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पानी निकासी का समाधान न होने पर ईद न मनाने की चेतावनी
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Tue, 28 Jun 2016 11:44 AM IST
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जलभराव
- फोटो : अमर उजाला
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क्षेत्र के सफीलपुर गांव में सोमवार की सुबह बारिश का पानी रास्तों में बंधा लगाकर रोकने को लेकर दोनाें पक्षाें में नोकझाेंक हो गई। तनातनी का माहौल बन जाने पर समझदार ग्रामीणाें ने समझा बुझाकर शांत कर दिया। अल्पसंख्यक परिवाराें के सदस्याें ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया और समस्या का शीघ्र समाधान न मिलने पर ईदुल फितर का त्यौहार न मनाने की चेतावनी भी दे डाली।
सफीलपुर में मस्जिद को जाने वाले रास्ते पर पूर्व के जलभराव के साथ सोमवार की सुबह हुई बारिश से जब पानी आसपास के घराें मेें घुसने के बाद परम्परागत रास्ताें की ओर जाना शुरू हुआ तब वाल्मीकि बस्ती और मौर्य बस्ती की ओर पानी जाना रोकने के लिए कुछ लोगाें ने खड़ंजे पर मिट्टी का बंधा बनाकर पानी रोक दिया। दूसरे पक्ष के लोगाें को जब यह पता चला तब उनमें रोष भड़क गया।
मौके पर पहुंचकर दोनाें पक्षाें में नोकझाेंक भी होने लगी। जलभराव से प्रभावित लोग एक वर्ग के होने और पानी निकासी रोकने वाले लोग दूसरे वर्ग के होने की वजह से मामूली तनाव के हालात को समझदार लोगाें ने समझा बुझाकर निबटा दिया।
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गांव की मस्जिद पर जमा ग्रामीणाें ने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप था कि एक माह पहले इसी मोहल्ले में जब नन्हूं की बेटी की बारात आई थी तब पुलिस और प्रशासन के अधिकारियाें ने मौके पर आकर निजी इंजन से पानी तो खिंचवा दिया था लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं कराया।
बाद में कई बार अधिकारियाें से मिलकर समस्या बताई गई लेकिन राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर आकर तालाब, सड़क और नाली की निशानदेही नहीं की। ग्रामीणाें ने बताया कि यदि शीघ्र ही उनकी जलभराव की समस्या का समाधान नहीं हुआ तब वह आगामी ईदुल फितर का त्यौहार नहीं मनाएंगे। शीघ्र ही मुरादाबाद जाकर मंडलायुक्त, डीएम और एसएसपी से मिलेंगे। प्रदर्शन करने वालाें में असलम, शफीक, फारूख, कल्लू, आशक, कय्यूम, साबिर, अली अहमद, राज अली आदि मुख्य थे।
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सफीलपुर में मस्जिद को जाने वाले रास्ते पर पूर्व के जलभराव के साथ सोमवार की सुबह हुई बारिश से जब पानी आसपास के घराें मेें घुसने के बाद परम्परागत रास्ताें की ओर जाना शुरू हुआ तब वाल्मीकि बस्ती और मौर्य बस्ती की ओर पानी जाना रोकने के लिए कुछ लोगाें ने खड़ंजे पर मिट्टी का बंधा बनाकर पानी रोक दिया। दूसरे पक्ष के लोगाें को जब यह पता चला तब उनमें रोष भड़क गया।
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मौके पर पहुंचकर दोनाें पक्षाें में नोकझाेंक भी होने लगी। जलभराव से प्रभावित लोग एक वर्ग के होने और पानी निकासी रोकने वाले लोग दूसरे वर्ग के होने की वजह से मामूली तनाव के हालात को समझदार लोगाें ने समझा बुझाकर निबटा दिया।
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गांव की मस्जिद पर जमा ग्रामीणाें ने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप था कि एक माह पहले इसी मोहल्ले में जब नन्हूं की बेटी की बारात आई थी तब पुलिस और प्रशासन के अधिकारियाें ने मौके पर आकर निजी इंजन से पानी तो खिंचवा दिया था लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं कराया।
बाद में कई बार अधिकारियाें से मिलकर समस्या बताई गई लेकिन राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर आकर तालाब, सड़क और नाली की निशानदेही नहीं की। ग्रामीणाें ने बताया कि यदि शीघ्र ही उनकी जलभराव की समस्या का समाधान नहीं हुआ तब वह आगामी ईदुल फितर का त्यौहार नहीं मनाएंगे। शीघ्र ही मुरादाबाद जाकर मंडलायुक्त, डीएम और एसएसपी से मिलेंगे। प्रदर्शन करने वालाें में असलम, शफीक, फारूख, कल्लू, आशक, कय्यूम, साबिर, अली अहमद, राज अली आदि मुख्य थे।