चाभी बदल लिया कभी ताला बदल लिया। डॉक्टर बदल लिया कभी आला बदल लिया। सत्ता नहीं वनवास वाले राम राज में, भक्तों ने कुर्सी देख के पाला बदल लिया।
11 साल बाद मुशायरा ग्राउंड में लौटी रौनक
मुरादाबाद।
कलक्ट्रेट के कवि सम्मेलन एवं मुशायरा ग्राउंड में पिछले 11 वर्षों से कोई कवि सम्मेलन नहीं हुआ था। सोमवार को हुए विराट कवि सम्मेलन व मुशायरा के कारण इस मैदान में फिर रौनक लौट आई। शहर के साहित्य प्रेमियों ने कलक्ट्रेट कर्मचारी संघ व प्रशासन के इस प्रयास को सराहा।
वहीं कवियों व शायरों ने भी मुशायरा ग्राउंड के मंच से पुराने समय के किस्से साझा किया। डॉ. कृष्ण कुमार नाज ने कहा कि मुशायरा सुबह 5 बजे तक चलता था। लोग अपने घरों से कंबल व नाश्ता लेकर आते थे और कवि सम्मेलन व मुशायरे का आनंद लेते थे। कवि सर्वेश अस्थाना व शायरा शबीना अदीब ने भी कहा कि वे 11 वर्ष पहले हुए आयोजन में मुरादाबाद आए थे। उन्होंने साहित्यिक आयोजनों के इस क्रम को जारी रखने की अपील प्रशासन से की।
बोले कवि, जाति धर्म के विचारों से ऊपर है राम का पथ
मुरादाबाद। विराट कवि सम्मेलन व मुशायरा में शिरकत करने आए रचनाकारों ने राम मंदिर निर्माण पर विचार साझा किए। संचालक प्रवीण शुक्ल ने कहा कि राम का पथ जाति, धर्म के विचारों से ऊपर है। उन्होंने विश्व बंधुत्व व भाईचारे का संदेश दिया। मंदिर निर्माण से सिर्फ एक धर्म का नहीं बल्कि भारतीयता का सैकड़ों वर्ष पुराना स्वप्न पूरा हुआ है। शायर मंसूर उस्मानी ने कहा कि ये देश का मुकद्दर है कि उसने अपने आराध्य का भव्य पूजा स्थल बनते देखा। उन्होंने कहा कि सदियों की प्यास बुझने पर जो खुशी मिलती है, मंदिर निर्माण से भारत को वही खुशी मिली है।
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सोमवार शाम 6:30 बजे से शुरू हुए इस कार्यक्रम में देशभर से आए नामचीन कवियों व शायरों ने रचनाएं पढ़ीं। साहित्य प्रेमी श्रोताओं ने अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों के साथ देर रात तक इसका आनंद लिया। कार्यक्रम की शुरुआत एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त, कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह व डीएम मानवेंद्र सिंह ने मां सरस्वती के सामने दीप जलाकर की। इसके बाद कवि मयंक शर्मा ने अपनी कविता से समां बांधा। उन्होंने पढ़ा कि मृत्तिका की सर्जना में तेल बाती सा जलूं, एक दीपक तुम बनो और एक दीपक मैं बनूं। इसके बाद एक एक कर दिग्गजों ने अपने कलाम पढ़े। प्रवीण राही ने सुनाया कि जो बंदे इधर से उधर जा रहे थे, सबब मैंने पूछा तो हकला रहे थे। करें गर्व कैसे न उन सैनिकों पर, तिरंगे में लिपटे जो घर जा रहे थे। गाजियाबाद से आए शायर राज कौशिक ने पढ़ा कि सौ बहाने हैं जहां पर तो रुलाने के लिए, एक बहाना ढूंढ लो हंसने हंसाने के लिए। शोहरतों की ख्वाहिशों का ये तमाशा खूब है, लोग पंजों पर खड़े हैं कद बढ़ाने के लिए।
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फरीदाबाद से आए कवि दिनेश रघुवंशी ने पढ़ा कि हमेशा तन गए आगे जो तोपों के दहानों के, कोई कीमत नहीं होती क्या प्राणों की जवानों के। बड़े लोगों की औलादें तो कैंडल मार्च करती हैं, जो अपने प्राण देते हैं वो बेटे हैं किसानों के। कवि सर्वेश अस्थाना ने सुनाया कि रिश्तों में तकरार बहुत है, लेकिन इनमें प्यार बहुत है। सारी दुनिया खुश रखने को, बस अपना परिवार बहुत है।
