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Moradabad News: चैप्टर वही, निजी प्रकाशकों की किताबें आठ गुना महंगी
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मुरादाबाद। निजी प्रकाशकों की किताबों के माध्यम से प्राइवेट स्कूलों द्वारा अभिभावकों को लूटा जा रहा है। एनसीईआरटी और निजी प्रकाशकों की किताबों में वही चैप्टर हैं, लेकिन निजी प्रकाशकों की किताबें आठ गुना महंगी कीमत पर मिल रही हैं। इतना ही नहीं निजी प्रकाशकों की किताबों में एनसीईआरटी की अपेक्षा पेजों की संख्या भी कम है। स्कूलों की इस मनमानी को लेकर अभिभावकों में रोष है।
कक्षा छह की गणित की एनसीईआरटी और निजी प्रकाशक की किताब में 12-12 चैप्टर हैं। एनसीईआरटी की किताब में पहले चैप्टर का नाम पैटर्न्स है और निजी प्रकाशक की किताब में भी यही चैप्टर है। दोनों ही अलग-अलग निजी स्कूलों में लगाई गई किताबें हैं। एनसीईआरटी की किताब में 272 पेज और कीमत 65 रुपये है, जबकि निजी प्रकाशक की किताब में 248 पेज और कीमत 530 रुपये है।
वहीं, तीसरे स्कूल ने भी कक्षा छह में ही निजी प्रकाशक की गणित की किताब लगाई है। उसमें सिर्फ चैप्टर आगे-पीछे कर दिए गए हैं और कीमत 450 रुपये हैं। इसके अलावा कक्षा छह की विज्ञान विषय की एनसीईआरटी की किताब में 230 पेज हैं और कीमत 65 रुपये है। वहीं निजी प्रकाशक की किताब की कीमत 579 रुपये है। दोनों ही किताबों में पहला चैप्टर द वंडरफुल वर्ल्ड ऑफ साइंस है।
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स्कूलों की इस मनमानी से अभिभावकों में रोष है। अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की है। डीआईओएस देवेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबें ही पाठ्यक्रम में शामिल करनी होंगी। इसके लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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एनसीईआरटी की किताब में चैप्टर की जानकारी और विवरण पूर्ण है तो फिर स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबों से पढ़वाने की जिद क्यों कर रहे हैं। कक्षा एक से आठ तक अनिवार्य रूप से एनसीईआरटी की किताबें ही होनी चाहिए। बोर्ड के प्रश्नपत्रों में जो सवाल आते हैं, वह भी एनसीईआरटी की किताबों से आते हैं। इसलिए एनसीईआरटी की किताबें ही पढ़ाई जानी चाहिए। - रीता नागपाल, अभिभावक
हमने जब दोनों किताबों को देखा तो पाया कि एनसीईआरटी की किताबों में पेज निजी प्रकाशकों की किताब से ज्यादा हैं, जो बच्चों को आसानी से समझ में आ रहे हैं। एनसीईआरटी की किताबें विशेषज्ञों द्वारा तैयार की जाती हैं, लेकिन कमीशन के चक्कर में स्कूलों द्वारा निजी प्रकाशकों की किताबें थोपी जा रही हैं। इसकी वजह से अभिभावकों का इस महीने का बजट गड़बड़ा गया है। - काजल खरबंदा, अभिभावक
जब हम निजी प्रकाशक की किताब का कवर देखते हैं तो उस पर एनसीईआरटी के लेटेस्ट पाठ्यक्रम पर आधारित लिखा होता है। ऐसे में फिर बच्चे को एनसीईआरटी की किताब से ही क्यों नहीं पढ़ाया जा रहा है। हमने अधिकारियों से बार-बार मांग की थी, लेकिन सत्र शुरू होने के बाद भी इस मनमानी को रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है - राजदीप गोयल, उप सचिव, मुरादाबाद पेरेंट्स ऑफ आल स्कूल्स
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बाजार में एनसीईआरटी की किताबें उपलब्ध हैं। अभिभावक एनसीईआरटी की किताबें खरीदें। हम लागू करवाएंगे। - देवेंद्र कुमार पांडेय, जिला विद्यालय निरीक्षक
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कक्षा छह की गणित की एनसीईआरटी और निजी प्रकाशक की किताब में 12-12 चैप्टर हैं। एनसीईआरटी की किताब में पहले चैप्टर का नाम पैटर्न्स है और निजी प्रकाशक की किताब में भी यही चैप्टर है। दोनों ही अलग-अलग निजी स्कूलों में लगाई गई किताबें हैं। एनसीईआरटी की किताब में 272 पेज और कीमत 65 रुपये है, जबकि निजी प्रकाशक की किताब में 248 पेज और कीमत 530 रुपये है।
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वहीं, तीसरे स्कूल ने भी कक्षा छह में ही निजी प्रकाशक की गणित की किताब लगाई है। उसमें सिर्फ चैप्टर आगे-पीछे कर दिए गए हैं और कीमत 450 रुपये हैं। इसके अलावा कक्षा छह की विज्ञान विषय की एनसीईआरटी की किताब में 230 पेज हैं और कीमत 65 रुपये है। वहीं निजी प्रकाशक की किताब की कीमत 579 रुपये है। दोनों ही किताबों में पहला चैप्टर द वंडरफुल वर्ल्ड ऑफ साइंस है।
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स्कूलों की इस मनमानी से अभिभावकों में रोष है। अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की है। डीआईओएस देवेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबें ही पाठ्यक्रम में शामिल करनी होंगी। इसके लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
एनसीईआरटी की किताब में चैप्टर की जानकारी और विवरण पूर्ण है तो फिर स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबों से पढ़वाने की जिद क्यों कर रहे हैं। कक्षा एक से आठ तक अनिवार्य रूप से एनसीईआरटी की किताबें ही होनी चाहिए। बोर्ड के प्रश्नपत्रों में जो सवाल आते हैं, वह भी एनसीईआरटी की किताबों से आते हैं। इसलिए एनसीईआरटी की किताबें ही पढ़ाई जानी चाहिए। - रीता नागपाल, अभिभावक
हमने जब दोनों किताबों को देखा तो पाया कि एनसीईआरटी की किताबों में पेज निजी प्रकाशकों की किताब से ज्यादा हैं, जो बच्चों को आसानी से समझ में आ रहे हैं। एनसीईआरटी की किताबें विशेषज्ञों द्वारा तैयार की जाती हैं, लेकिन कमीशन के चक्कर में स्कूलों द्वारा निजी प्रकाशकों की किताबें थोपी जा रही हैं। इसकी वजह से अभिभावकों का इस महीने का बजट गड़बड़ा गया है। - काजल खरबंदा, अभिभावक
जब हम निजी प्रकाशक की किताब का कवर देखते हैं तो उस पर एनसीईआरटी के लेटेस्ट पाठ्यक्रम पर आधारित लिखा होता है। ऐसे में फिर बच्चे को एनसीईआरटी की किताब से ही क्यों नहीं पढ़ाया जा रहा है। हमने अधिकारियों से बार-बार मांग की थी, लेकिन सत्र शुरू होने के बाद भी इस मनमानी को रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है - राजदीप गोयल, उप सचिव, मुरादाबाद पेरेंट्स ऑफ आल स्कूल्स
बाजार में एनसीईआरटी की किताबें उपलब्ध हैं। अभिभावक एनसीईआरटी की किताबें खरीदें। हम लागू करवाएंगे। - देवेंद्र कुमार पांडेय, जिला विद्यालय निरीक्षक