UP: मुरादाबाद की याकूतपुर चौकी ध्वस्त, किसने कराया निर्माण.. रहस्य बरकरार, मिस्त्री पर ठीकरा फोड़ने की कोशिश
मूंढापांडे क्षेत्र के याकूतपुर गांव में दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर बनाई जा रही निर्माणाधीन पुलिस चौकी को मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने अवैध मानते हुए बुलडोजर चलाकर गिरा दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट में सिराज मुस्तफा की याचिका पर सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने नगर निगम, एमडीए, लोक निर्माण विभाग और स्मार्ट सिटी से जवाब मांगा तो सभी विभागों ने निर्माण से पल्ला झाड़ लिया। अब भी यह रहस्य बना हुआ है कि बिना मंजूरी यह निर्माण किसके निर्देश पर कराया जा रहा था।
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विस्तार
मूंढापांडे थानाक्षेत्र में दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर जीरो प्वाइंट के पास याकूतपुर गांव में निर्माणाधीन पुलिस चौकी को मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने अवैध मानते हुए ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई और विभागों की ओर से निर्माण कार्य से पल्ला झाड़ने के बाद की गई है।
निर्माण ध्वस्त करने के बाद भी यह रहस्य बरकरार है कि बिना अनुमति और जिम्मेदार संस्था के यह निर्माण कौन करा रहा था। विवादित चौकी का निर्माण गाटा संख्या-112 पर किया जा रहा था जो लोक निर्माण विभाग के नाम दर्ज है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता सिराज मुस्तफा ने इसे अपने आवास के प्रवेश मार्ग के सामने बताया था जिससे आवाजाही में बाधा उत्पन्न हो रही थी।
इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मामले की सुनवाई के दौरान जब अदालत ने नगर निगम, एमडीए, लोक निर्माण विभाग और स्मार्ट सिटी से जानकारी मांगी तो सभी ने निर्माण में अपनी भूमिका से इनकार कर दिया था। एसएसपी ने पहले हाईकोर्ट में बताया कि उन्हें इस याचिका से निर्माण की जानकारी मिली है।
बाद में उन्होंने जांच कराई तो पता चला कि निर्माण स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत कराया जा रहा है। लेकिन स्मार्ट सिटी के कंपनी सेक्रेटरी ने हलफनामे में स्पष्ट किया कि इस परियोजना के तहत कोई चौकी नहीं बनवाई जा रही। स्थिति तब और उलझ गई जब एमडीए और नगर निगम ने निर्माण के लिए किसी तरह की स्वीकृति देने से इन्कार कर दिया।
कोर्ट ने निर्माण कार्य पर रोक लगाते हुए प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन को जांच पूरी कर सभी दस्तावेजों सहित जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था। शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई थी लेकिन उससे पहले ही एमडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर निर्माण को अवैध घोषित किया और बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया।
अधिकारियों के मुताबिक न तो निर्माण की कोई स्वीकृति ली गई थी और न ही कोई नक्शा पास कराया गया था। इसके लिए डीएम से भी जानकारी मांगी गई थी लेकिन किसी भी विभाग ने इसपर अपना दावा नहीं पेश किया। इसके बाद सामान्य कार्रवाई के तहत इसे अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्त कर दिया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम में अब भी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि बिना किसी आधिकारिक मंजूरी के आखिर यह निर्माण किसके निर्देश पर शुरू किया गया था। हाईवे पर प्राधिकरण को ठेंगा दिखाते हुए आखिर किसने यह अवैध निर्माण किया। यह सवाल अभी भी बाकी है। एमडीए की इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक हलकों में भी खलबली है लेकिन कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।
राजमिस्त्री पर ठीकरा फोड़ने की हुई थी कोशिश
सभी विभागों ने जब इस निर्माण से हाथ खड़े कर दिए तो दोष निर्माण करने वाले राजमिस्त्री पर डालने की कोशिश की गई थी। एमडीए ने मई में इस निर्माण की जांच करते हुए राजमिस्त्री इसरार अहमद के खिलाफ प्राधिकरण न्यायालय में अवैध निर्माण का वाद दायर कर दिया था। चुप्पी साधे सिस्टम ने दोष राजमिस्त्री पर डालकर खुद को बचाने की कोशिश की थी लेकिन एमडीए कोर्ट में यह सुनवाई टाल दी गई थी।
क्या था विवाद
हाईवे पर जीरो प्वाइंट के पास याकूतपुर गांव में सिराज मुस्तफा के घर के सामने एक निर्माण कार्य शुरू किया गया था। उन्होंने इसे लोक निर्माण विभाग की भूमि पर अवैध निर्माण बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी और कहा था कि उनके मुख्य गेट के सामने ही यह निर्माण कराया जा रहा है जिससे उनका आवागमन बाधित हो रहा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस निर्माण को लेकर जानकारी मांगी तो एक के बाद एक सभी विभागों ने इससे पल्ला झाड़ लिया था। इसके बाद कोर्ट ने इसपर रोक लगा दी। शुक्रवार को एमडीए ने इसे अवैध मानते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
हाईकोर्ट में इन्हें बनाया गया था प्रतिवादी
याचिकाकर्ता सिराज मुस्तफा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में यूपी गवर्नमेंट, एमडीए उपाध्यक्ष, स्मार्ट सिटी सीईओ, कमिश्नर, डीएम, एसएसपी और मूंढापांडे पुलिस को प्रतिवादी बनाया था।
काफी दिनों से अवैध निर्माण की शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इसके बारे में जानकारी ली गई तो इसका कोई भी नक्शा पास नहीं कराया गया था और न ही किसी भी तरह की स्वीकृति ली गई थी। शुक्रवार को सामान्य कार्रवाई के तहत इस अवैध निर्माण को तोड़ दिया गया है। - अनुभव सिंह, उपाध्यक्ष, एमडीए