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दूसरों के ‘दर्द’ से डिप्रेशन में आ रही बेटियां

Sun, 31 Jul 2016 11:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद Updated Sun, 31 Jul 2016 11:16 AM IST
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girls are in Depression to boys fear
म‌हिला सुरक्षा - फोटो : demo
 आसपास, परिवार और सहेलियों के साथ हो रही हिंसक घटनाओं का असर बेटियाें पर पड़ रहा है। कोई स्कूल और कोचिंग जाती साथी छात्राओं के साथ होने वाले छेड़छाड़ से आहत है तो कोई अपनों के साथ होने वाली घरेलू हिंसा से।
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वहीं कुछ बेटियां ऐसी भी है जो आसपास या अपनों के इतर दूसरों के साथ हुई घटनाओं से भी अपने को असुरक्षित महसूस करने लगी हैं। दूसरों के ‘दर्द’ से बेटियां अब डिप्रेशन में आने लगी हैं। इसका खुलासा जिला अस्पताल के किशोेरी परामर्श केंद्र में पहुंचने वाली किशोरियों ने किया है।
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यहां रोजाना आने वाले मामलों में चार से पांच ऐसे केस होते हैं, जिनमें किशोरियां अपने आसपास की महिला हिंसा, छेड़छाड़, रेप, दुर्व्यवहार की घटनाओं से डिप्रेशन में चली जा रही है। अचानक उनके व्यवहार में परिवर्तन आ जा रहा है। ऐसी छात्राओं को अवसाद से निकलने में वक्त लगता है। 
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घर परिवार, दोस्त यार, मोहल्लों में होने वाली महिला हिंसा की घटनाओं का असर किशोरियों पर पड़ रहा है। इन घटनाओं को अपने साथ होने की आशंका को लेकर वह डर सहम जा रही है। खुद को असुरक्षित महसूस करने लगी हैं। यही वजह है कि किशोरियां अवसाद में चली जा रही हैं। स्कूल न जाने, शादी न करने जैसी बातें करने लगती हैं। - हेमा सिंह, काउंसलर, किशोरी परामर्श केंद्र 
 
लड़का-लड़की में फर्क भी बन रहे कारण
मुरादाबाद। परिवार में लड़का-लड़की में फर्क भी छात्रों में डिप्रेशन का कारण बन रहे हैं। परामर्श केंद्र कुछ ऐसे भी मामले आते हैं। घर में भाइयों को जरूरत से अधिक महत्व दिए जानेे, उन पर अधिक पाबंदी लगाने से भी किशोरियां आहत होती हैं। 

 लाजपतनगर की इंटरमीडिएट की छात्रा के व्यवहार में पिछले कुछ दिनों से तब्दीली आ गई। वह अकेला रहना पसंद करने लगी। उसके व्यवहार परिवर्तन से परेशान अभिभावक छात्रा को लेकर जिला अस्पताल के किशोरी परामर्श केंद्र पहुंचे। जहां काउंसलिंग में मामला डिप्रेशन का निकला। इसकी वजह साथ में पढ़ने वाली छात्रा से छेड़छाड़ थी। इस घटना से वह अपने का असुरक्षित महसूस करने लगी। 


वहीं कांठ रोड की दसवीं की छात्रा की बहन को ससुरालियों ने मारपीट कर घर से निकाल दिया। मां-बाप के पास पहुंची बहन की हालत देख छात्रा की तबीयत बिगड़ गई। खाना पीना छोड़ दिया। बार-बार परिजनों से शादी नहीं करने की बात करने लगी। हफ्तेभर का दिन गुजर जाने के बाद भी उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। थक हारकर परिजन उसे किशोरी परामर्श केंद्र लेकर आए। जहां उसकी काउंसलिंग की गई।  

किस महीने कितनी किशोरियां पहुंची
महीना------------संख्या
जनवरी-----------559
फरवरी------------503
मार्च--------------564
अप्रैल-------------337
मई---------------512
जून--------------496
जुलाई-------------612
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