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सूबे में ‘अवैध’ हो जाएंगे हजारों शस्त्र लाइसेंस
ब्यूरो/ अमर उजाला मुरादाबाद
Updated Sun, 20 Sep 2015 08:02 PM IST
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पहली अक्तूबर को प्रदेश के हजारों शस्त्र लाइसेंस ‘अवैध’ हो जाएंगे। दरअसल गृह विभाग ने हर लाइसेंस पर यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूआईएन) नंबर दर्ज करने की अंतिम तारीख तीस सितंबर घोषित की है। जबकि बीस जिलों में दस फीसदी भी काम नहीं हो सका है। पचास फीसदी से ज्यादा तो कहीं भी नहीं है।
अब गृह विभाग ने सभी जनपदों को वार्निंग जारी कर दी है। डीएम की जिम्मेदारी तय कर दी गई है। दरअसल देश भर में शस्त्र लाइसेंसों का एक डॉटा बैंक तैयार हो रहा है। इसके अंतर्गत हर लाइसेंस का अपना एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर दिया जा रहा है। गृह विभाग ने यह प्रक्रिया 13 अक्तूबर 2014 को शुरू कराई थी। उत्तर प्रदेश के भी सभी जनपदों में जोर शोर के साथ काम शुरू हुआ।
सभी शस्त्र लाइसेंसियों को नोटिस जारी किए गए। मगर यह योजना रफ्तार नहीं पकड़ सकी। पहले इसके लिए 31 जुलाई 2015 अंतिम तिथि घोषित की गई थी मगर फिर बढ़ाकर 30 सितंबर कर दी गई थी। प्रदेश सरकार के सचिव मणिप्रसाद मिश्र ने जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर कहा है कि यूआईएन नंबर को लेकर सभी जिलों की प्रगति बेहद खराब है।
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लिहाजा तेजी लाएं। तीस सितंबर तक सारे लाइसेंस पर यूनिक नंबर दर्ज हो जाना चाहिए। पहली अक्तूबर को वही लाइसेंस वैध माना जाएगा जिस पर यूनिक नंबर दर्ज होगा। बाकी को अवैध घोषित कर दिया जाएगा। इन जिलों की बुरी स्थिति- कानपुर, फर्रुखाबाद, काशीरामनगर, गौतमबुद्ध नगर, औरैया, सीतापुर, मथुरा, अलीगढ़, वाराणसी, गोंडा, हमीरपुर, मुजफ्फरनगर, बदायूं, शाहजहांपुर में आठ फीसदी लाइसेंसों पर ही नंबर दर्ज किया जा सका है।
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अब गृह विभाग ने सभी जनपदों को वार्निंग जारी कर दी है। डीएम की जिम्मेदारी तय कर दी गई है। दरअसल देश भर में शस्त्र लाइसेंसों का एक डॉटा बैंक तैयार हो रहा है। इसके अंतर्गत हर लाइसेंस का अपना एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर दिया जा रहा है। गृह विभाग ने यह प्रक्रिया 13 अक्तूबर 2014 को शुरू कराई थी। उत्तर प्रदेश के भी सभी जनपदों में जोर शोर के साथ काम शुरू हुआ।
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सभी शस्त्र लाइसेंसियों को नोटिस जारी किए गए। मगर यह योजना रफ्तार नहीं पकड़ सकी। पहले इसके लिए 31 जुलाई 2015 अंतिम तिथि घोषित की गई थी मगर फिर बढ़ाकर 30 सितंबर कर दी गई थी। प्रदेश सरकार के सचिव मणिप्रसाद मिश्र ने जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर कहा है कि यूआईएन नंबर को लेकर सभी जिलों की प्रगति बेहद खराब है।
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लिहाजा तेजी लाएं। तीस सितंबर तक सारे लाइसेंस पर यूनिक नंबर दर्ज हो जाना चाहिए। पहली अक्तूबर को वही लाइसेंस वैध माना जाएगा जिस पर यूनिक नंबर दर्ज होगा। बाकी को अवैध घोषित कर दिया जाएगा। इन जिलों की बुरी स्थिति- कानपुर, फर्रुखाबाद, काशीरामनगर, गौतमबुद्ध नगर, औरैया, सीतापुर, मथुरा, अलीगढ़, वाराणसी, गोंडा, हमीरपुर, मुजफ्फरनगर, बदायूं, शाहजहांपुर में आठ फीसदी लाइसेंसों पर ही नंबर दर्ज किया जा सका है।