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साइकिल से बढ़ाई यारी, अब बनी सेहत की सवारी
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दिल्ली रोड पर साइकिल दिवस की पूर्व संध्या पर सांय के समय अपने घर जाते साइकिल प्रेमी । संवाद
- फोटो : CITY
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मुरादाबाद। कभी सिर्फ मेहनतकश लोगों की ही सवारी मानी जाने वाली साइकिल कुछ वर्षों में समृद्ध लोगों की भी जरूरत बन गई है। इस वर्ग का मकसद साइकिल से सेहत के लिए मेहनत करनी है। कोरोना संक्रमण में लॉकडाउन के दौरान जब महामारी का तनाव था और सभी जिम बंद थे तो कई लोगों ने अपने आप को स्वस्थ रखने व तनाव को दूर करने के लिए साइक्लिंग का सहारा लिया। उनका यह शौक कब दिनचर्या का हिस्सा बन गया उन्हें पता ही नहीं चला। चिकित्सक भी मानते हैं कि मोटापे को कम करने के साथ-साथ साइकिल अन्य कई रोगों से बचाने और उबारने में मदद करती है। शरीर के सभी अंगों की एक्सरसाइज हो जाने के कारण साइकिलिंग फिटनेस का बढ़िया रास्ता है।
मेडल जीतने तक पहुंचा साइकिल का शौक
लाइनपार निवासी 36 वर्षीय राहुल विश्नोई ने लॉकडाउन में कोरोना का तनाव और कोलस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या को दूर करने के लिए साइकिल चलाना शुरू किया था। मोटापे की भी समस्या थी। दो वर्षों में इस शौक ने उन्हें प्रतियोगिताओं और मेडल जीतने के मुकाम तक पहुंचा दिया। राहुल बताते हैं कि साइकिलिंग समूह साइक्लो क्रॉस ने मुझे नोएडा से मुरादाबाद, नैनीताल, हरिद्वार, आगरा, अजमेर, मथुरा आदि तक लंबी साइकिल यात्रा में मदद की। सबसे लंबी नोएडा से अजमेर तक की साइक्लिंग के बाद दिल्ली-मुंबई (2000 किमी), दिल्ली-जयपुर-आगरा (1200 किमी) की साइकिल यात्रा का लक्ष्य है। 20 से अधिक प्रतिस्पर्धाओं में पदक भी जीते हैं।
साइकिलिंग करने से दूर हो गया जोड़ों का दर्द
नया मुरादाबाद निवासी 46 वर्षीय डॉ. सत्यवीर सिंह चौहान ने बताया कि दो वर्ष पूर्व बहुत तेजी से कोरोना फैल रहा था। मैदान में शारीरिक अभ्यास बंद हो गया तब साइकिल चलाना शुरू किया था। इससे कसरत के साथ-साथ शरीर में लोच (लचक) बढ़ाने में भी फायदा हुआ। पहले जोड़ों में दर्द रहता था, अब यह समस्या दूर हो गई है। वह बोले, कि मैंने एक साइकिलिंग ग्रुप ज्वाइन किया है। इसमें प्रतिदिन साइकिल चलाने के टास्क मिलते हैं। इससे उत्साह बढ़ा रहता है।
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लॉकडाउन में बढ़ गई डाइट तो साइकिलिंग से किया शरीर को टाइट
हनुमान नगर निवासी 42 वर्षीय कमल सिंह ने बताया कि मुझे गठिया की समस्या थी और वजन अधिक था। जून 2020 में लॉकडाउन में खाना पीना बढ़ने के साथ यह समस्या और बढ़ गई थी। इसके बाद साइकिल चलाना शुरू किया था। शारीरिक रूप से फायदा हुआ तो यह अभ्यास दिनचर्या में शामिल हो गया है। अब प्रतिदिन 25 से 30 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं। चार-पांच लोगों का ग्रुप बन गया है। कई बार कैलसा रोड पर अमरोहा तक चले जाते हैं।
चिकित्सकों के अनुसार प्रतिदिन सिर्फ 30 मिनट साइकिल चलाने के ये हैं फायदे
- रक्तचाप सही रहने से दिल की बीमारियों का खतरा कम
- फेफड़े व पैरों की मांसपेशियां होती हैं मजबूत
- वजन घटाने का सबसे कारगर उपाय
- रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मिलती है मदद
- तनाव से राहत दिलाने में भी मददगार
- रात में नींद न आने की समस्या होती है दूर
- दिमाग की कोशिकाओं का होता है विकास
- पाचन क्रिया भी रहती है दुरुस्त
कोरोना काल में दो करोड़ रुपये प्रति माह तक पहुंच गया था कारोबार
मुरादाबाद। कोराना संक्रमण काल में मांग बढ़ने से दुकानों पर साइकिल की किल्लत होने लगी थी। साइकिल पर एक से दो महीने की वेटिंग चल रही थी। साइकिल विक्रेताओं का कहना है कि स्थितियां संभलने के बाद यह समस्या दूर हो गई है। कोरोना काल में मुरादाबाद जनपद में प्रति माह साइकिल का कारोबार दो करोड़ रुपये तक हो गया था।
