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यूक्रेन में छात्र अंकुर की हत्या का मामला -मां बेटे की मौत से अनजान, छुप-छुपकर रो रहा भाई
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Thu, 14 Apr 2016 02:44 AM IST
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यूक्रेन में मारे गए मेडिकल छात्र अंकुर सिंह की मौत से उसकी मां मूर्ति देवी अंजान है। मां को अब भी उम्मीद है कि सात समंदर पार बैठा उसका बेटा जल्द ही डाक्टर बनकर घर लौटेगा। सुबह से शाम तक वह अनगिनत बार बेटे को याद करती है। लेकिन इस मां के सपने चकनाचूर हो चुके हैं। त्रिमूर्ति टूट चुकी है। अब उसके दो ही बेटे बचे हैं। तीसरा बेटा अब इतनी दूर जा चुका है। जहां से वह कभी वापस नहीं लौट पाएगा। पति और दूसरे बेटे ने अंकुर की मौत की खबर भी मूर्ति को नहीं दी है।
घर में मौजूद अंकुर सिंह का दूसरा भाई भी तड़प रहा है। लेकिन उसने अभी तक मां को एहसास तक नहीं होने दिया है कि अंकुर की मौत हो चुकी है। भाई की याद में वह कभी छत पर जाकर आंसू बहाता है तो कभी दूसरे कमरे में बैठ कर। दरवाजे की ओर से हल्की सी आहट भी सनी को डरा देती है। वह सोचने लगा है कि कहीं कोई अंदर न आ जाए और मां को भाई की मौत की खबर न लग जाए। इस घबराहट में वह बार बार दरवाजे पर पहुंच जाता है और आने जाने वाले लोगों को समझा बुझकर बाहर से ही लौट रहा है।
उसका कहना है कि मां बीमार है। भाई की लाश आने के बाद ही उसे जानकारी दी जाएगी। वरना वह बेटे की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाएगी। यूक्रेन में मारे गए जिस अंकुर सिंह को गाजियाबाद निवासी बताया जा रहा था। उसका परिवार मुरादाबाद के सिविल लाइंस थानाक्षेत्र के गौतम नगर मुकर्रबपुर में रहता है। अंकुर सिंह का बड़ा भाई विनय देहरादून की एक निजी कंपनी में नौकरी करता है। जबकि छोटा भाई बीटेक कर रहा है।
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पिता बिशन सिंह पुलिस विभाग में ड्राइवर हैं। इन दिनों उनकी तैनाती बरेली में है। सनी सिंह ने बताया कि अंकुर सिंह यूक्रेन की उझगोरोद मेडिकल कालेज में पढ़ाई कर रहा था। तीन साल से वह यूक्रेन में ही रह रहा था। एक साल बाद उसका फाइनल रिजल्ट आना था। सोमवार सुबह पिता के मोबाइल पर कॉल आई थी। तब बताया गया था कि अंकुर के साथ यूक्रेन में कोई घटना हुई है। बड़ा भाई विजय और पिता बिशन सिंह दिल्ली चले गए हैं और वहां विदेश से लाश लौटने का इंतजार कर रहे हैं। जबकि मां को अभी अंकुर की मौत की जानकारी नहीं दी गई है। वह हार्ट की मरीज हैं। जिन लोगों को जानकारी हो गई है। उन्हें भी समझा दिया गया है कि वह मां के साथ कोई जिक्र न करें।
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घर में मौजूद अंकुर सिंह का दूसरा भाई भी तड़प रहा है। लेकिन उसने अभी तक मां को एहसास तक नहीं होने दिया है कि अंकुर की मौत हो चुकी है। भाई की याद में वह कभी छत पर जाकर आंसू बहाता है तो कभी दूसरे कमरे में बैठ कर। दरवाजे की ओर से हल्की सी आहट भी सनी को डरा देती है। वह सोचने लगा है कि कहीं कोई अंदर न आ जाए और मां को भाई की मौत की खबर न लग जाए। इस घबराहट में वह बार बार दरवाजे पर पहुंच जाता है और आने जाने वाले लोगों को समझा बुझकर बाहर से ही लौट रहा है।
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उसका कहना है कि मां बीमार है। भाई की लाश आने के बाद ही उसे जानकारी दी जाएगी। वरना वह बेटे की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाएगी। यूक्रेन में मारे गए जिस अंकुर सिंह को गाजियाबाद निवासी बताया जा रहा था। उसका परिवार मुरादाबाद के सिविल लाइंस थानाक्षेत्र के गौतम नगर मुकर्रबपुर में रहता है। अंकुर सिंह का बड़ा भाई विनय देहरादून की एक निजी कंपनी में नौकरी करता है। जबकि छोटा भाई बीटेक कर रहा है।
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पिता बिशन सिंह पुलिस विभाग में ड्राइवर हैं। इन दिनों उनकी तैनाती बरेली में है। सनी सिंह ने बताया कि अंकुर सिंह यूक्रेन की उझगोरोद मेडिकल कालेज में पढ़ाई कर रहा था। तीन साल से वह यूक्रेन में ही रह रहा था। एक साल बाद उसका फाइनल रिजल्ट आना था। सोमवार सुबह पिता के मोबाइल पर कॉल आई थी। तब बताया गया था कि अंकुर के साथ यूक्रेन में कोई घटना हुई है। बड़ा भाई विजय और पिता बिशन सिंह दिल्ली चले गए हैं और वहां विदेश से लाश लौटने का इंतजार कर रहे हैं। जबकि मां को अभी अंकुर की मौत की जानकारी नहीं दी गई है। वह हार्ट की मरीज हैं। जिन लोगों को जानकारी हो गई है। उन्हें भी समझा दिया गया है कि वह मां के साथ कोई जिक्र न करें।