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मुरादाबाद की धरती पर पैदा होगी गन्ने की नई प्रजाति
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मुरादाबाद। अब मुरादाबाद की धरती पर बनने वाले गन्ना शोध संस्थान में गन्ने की नई प्रजातियां पैदा की जाएगी। स्थानीय वातावरण में तैयार नई प्रजातियों किसानों के लिए उपलब्ध रहेगी। मुरादाबाद मंडल सहित बरेली, अलीगढ़ मंडल के किसानों का इसका लाभ मिलेगा। गन्ना शोध संस्थान केंद्र के लिए जिला प्रशासन ने 20 एकड़ देने की स्वीकृति का अनुमोदन गन्ना परिषद लखनऊ को भेज दिया है। गन्ना परिषद को जमीन मिलने ही शोध संस्थान केंद्र बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। किसान गन्ना प्रशिक्षण संस्थान केंद्र वाराणसी से मुरादाबाद स्थानांतरित हो चुका है।
पश्चिमी यूपी गन्ना बेल्ट के नाम से मशहूर है। यहां पर जिला मुजफ्फरनगर में उप गन्ना शोध संस्थान केंद्र है, इसके अलावा अन्य किसी जिले में कोई शोध संस्थान नहीं है। गन्ना मंत्री सुरेश राणा की स्वीकृति के बाद मुरादाबाद जिले में गन्ना शोध संस्थान केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक बिलारी क्षेत्र के गांव पीपली में राजस्व विभाग की बीस एक एकड़ जमीन पर शोध संस्थान केंद्र बनाया जाएगा। राजस्व विभाग की ओर से ये जमीन गन्ना विकास परिषद को जमीन हस्तांतरित करने के लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है। जमीन उपलब्ध होने के साथ ही शोध संस्थान केंद्र बनाने की प्रकिया को पूरा किया जाएगा।
संस्थान केंद्र के लिए 100 एकड़ जमीन की आवश्यकता
गन्ना शोध संस्थान केंद्र के लिए 100 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। हाल में विभाग को केवल 20 एकड़ जमीन ही उपलब्ध हो पाई हैं। गन्ना शोध संस्थान केंद्र बनने पर अन्य आवश्यक जमीन की तलाश की जाएगी। जमीन कम रहने की स्थिति में किसानों से ठेके पर भी जमीन ली जा सकती है।
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इन जिलों के किसान होंगे लाभांवित
मुरादाबाद में गन्ना शोध संस्थान केंद्र बनने पर जिला मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, संभल, अमरोहा, बरेली, बदायूं, कासगंज, अलीगढ़, मथुरा, आदि जिलों के किसानों को लाभ मिलेगा। नई प्रजातियों पर नित नए शोध होंगे, तथा किसानों को ताजा बीज उपलब्ध होगा। किसानों को नई तकनीक का समस समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
गन्ना प्रशिक्षण केंद्र हो चुका स्थानांतरित
वाराणसी में पिछले चार दशक से स्थापित किसान गन्ना प्रशिक्षण केंद्र को मुरादाबाद में स्थानांतरित किया जा चुका है। पूर्वी जिलों में गन्ने की मात्रा कम होने और पश्चिम में बाहुल्यता होने के कारण शासन ने यह निर्णय लिया है। केंद्र के असिस्टेंट डायरेक्टर मनीष कुमार ने बताया कि इस केंद्र पर जिला मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, संभल, अमरोहा, कासगंज, बदायू, अलीगढ़ व मथुरा के किसान, गन्ना अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
गन्ना शोध संस्थान केंद्र के लिए बिलारी क्षेत्र में जमीन देखी गई है। प्रशासन भी कुछ जमीन उपलब्ध कराने को तैयार है, जमीन की उपलब्धता के विषय में शासन को अवगत कराया गया है। राजस्व विभाग से गन्ना विकास परिषद को जमीन मिलने पर केंद्र बनाने की प्रकिया शुरू की जाएगी।
अमर सिंह, उप गन्ना आयुक्त मुरादाबाद।
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पश्चिमी यूपी गन्ना बेल्ट के नाम से मशहूर है। यहां पर जिला मुजफ्फरनगर में उप गन्ना शोध संस्थान केंद्र है, इसके अलावा अन्य किसी जिले में कोई शोध संस्थान नहीं है। गन्ना मंत्री सुरेश राणा की स्वीकृति के बाद मुरादाबाद जिले में गन्ना शोध संस्थान केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक बिलारी क्षेत्र के गांव पीपली में राजस्व विभाग की बीस एक एकड़ जमीन पर शोध संस्थान केंद्र बनाया जाएगा। राजस्व विभाग की ओर से ये जमीन गन्ना विकास परिषद को जमीन हस्तांतरित करने के लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है। जमीन उपलब्ध होने के साथ ही शोध संस्थान केंद्र बनाने की प्रकिया को पूरा किया जाएगा।
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संस्थान केंद्र के लिए 100 एकड़ जमीन की आवश्यकता
गन्ना शोध संस्थान केंद्र के लिए 100 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। हाल में विभाग को केवल 20 एकड़ जमीन ही उपलब्ध हो पाई हैं। गन्ना शोध संस्थान केंद्र बनने पर अन्य आवश्यक जमीन की तलाश की जाएगी। जमीन कम रहने की स्थिति में किसानों से ठेके पर भी जमीन ली जा सकती है।
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इन जिलों के किसान होंगे लाभांवित
मुरादाबाद में गन्ना शोध संस्थान केंद्र बनने पर जिला मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, संभल, अमरोहा, बरेली, बदायूं, कासगंज, अलीगढ़, मथुरा, आदि जिलों के किसानों को लाभ मिलेगा। नई प्रजातियों पर नित नए शोध होंगे, तथा किसानों को ताजा बीज उपलब्ध होगा। किसानों को नई तकनीक का समस समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
गन्ना प्रशिक्षण केंद्र हो चुका स्थानांतरित
वाराणसी में पिछले चार दशक से स्थापित किसान गन्ना प्रशिक्षण केंद्र को मुरादाबाद में स्थानांतरित किया जा चुका है। पूर्वी जिलों में गन्ने की मात्रा कम होने और पश्चिम में बाहुल्यता होने के कारण शासन ने यह निर्णय लिया है। केंद्र के असिस्टेंट डायरेक्टर मनीष कुमार ने बताया कि इस केंद्र पर जिला मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, संभल, अमरोहा, कासगंज, बदायू, अलीगढ़ व मथुरा के किसान, गन्ना अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
गन्ना शोध संस्थान केंद्र के लिए बिलारी क्षेत्र में जमीन देखी गई है। प्रशासन भी कुछ जमीन उपलब्ध कराने को तैयार है, जमीन की उपलब्धता के विषय में शासन को अवगत कराया गया है। राजस्व विभाग से गन्ना विकास परिषद को जमीन मिलने पर केंद्र बनाने की प्रकिया शुरू की जाएगी।
अमर सिंह, उप गन्ना आयुक्त मुरादाबाद।