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भाजपाइयों के आगे ठिठके खाकी के कदम , डकैती, जानलेवा हमले समेत गंभीर धाराओं में केस दर्ज, फिर भी शांति भंग में किया चालान

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 05 Jun 2021 02:18 AM IST
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police free bjp workers in major criminal sections
मुरादाबाद। एक तरफ जहां पुलिस मामूली मारपीट के मामलों में दोनों पक्षों के लोगों को गिरफ्तार कर अपनी पीठ थपथपाती नहीं थकती, वहीं भाजपाइयों के सामने खाकी के कदम ठिठक गए। डकैती, जानलेवा हमले, बलवा समेत अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज होने के बावजूद उनका शांति भंग में चालान किया। 14 घंटे में भाजपाइयों के दो गुट चार बार भिड़े। एक बार तो थाने के अंदर ही पुलिस की मौजूदगी में जमकर बवाल हुआ। पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद है, फिर भी अधिकारी जांच के बाद कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
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मूंढापांडे थानाक्षेत्र के दौलारी गांव निवासी व भाजपा नेता रामवीर सिंह की पत्नी संतोष देवी वार्ड संख्या 31 से जिला पंचायत सदस्य हैं, जबकि मूंढापांडे निवासी भाजपा मंडल अध्यक्ष रंजीत सिंह वार्ड संख्या 32 से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़े थे और उनकी हार हो गई थी। रंजीत का आरोप है कि रामवीर सिंह की वजह से वह चुनाव हारे हैं। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद है। अब ब्लाक प्रमुख के लिए भी दोनों अलग-अलग उम्मीदवारों को लेकर आमने सामने हैं। बुधवार रात से लेकर गुरुवार दोपहर तक रामवीर और रंजीत गुटों के बीच चार बार मारपीट हुई थी। एक बार तो थाने में पुलिस की मौजूदगी में मारपीट हुई। पूरे घटनाक्रम में पुलिस ने तीन केस दर्ज किए हैं। दो केस रामवीर सिंह के बेटे विक्की उर्फ बृजनंद और एक केस रंजीत सिंह की ओर से लिखाया गया है। जिसमें डकैती, जानलेवा हमला, बलवा, मारपीट, जान से मारने की धमकी देना और वाहनों में तोड़फोड़ की धाराओं में केस दर्ज हैं। बावजूद इसके पुलिस भाजपाइयों के सामने कुछ नहीं कर पाई। नेताओं के दबाव में पहले पुलिस ने केस दर्ज किए, फिर बिना कार्रवाई के ही छोड़ने के लिए पुलिस को मजबूर किया गया। मारपीट की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। पुलिस ने अपनी गर्दन बचाने को केवल शांति भंग में दोनों पक्षों के सात लोगों का चालान कर किया है।
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पूरे घटनाक्रम में तीन केस दर्ज किए गए हैं। केसों में गंभीर धाराएं लगी हैं। इसलिए पूरे प्रकरण की जांच कराना जरूरी है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे। उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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- प्रभाकर चौधरी, वरष्ठि पुलिस अधीक्षक
मतदान से कुछ घंटे पहले हुआ था बवाल, भाजपाइयों के खिलाफ हुआ था केस
मुरादाबाद। मूंढापांडे थाने में ही नहीं, पाकबड़ा थानाक्षेत्र में भी भाजपाइयों ने बवाल किया था। मतदान से कुछ घंटे पहले 25 अप्रैल की रात पाकबड़ा थानाक्षेत्र में हुए बवाल में भी पुलिस ने अब तक किसी भी आरोपी को गिरफ्तारी नहीं किया है। सपा जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव के भतीजे दुष्यंत यादव ने पाकबड़ा थाने में पूर्व ब्लाक प्रमुख मनीष सिंह, उनके पिता भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष राकेश सिंह, ग्राम प्रधान बबलू सिंह सुरेश सिंह, प्रताप सिंह समेत 11 अज्ञात के खिलाफ जानलेवा हमला, बलवा और वाहनों में तोड़फोड़ की धाराओं में केस दर्ज कराया था। इस मामले में भी पुलिस ने अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं की है। हालांकि अगले दिन सिपाही प्रशांत कुमार की ओर से दुष्यंत यादव समेत अन्य के खिलाफ भी एक केस दर्ज किया गया था।
भोजपुर, मूंढापांडे, कुंदरकी और मैनाठेर में हुई थी मारपीट, किए गए थे आरोपी गिरफ्तार
मुरादाबाद। पंचायत चुनाव में मतदान से पहले और मतदान के बाद भोजपुर, मूंढापांडे, कुंदरकी, बिलारी, कटघर और सिविल लाइंस के गांवों में मारपीट हुई थी। इस मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ केस दर्ज किए हैं। अब तक पुलिस बीस से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
थाने में हंगामा करने वालों से पुलिस करेगी वसूली
मुरादाबाद। मूंढापांडे थाने में हंगामा और मारपीट करने वालों से पुलिस पांच-पांच लाख रुपये की वसूली करेगी। इसके लिए आरोपियों को नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है। मूंढापांडे थानाक्षेत्र में भाजपाइयों के दो गुटों के बीच मारपीट हुई थी। इस मामले में पुलिस ने दोनों ओर से तीन केस दर्ज किए हैं। मूंढापांड़े थाना प्रभारी नवाब सिंह ने बताया कि सात आरोपितों का शांतिभंग में चालान किया गया था। उनसे चुनाव बंधपत्र का उल्लंघन करने के मामले में नोटिस जारी करके पांच-पांच लाख रुपये की वसूली की कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञ की राय -
डकैती, जानलेवा हमला और अन्य धाराएं गंभीर धाराएं हैं। इन धाराओं में यदि एफआईआर हुई है तो पुलिस को कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें न्यायालय में पेश करना चाहिए था। गिरफ्तारी दिखाई जाती। न्यायालय से ही आरोपियों की जमानत भी होती। यदि धाराओं का अल्पीकरण करके केवल शांतिभंग में चालान कर दिया गया है तो यह गलत है। न्यायालय में जो भी अधिवक्ता इस केस को देखेगा वह कानूनी पक्षों पर कई सवाल खड़े कर सकता है।
- आनंद मोहन गुप्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता
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