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खुली-ताजी नहीं, ये है बीमार हवा... बांट रही सबको दमा
अखिलेश शर्मा / अमर उजाला, मुरादाबाद
Updated Sat, 14 May 2016 06:52 PM IST
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प्रदूषण
- फोटो : BBC
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ई-कचरा जलाए जाने, ब्रास फैक्ट्रियों की भट्टियों और बढ़ते वाहनों के प्रदूषण ने महानगर को जकड़ लिया है। नेशनल एयर मानीटरिंग प्रोग्राम की जो रिपोर्ट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजी जा रही है वह चौंकाने वाली है।
इसके मुताबिक साल दर साल मुरादाबाद में वायु प्रदूषण की स्थिति खतरनाक होती जा रही है। मानक से तीन गुना प्रदूषण पहले से वायु में घुला हुआ है, जोकि इस साल बढ़कर चार गुना हो गया है। प्रदूषण के खतरनाक कण पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) सांसों के संग खिंच रहे हैं ये यूं ही बढ़ते रहे तो दम निकालने के लिए काफी हैं।
डाक्टरों के मुताबिक प्रदूषण से अस्थमा, फेफड़ों में इंफेक्शन जैसी गंभीर बीमारी हो रही हैं। महानगर में ई-कचरा का अवैध कारोबार और उसे जलाकर मैटल निकालने के तरीके, घनी आबादी में चल रही ब्रास फैक्ट्रियों की भट्टियां और बढ़ते वाहनों से लगातार वायु प्रदूषण खतरनाक स्थिति में पहुंच रहा है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी रिपोर्ट में दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में भारत के भी चार शहर शामिल किए हैं। इनमें मुरादाबाद भले ही शामिल नहीं है, लेकिन नेशनल एयर मानीटरिंग प्रोग्राम (नैम्प) के तहत कराए जा रहे सर्वेक्षण की रिपोर्ट को देखें तो यह भी चौंकाने वाली है।
पार्टिकुलेट मैटर 10-100 (पीएम-10) के आधार पर किए जाने वाले सर्वे में महानगर में तीन से चार गुना तक पीएम की संख्या नेशनल एंबीयंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड (एनएएक्यूएस) से निर्धारित मात्रा 60 से कहीं अधिक 180 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यू तक है। जबकि इलाहाबाद में भी पीएम-10 तीन गुना तक है।
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इसके मुताबिक साल दर साल मुरादाबाद में वायु प्रदूषण की स्थिति खतरनाक होती जा रही है। मानक से तीन गुना प्रदूषण पहले से वायु में घुला हुआ है, जोकि इस साल बढ़कर चार गुना हो गया है। प्रदूषण के खतरनाक कण पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) सांसों के संग खिंच रहे हैं ये यूं ही बढ़ते रहे तो दम निकालने के लिए काफी हैं।
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डाक्टरों के मुताबिक प्रदूषण से अस्थमा, फेफड़ों में इंफेक्शन जैसी गंभीर बीमारी हो रही हैं। महानगर में ई-कचरा का अवैध कारोबार और उसे जलाकर मैटल निकालने के तरीके, घनी आबादी में चल रही ब्रास फैक्ट्रियों की भट्टियां और बढ़ते वाहनों से लगातार वायु प्रदूषण खतरनाक स्थिति में पहुंच रहा है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी रिपोर्ट में दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में भारत के भी चार शहर शामिल किए हैं। इनमें मुरादाबाद भले ही शामिल नहीं है, लेकिन नेशनल एयर मानीटरिंग प्रोग्राम (नैम्प) के तहत कराए जा रहे सर्वेक्षण की रिपोर्ट को देखें तो यह भी चौंकाने वाली है।
पार्टिकुलेट मैटर 10-100 (पीएम-10) के आधार पर किए जाने वाले सर्वे में महानगर में तीन से चार गुना तक पीएम की संख्या नेशनल एंबीयंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड (एनएएक्यूएस) से निर्धारित मात्रा 60 से कहीं अधिक 180 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यू तक है। जबकि इलाहाबाद में भी पीएम-10 तीन गुना तक है।