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Moradabad News: हेपेटाइटिस का वार, हर माह 400 लोग बीमार

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 28 Jul 2025 02:18 AM IST
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Hepatitis attack, 400 people fall ill every month
मुरादाबाद। ठाकुरद्वारा के सुरजननगर निवासी फरमान 58 वर्ष के हैं। उन्हें पिछले पांच साल से भूख कम लगती है। उम्र का तकाजा मानकर इसे नजरअंदाज किया लेकिन धीरे-धीरे वजन कम होने लगा। अब उनके जोड़ों में भी दर्द रहता है, शरीर पीला पड़ने लगा है। जिला अस्पताल में जांच कराई तो पता चला कि शरीर में हेपेटाइटिस-सी का संक्रमण है। अब उनका इलाज चल रहा है।
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सिर्फ फरमान नहीं बल्कि हर दिन ऐसे 18 और महीने में 400 से ज्यादा मरीज जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिले में निजी चिकित्सकों के यहां भी हर दिन औसतन 12 मरीज पहुंच रहे हैं। ऐसे लोग जो भूख कम लगना, वजन कम होना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं उन्हें हेपेटाइटिस-सी हो सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक यह बीमारी धीरे-धीरे एक बड़ी आबादी को अपनी जद में ले रही है। चूंकि इसका असर फौरन दिखाई नहीं देता इसलिए लोग अंजान रहते हैं। कई वर्ष बाद लिवर के खराब होने, पानी भरने के मामले में जब ऑपरेशन किया जाता है तो पता चलता है कि व्यक्ति कई सालों से हेपेटाइटिस-सी की चपेट में है। हालांकि हेपेटाइटिस-ए, बी, सी, डी व ई सभी बीमारियों के लक्षण लगभग एक जैसे हैं लेकिन मुरादाबाद क्षेत्र में हेपेटाइटिस-सी के मरीज ज्यादा हैं।
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जिला अस्पताल में 2019 में वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम शुरू हुआ। तब से अब तक 31276 मरीज आ चुके हैं। वहीं बेपेटाइटिस-बी के 138 मरीज आए हैं। इनमें से 121 अब भी इलाज ले रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि हेपेटाइटिस-बी का संक्रमण बहुत लंबे समय तक रहता है। इसलिए ज्यादातर मामलों में मरीज को उम्र भर दवा खानी पड़ती है।
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बजट कम, उधारी में हो रही वायरल लोड की जांच
एनएचएम की ओर से बजट जारी होने के कारण वायरल लोड की जांच कई माह रुकी रही। मेरठ मेडिकल कॉलेज ने भी जांच ज्यादा होने के कारण नए सैंपल लेने से मना कर दिया। इसके बाद जिला अस्पताल किट उधार लेकर लोगों की जांच कर रहा है। एनएचएम से बजट मिलने के बाद निजी सप्लायर की उधारी चुकाई जाएगी। पिछले छह से माह से ही जिला अस्पताल में वायरल लोड की जांच शुरू हुई है। इससे पहले सैंपल मेरठ भेजे जाते थे।
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बाहर न खर्चें 10 हजार, जिला अस्पताल में लें उपचार

फिजीशियन डॉ. आशीष सिंह का कहना है कि जिन लोगों को लक्षण महसूस हों वे फौरन जिला अस्पताल पहुंचें और अपनी जांच कराएं। निजी अस्पतालों में जहां चार से पांच हजार रुपये जांच में खर्च होते हैं। वहीं 84 दिन के उपचार में करीब नौ हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। जिला अस्पताल में ये दोनों सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध हैं। जनवरी से अब तक 2020 लोगों को निशुल्क उपचार दिया जा चुका है। लगभग 200 लोगों का इलाज चल रहा है।

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बचाव के उपाय

- घर से बाहर शेविंग न कराएं

- किसी भी अप्रशिक्षित डॉक्टर से इंजेक्शन न लगवाएं
- टैटू बनवाना है तो किसी विशेषज्ञ आर्टिस्ट से ही बनवाएं

- रक्त लेने व देने से पहले जांच जरूर करा लें

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अस्पताल में मरीजों को जांच और दवा दोनों सुविधाएं दी जा रही हैं। बजट का मामला भी आला अधिकारियों के संज्ञान में है। जल्द ही यह परेशानी भी खत्म हो जाएगी। हेपेटाइटिस से बचाव व जागरूकता के लिए हमारे डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ सोमवार को गतिविधियों का आयोजन भी करेंगे।
- डॉ. संगीता गुप्ता, एसआईसी, जिला अस्पताल
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