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सूबे में गेहूं खरीद के लिए बोरों का संकट
पुनीत शर्मा/ मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 02 Apr 2016 03:10 AM IST
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गेहुं कट्टे
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प्रदेश में गेहूं खरीद के लिए बोरों का संकट खड़ा हो गया है। अभी तक गेहूं खरीद करने वाली सभी सरकारी एजेंसियों को खाद्य विभाग उधार में बोरे दे दिया करता था मगर इस साल साफ इंकार कर दिया है। एजेंसियों को कहा गया है कि वह मार्केट से बोरों की खरीद करें। वहीं कई एजेंसियों के पास फिलहाल बजट की ही व्यवस्था नहीं है।
बोरों की उपलब्धता न होने पर खरीद में होने वाले संभावित संकट से शासन को अवगत करा दिया गया है। यूपी सरकार ने पिछले सप्ताह हुई कैबिनेट बैठक के जरिए प्रत्येक खरीद केंद्र पर पांच गांठ बोरे आवश्यक रूप से रखने के निर्देश भी दिए हैं। ऐसे में बोरों की तत्काल व्यवस्था कर पाना एजेंसियों के लिए टेढ़ी खीर होगी।
उत्तर प्रदेश में 45 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जानी है। पहली अप्रैल से गेहूं खरीद सत्र शुरू हो गया है। आठ सरकारी एजेंसियों को गेहूं खरीद के लिए अधिकृत किया गया है। इससे पहले कि यह एजेंसियां अपने सेंटर खोलती बोरों को लेकर हल्ला मच गया।
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दरअसल अभी तक प्रदेश सरकार जूट मिलों से बोरे खरीद लिया करती थी मगर अब खरीद नहीं की जा रही है। प्रदेश सरकार जो बोरे लेती थीं उन्हें खाद्य विभाग गेहूं खरीदने वाली सरकारी एजेंसियों को दो महीने के उधार पर बोरे देता था। मगर एजेंसियों ने बोरों का पैसा खाद्य विभाग को दिया ही नहीं।
पिछले तीन साल की पैसा बकाया है। लिहाजा अब खाद्य विभाग ने बोरे देने से ही इंकार कर दिया है। गेहूं खरीद करने वाली सभी एजेंसियों से कहा गया है कि वह मार्केट से बोरों की खरीद कर लें। प्लास्टिक वाले बोरे खरीदे जाने हैं।
तर्क दिया गया कि जूट वाले बोरों में से गेहूं निकल जाता है। आरएफसी चंद्रभान सिंह का कहना है कि इस बार एजेंसियों को बाजार से बोरा खरीदना होगा। इस संबंध में शासन स्तर से नियमावली भी जारी हो चुकी है।
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बोरों की उपलब्धता न होने पर खरीद में होने वाले संभावित संकट से शासन को अवगत करा दिया गया है। यूपी सरकार ने पिछले सप्ताह हुई कैबिनेट बैठक के जरिए प्रत्येक खरीद केंद्र पर पांच गांठ बोरे आवश्यक रूप से रखने के निर्देश भी दिए हैं। ऐसे में बोरों की तत्काल व्यवस्था कर पाना एजेंसियों के लिए टेढ़ी खीर होगी।
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उत्तर प्रदेश में 45 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जानी है। पहली अप्रैल से गेहूं खरीद सत्र शुरू हो गया है। आठ सरकारी एजेंसियों को गेहूं खरीद के लिए अधिकृत किया गया है। इससे पहले कि यह एजेंसियां अपने सेंटर खोलती बोरों को लेकर हल्ला मच गया।
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दरअसल अभी तक प्रदेश सरकार जूट मिलों से बोरे खरीद लिया करती थी मगर अब खरीद नहीं की जा रही है। प्रदेश सरकार जो बोरे लेती थीं उन्हें खाद्य विभाग गेहूं खरीदने वाली सरकारी एजेंसियों को दो महीने के उधार पर बोरे देता था। मगर एजेंसियों ने बोरों का पैसा खाद्य विभाग को दिया ही नहीं।
पिछले तीन साल की पैसा बकाया है। लिहाजा अब खाद्य विभाग ने बोरे देने से ही इंकार कर दिया है। गेहूं खरीद करने वाली सभी एजेंसियों से कहा गया है कि वह मार्केट से बोरों की खरीद कर लें। प्लास्टिक वाले बोरे खरीदे जाने हैं।
तर्क दिया गया कि जूट वाले बोरों में से गेहूं निकल जाता है। आरएफसी चंद्रभान सिंह का कहना है कि इस बार एजेंसियों को बाजार से बोरा खरीदना होगा। इस संबंध में शासन स्तर से नियमावली भी जारी हो चुकी है।