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कवयित्री डॉ. भावना तिवारी ने पढ़ा कि जो बाग लगाया था मैंने, उस पर अधिकार नहीं मेरा। जो पांव बढ़ाया था मैंने उस पर अधिकार नहीं मेरा। डॉ. कृष्ण कुमार नाज ने कहा कि जिस घर में वफा और मोहब्बत न मिलेगी, उस घर में कोई चीज सलामत न मिलेगी। बाजार में बैठे हो तो इतना भी समझ लो, कीमत तो मिलेगी मगर इज्जत न मिलेगी। कवि राज बहादुर राज ने पढ़ा कि बूढ़ी मां पीछे रही, छूटी पीपल छांव। जो चाहा वो मिल गया, अब क्यों ढूंढें गांव। कशिश वारसी ने सुनाया कि कुछ बात है मेहमान नवाजी में हमारी, आ जाते हैं जो गम तो पलट कर नहीं जाते।
कवि राहुल शर्मा ने पढ़ा कि अगर लिखोगे वसीयत अपनी तो जान पाओगे ये हकीकत, तुम्हारी अपनी ही मिल्कियत में तुम्हारा हिस्सा कहीं नहीं है। शायर फरीद शम्सी ने पढ़ा कि सिर्फ अल्फाज हैं तहरीर नहीं है उसकी, अब सच अगर पूछिये तसरीर नहीं है उसकी। मशहूर शायर मंसूर उस्मानी ने कहा कि उससे बातें तो खूब कीं लेकिन सिलसिला प्यार तक नहीं पहुंचा।
कविता से रामलला को नमन व नीतीश पर कटाक्ष
कवियों ने मंच से अपनी रचनाओं के जरिये अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के बाद रामलला को नमन किया। हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया। साथ ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर कटाक्ष भी किया। फिरोजाबाद से आए कवि लटूरी लट्ठ ने पढ़ा कि हिंदू घर में दीप जला, मुस्लिम घर में उजियारे हैं। मोमिन ने धूप जलाई जब, खुशबू ने पैर पसारे हैं। दोनों के घर महक उठे, सुंदरतम द्वारे द्वारे हैं। मशहूर शायरा शबीना अदीब ने भी हिंदू मुस्लिम एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अपनी डाली से बिछड़े अलग हो गए। पेड़ के सारे पत्ते अलग हो गए। ईश्वर भी वही है खुदा भी वही, जाने क्यूं उसके बंदे अलग हो गए। प्रयागराज से आए कवि श्लेष गौतम ने कहा कि चाभी बदल लिया कभी ताला बदल लिया। डॉक्टर बदल लिया कभी आला बदल लिया। सत्ता नहीं वनवास वाले राम राज में, भक्तों ने कुर्सी देख के पाला बदल लिया।
11 साल बाद मुशायरा ग्राउंड में लौटी रौनक
मुरादाबाद।
कलक्ट्रेट के कवि सम्मेलन एवं मुशायरा ग्राउंड में पिछले 11 वर्षों से कोई कवि सम्मेलन नहीं हुआ था। सोमवार को हुए विराट कवि सम्मेलन व मुशायरा के कारण इस मैदान में फिर रौनक लौट आई। शहर के साहित्य प्रेमियों ने कलक्ट्रेट कर्मचारी संघ व प्रशासन के इस प्रयास को सराहा।
वहीं कवियों व शायरों ने भी मुशायरा ग्राउंड के मंच से पुराने समय के किस्से साझा किया। डॉ. कृष्ण कुमार नाज ने कहा कि मुशायरा सुबह 5 बजे तक चलता था। लोग अपने घरों से कंबल व नाश्ता लेकर आते थे और कवि सम्मेलन व मुशायरे का आनंद लेते थे। कवि सर्वेश अस्थाना व शायरा शबीना अदीब ने भी कहा कि वे 11 वर्ष पहले हुए आयोजन में मुरादाबाद आए थे। उन्होंने साहित्यिक आयोजनों के इस क्रम को जारी रखने की अपील प्रशासन से की।
बोले कवि, जाति धर्म के विचारों से ऊपर है राम का पथ
मुरादाबाद। विराट कवि सम्मेलन व मुशायरा में शिरकत करने आए रचनाकारों ने राम मंदिर निर्माण पर विचार साझा किए। संचालक प्रवीण शुक्ल ने कहा कि राम का पथ जाति, धर्म के विचारों से ऊपर है। उन्होंने विश्व बंधुत्व व भाईचारे का संदेश दिया। मंदिर निर्माण से सिर्फ एक धर्म का नहीं बल्कि भारतीयता का सैकड़ों वर्ष पुराना स्वप्न पूरा हुआ है। शायर मंसूर उस्मानी ने कहा कि ये देश का मुकद्दर है कि उसने अपने आराध्य का भव्य पूजा स्थल बनते देखा। उन्होंने कहा कि सदियों की प्यास बुझने पर जो खुशी मिलती है, मंदिर निर्माण से भारत को वही खुशी मिली है।