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एसईजेड को मिला मल्टी प्रोडक्ट जोन का दर्जा
ब्यूरो/ अमर उजाला मुरादाबाद
Updated Wed, 24 Feb 2016 02:04 AM IST
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स्पेशल इकानॉमिक जोन को मल्टी प्रोडक्ट जोन (एमपीजेड) का दर्जा मिल गया है। जिससे न केवल एसईजेड का विकास होगा बल्कि मुरादाबाद के विकास को भी पंख लगेंगे। एसईजेड में अभी तक केवल हैंडीक्राफ्ट से जुड़ी कंपनियां ही काम कर रही थीं। एमपीजेड होने के बाद यहां सभी सेक्टर से कंपनियां लगेंगी।
जिससे भारत के साथ विदेशी कंपनियां भी आएंगी। युवाओं के लिए रोजगार के साधन बढ़ेंगे और मुरादाबाद का विकास भी तेजी होगा। मुरादाबाद में एसईजेड की स्थापना 2003 में हुई थी। जबकि पहली कंपनी 2007 में लगी। यहां बेहद सुस्त रफ्तार से काम हुआ। मुरादाबाद में हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री को देखते हुए एसईजेड को हैंडीक्राफ्ट के लिए आरक्षित रखा गया था। देश भर की हैंडीक्राफ्ट तो दूर मुरादाबाद के निर्यातकों ने यहां फैक्ट्रियां लगाने में रुचि नहीं दिखाई।
जिसका परिणाम ये हुआ कि अभी तक यहां केवल 34 कंपनियां से प्रोडक्शन कर रही हैं। जिसे देखते हुए 2013 में एसईजेड को एमपीजेड बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई। केंद्र की ओर से सहमति मिलने के बाद प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया। राज्य सरकार की ओर से सुस्त प्रक्रिया के चलते एमपीजेड का प्रस्ताव लगातार लेट होता गया। यूपीएसआईडीसी ने प्रोजेक्ट रिपोर्ट सम्मिट करने में ही एक साल का समय लगा दिया।
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इसके बाद राज्य सरकार से एसईजेड को एमपीजेड बनाने के लिए एनओसी देने में आठ महीने का समय लगा दिया। मंगलवार को कामर्स सेक्रेटरी भारत सरकार की अध्यक्षता में एप्रूवल कमेटी की बैठक हुई। जिसमें प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी गई है। इसके बाद यहां विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियां काम करेंगी। जो अपने साथ विकास और रोजगार लेकर आएंगी। मुरादाबाद के शिक्षित युवाओं को घर में ही रोजगार मिलेगा।
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जिससे भारत के साथ विदेशी कंपनियां भी आएंगी। युवाओं के लिए रोजगार के साधन बढ़ेंगे और मुरादाबाद का विकास भी तेजी होगा। मुरादाबाद में एसईजेड की स्थापना 2003 में हुई थी। जबकि पहली कंपनी 2007 में लगी। यहां बेहद सुस्त रफ्तार से काम हुआ। मुरादाबाद में हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री को देखते हुए एसईजेड को हैंडीक्राफ्ट के लिए आरक्षित रखा गया था। देश भर की हैंडीक्राफ्ट तो दूर मुरादाबाद के निर्यातकों ने यहां फैक्ट्रियां लगाने में रुचि नहीं दिखाई।
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जिसका परिणाम ये हुआ कि अभी तक यहां केवल 34 कंपनियां से प्रोडक्शन कर रही हैं। जिसे देखते हुए 2013 में एसईजेड को एमपीजेड बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई। केंद्र की ओर से सहमति मिलने के बाद प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया। राज्य सरकार की ओर से सुस्त प्रक्रिया के चलते एमपीजेड का प्रस्ताव लगातार लेट होता गया। यूपीएसआईडीसी ने प्रोजेक्ट रिपोर्ट सम्मिट करने में ही एक साल का समय लगा दिया।
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इसके बाद राज्य सरकार से एसईजेड को एमपीजेड बनाने के लिए एनओसी देने में आठ महीने का समय लगा दिया। मंगलवार को कामर्स सेक्रेटरी भारत सरकार की अध्यक्षता में एप्रूवल कमेटी की बैठक हुई। जिसमें प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी गई है। इसके बाद यहां विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियां काम करेंगी। जो अपने साथ विकास और रोजगार लेकर आएंगी। मुरादाबाद के शिक्षित युवाओं को घर में ही रोजगार मिलेगा।