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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   Naugawan Sadat By elections know everything about seat and candidates of different parties

नौगावां सादात उपचुनाव: भाजपा और सपा प्रत्याशी में है कांटे की टक्कर, जानें इनके बारे में

Tue, 10 Nov 2020 04:21 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा
अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा Published by: प्राची प्रियम Updated Tue, 10 Nov 2020 04:21 PM IST
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Naugawan Sadat By elections know everything about seat and candidates of different parties
मौलाना जावेद आब्दी और संगीता चौहान - फोटो : अमर उजाला

नौगांवा सादात विधानसभा सीट पर बीते तीन नवंबर को उपचुनाव हुआ था। मतगणना अभी जारी है, हालांकि भाजपा उम्मीदवार की दावेदारी सबसे प्रबल है क्योंकि शुरुआती रुझानों से ही संगीता चौहान आगे चल रही हैं। यहां वह सपा के मौलाना जावेद आब्दी को कड़ी टक्कर दे रही हैं। पढ़ें दोनों के बारे में सबकुछ...

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भाजपा ने खेला है इमोशनल कार्ड
कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान के निधन के बाद अमरोहा जिले की नौगांवा सादात विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में भाजपा ने इमोशनल कार्ड खेलते हुए उनकी पत्नी संगीता चौहान को उम्मीदवार बनाया है। 
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चुनाव से पहले जनसभाओं में संगीता चौहान को अक्सर भावुक होते देखा गया था। कई बार उन्होंने ऐसा कहा कि वे पति के मरने का गम भी कायदे से नहीं मना पाई और चुनाव शुरू हो गए। बातचीत में जनता चेतन चौहान को याद करती है तो उनकी आंखों से आंसू निकल पड़ते हैं। 
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बता दें कि बीते दिनों कैबिनेट मंत्री और पूर्व विधायक चेतन चौहान की आकस्मिक मौत की वजह से इस सीट पर उपचुनाव हुआ। फिलहाल भाजपा इस सीट पर संघर्ष कर रही है, क्योंकि किसान बहुल्य इस सीट पर हाल ही में संसद में पारित हुए कृषि कानून का भी खासा असर पड़ेगा। अहम सवाल यह है कि क्षेत्र की जनता क्रिकेटर व राजनीतिज्ञ रहे चेतन चौहान की पत्नी को उनकी विरासत सौंपती है या नहीं?  
 

सपा ने मौलाना जावेद आब्दी पर लगाया है दाव
समाजवादी पार्टी ने 2017 चुनावों में दूसरे नंबर पर रहने वाले मौलाना जावेद आब्दी पर दाव लगाया है। जावेद के लिए इस सीट पर चुनाव बहुत आसान तो नहीं है, लेकिन इसे बहुत मुश्किल भी नहीं कहा जा सकता है। यह सीट मुस्लिम बाहुल्य है। इसके अलावा यहां पिछड़ी जातियां भी हैं। ऐसे में सपा ने खुद को जातीय समीकरण के खांचे में फिट कर लिया है।

हालांकि सपा ने इस बार भाजपा को किसान विरोधी और सांप्रदायिक साबित करके भी दाव चलने की कोशिश की है। अब देखना यह है कि जावेज दूसरे स्थान से पहले पर पहुंच पाते हैं या नहीं।

कांग्रेस और बसपा ने उतारा है नया प्रत्याशी
कांग्रेस ने जाट बिरादरी से ताल्लुक रखने वाली डॉ. (श्रीमती) कमलेश सिंह पर दांव लगाया है। वहीं बसपा दलित-मुस्लिम समीकरण को परवान चढ़ने की उम्मीद संजोए है। इस सीट के बारे में कहा जाता है कि जिसके साथ मुस्लिम और दलित वोट आ जाए उसकी जीत पक्की है। इस समीकरण के भरोसे बसपा और कांग्रेस दोनों ही है।

बसपा और कांग्रेस दोनों ने नए कैंडिडेट उतारे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मुस्लिम वोट तीनों पार्टियों में बंटता हुआ दिख रहा है। जिसका खामियाजा सपा को उठाना पड़ सकता है। यही नहीं बसपा और कांग्रेस अभी जीतने की स्थिति में नहीं दिख रही है। 

3.05 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर सर्वाधिक लगभग सवा लाख मुस्लिम मतदाता हैं। जाट मतदाताओं की संख्या 30-32 हजार है। चौहान (राजपूत) वोट लगभग 28 हजार हैं। लगभग 15 हजार सैनी, 10-12 हजार यादव और इतने ही गुर्जर मतदाता हैं।
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