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हैंडपंप रिबोर कराए बगैर तीन का निकाल लिया भुगतान
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मुरादाबाद। जिले की ग्राम पंचायतों में हैंडपंप रिबोर के नाम पर भी खेल हो रहा है। सदर ब्लाक की ग्राम पंचायत बरवारा मझरा में नवनिर्वाचित ग्राम पंचायत के गठन के बाद विभिन्न विकास कार्यों के नाम पर 17 लाख रुपये से अधिक की धनराशि निकाली गई है। इसमें 12 हैंडपंपों के रिबोर पर करीब 4.34 लाख रुपये एक ही दिन निकाल लिए गए। साफ-सफाई के नाम पर भी 1,14 लाख तथा निर्माण आदि के नाम पर करीब सवा ग्यारह लाख रुपये व्यय दिखाकर निकाले गए हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इससे इतर है।
नव निर्वाचित ग्राम पंचायत के दो माह के माह कार्यकाल में विकास कार्य पर 17 लाख रुपये खर्च दिखा प्रधान और सचिव ने निकाला है। इसमें हैंडपंप रिबोर के नाम पर दो बार में 4,34,163 रुपये की धनराशि आहरित की गई है। इसमें पहले छह हैंडपंपों के रिबोर पर 217517 रुपये और दूसरे छह हैंडपंपों के रिबोर पर 216646 रुपये निकाले गए हैं। खास बात यह है कि यह संपूर्ण धनराशि का भुगतान एक ही दिन 12 जुलाई को निकाला गया है। अमर उजाला की टीम जब गांव में पड़ताल को पहुंची तो वहां तीन हैंडपंप रिबोर ही नहीं पाए गए। जो नौ हैंडपंप प्रधान ने रिबोर बताए उनमें से भी किसी भी नल का चबूतरा नहीं बना पाया गया। अधिकांश में अब भी गंदा पानी आने की लोगों ने शिकायत की। काशीपुर रोड पर एक स्थान पर आमने-सामने दो हैंडपंप रिबोर कर दिया गया। यहां दूरी का भी ख्याल नहीं रखा गया। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में अभी कई स्थानों पर लगे हैंडपंप खराब है। शिकायत के बाद भी न तो उनकी मरम्मत की गई और न ही उन्हें रिबोर किया गया। प्रशासकों के कार्यकाल में भी यहां दो हैंडपंप रिबोर दिखा कर धनराशि निकाली गई है।
50 हजार रुपये ठेके पर कराई सफाई, निकाल लिए 1.14 लाख
शनिवार पड़ताल में गांव की अधिकांश नालियां गंदगी से चोक मिलीं। कई स्थानों पर नाली का गंदा पानी सड़कों पर बहता दिखाई दिया। ग्रामीणों ने बताया कि काफी समय बाद कुछ दिन पहले ही प्रधान ने पूरे गांव की सफाई वाल्मीकि समाज के युवक अरुण को 50 हजार रुपये का ठेका देकर कराई थी। पड़ताल में 11 जुलाई को ग्राम पंचायत में साफ-सफाई के नाम पर पांच लोगों - मोहम्मद हसन, सखावत अली, अजीम खान, राजकुमार व जुल्फिकार को 1,14,680 रुपये का भुगतान किया है। जबकि ग्रामीणों ने बताया कि इस नाम के किसी व्यक्ति ने भी साफ सफाई का काम किया ही नहीं।
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नव निर्वाचित ग्राम पंचायत के दो माह के माह कार्यकाल में विकास कार्य पर 17 लाख रुपये खर्च दिखा प्रधान और सचिव ने निकाला है। इसमें हैंडपंप रिबोर के नाम पर दो बार में 4,34,163 रुपये की धनराशि आहरित की गई है। इसमें पहले छह हैंडपंपों के रिबोर पर 217517 रुपये और दूसरे छह हैंडपंपों के रिबोर पर 216646 रुपये निकाले गए हैं। खास बात यह है कि यह संपूर्ण धनराशि का भुगतान एक ही दिन 12 जुलाई को निकाला गया है। अमर उजाला की टीम जब गांव में पड़ताल को पहुंची तो वहां तीन हैंडपंप रिबोर ही नहीं पाए गए। जो नौ हैंडपंप प्रधान ने रिबोर बताए उनमें से भी किसी भी नल का चबूतरा नहीं बना पाया गया। अधिकांश में अब भी गंदा पानी आने की लोगों ने शिकायत की। काशीपुर रोड पर एक स्थान पर आमने-सामने दो हैंडपंप रिबोर कर दिया गया। यहां दूरी का भी ख्याल नहीं रखा गया। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में अभी कई स्थानों पर लगे हैंडपंप खराब है। शिकायत के बाद भी न तो उनकी मरम्मत की गई और न ही उन्हें रिबोर किया गया। प्रशासकों के कार्यकाल में भी यहां दो हैंडपंप रिबोर दिखा कर धनराशि निकाली गई है।
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50 हजार रुपये ठेके पर कराई सफाई, निकाल लिए 1.14 लाख
शनिवार पड़ताल में गांव की अधिकांश नालियां गंदगी से चोक मिलीं। कई स्थानों पर नाली का गंदा पानी सड़कों पर बहता दिखाई दिया। ग्रामीणों ने बताया कि काफी समय बाद कुछ दिन पहले ही प्रधान ने पूरे गांव की सफाई वाल्मीकि समाज के युवक अरुण को 50 हजार रुपये का ठेका देकर कराई थी। पड़ताल में 11 जुलाई को ग्राम पंचायत में साफ-सफाई के नाम पर पांच लोगों - मोहम्मद हसन, सखावत अली, अजीम खान, राजकुमार व जुल्फिकार को 1,14,680 रुपये का भुगतान किया है। जबकि ग्रामीणों ने बताया कि इस नाम के किसी व्यक्ति ने भी साफ सफाई का काम किया ही नहीं।
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