साइकिल विक्रेता जय अरोरा का कहना है कि इलेक्ट्रिक साइकिल की मांग बढ़ रही है। प्रतिदिन स्पोर्ट्स साइकिल पांच से छह बिकती हैं तो तीन इलेक्ट्रिक साइकिल बिक रही हैं। इलेक्ट्रिक साइकिल का फायदा है कि सुबह इसे पैडल से चलाया जा सकता है और दिन में बैटरी से चलने वाली मोटर का इस्तेमाल कर सकते हैं। इलेक्ट्रिक साइकिल की कीमत 30 हजार रुपये से 65 हजार तक है। सामान्य स्पोर्ट्स साइकिल आठ हजार रुपये की है। अब विभिन्न कंपनियां 40 फीसदी तक की छूट भी दे रही हैं। इसके अलावा ईएमआई पर भी उपलब्ध है।
साइकिल विक्रेता चंद्रपाल सिंह ने बताया कि स्पोर्ट्स साइकिल चलाने वालों में हेलमेट का प्रयोग बढ़ा है। इसके अलावा ग्लव्स और नी गार्ड्स भी खरीदते हैं। हेलमेट की कीमत पांच सौ रुपये के आसपास है। स्पोर्ट्स साइकिल में कम से कम छह से सात नए मॉडल आए हैं। इन सभी साइकिलों में गियर हैं। ब्यूरो
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मेडल जीतने तक पहुंचा साइकिल का शौक
लाइनपार निवासी 36 वर्षीय राहुल विश्नोई ने लॉकडाउन में कोरोना का तनाव और कोलस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या को दूर करने के लिए साइकिल चलाना शुरू किया था। मोटापे की भी समस्या थी। दो वर्षों में इस शौक ने उन्हें प्रतियोगिताओं और मेडल जीतने के मुकाम तक पहुंचा दिया। राहुल बताते हैं कि साइकिलिंग समूह साइक्लो क्रॉस ने मुझे नोएडा से मुरादाबाद, नैनीताल, हरिद्वार, आगरा, अजमेर, मथुरा आदि तक लंबी साइकिल यात्रा में मदद की। सबसे लंबी नोएडा से अजमेर तक की साइक्लिंग के बाद दिल्ली-मुंबई (2000 किमी), दिल्ली-जयपुर-आगरा (1200 किमी) की साइकिल यात्रा का लक्ष्य है। 20 से अधिक प्रतिस्पर्धाओं में पदक भी जीते हैं।
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साइकिलिंग करने से दूर हो गया जोड़ों का दर्द
नया मुरादाबाद निवासी 46 वर्षीय डॉ. सत्यवीर सिंह चौहान ने बताया कि दो वर्ष पूर्व बहुत तेजी से कोरोना फैल रहा था। मैदान में शारीरिक अभ्यास बंद हो गया तब साइकिल चलाना शुरू किया था। इससे कसरत के साथ-साथ शरीर में लोच (लचक) बढ़ाने में भी फायदा हुआ। पहले जोड़ों में दर्द रहता था, अब यह समस्या दूर हो गई है। वह बोले, कि मैंने एक साइकिलिंग ग्रुप ज्वाइन किया है। इसमें प्रतिदिन साइकिल चलाने के टास्क मिलते हैं। इससे उत्साह बढ़ा रहता है।
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लॉकडाउन में बढ़ गई डाइट तो साइकिलिंग से किया शरीर को टाइट
हनुमान नगर निवासी 42 वर्षीय कमल सिंह ने बताया कि मुझे गठिया की समस्या थी और वजन अधिक था। जून 2020 में लॉकडाउन में खाना पीना बढ़ने के साथ यह समस्या और बढ़ गई थी। इसके बाद साइकिल चलाना शुरू किया था। शारीरिक रूप से फायदा हुआ तो यह अभ्यास दिनचर्या में शामिल हो गया है। अब प्रतिदिन 25 से 30 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं। चार-पांच लोगों का ग्रुप बन गया है। कई बार कैलसा रोड पर अमरोहा तक चले जाते हैं।
चिकित्सकों के अनुसार प्रतिदिन सिर्फ 30 मिनट साइकिल चलाने के ये हैं फायदे
- रक्तचाप सही रहने से दिल की बीमारियों का खतरा कम
- फेफड़े व पैरों की मांसपेशियां होती हैं मजबूत
- वजन घटाने का सबसे कारगर उपाय
- रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मिलती है मदद
- तनाव से राहत दिलाने में भी मददगार
- रात में नींद न आने की समस्या होती है दूर
- दिमाग की कोशिकाओं का होता है विकास
- पाचन क्रिया भी रहती है दुरुस्त
कोरोना काल में दो करोड़ रुपये प्रति माह तक पहुंच गया था कारोबार
मुरादाबाद। कोराना संक्रमण काल में मांग बढ़ने से दुकानों पर साइकिल की किल्लत होने लगी थी। साइकिल पर एक से दो महीने की वेटिंग चल रही थी। साइकिल विक्रेताओं का कहना है कि स्थितियां संभलने के बाद यह समस्या दूर हो गई है। कोरोना काल में मुरादाबाद जनपद में प्रति माह साइकिल का कारोबार दो करोड़ रुपये तक हो गया था।
साइकिल विक्रेता जय अरोरा का कहना है कि इलेक्ट्रिक साइकिल की मांग बढ़ रही है। प्रतिदिन स्पोर्ट्स साइकिल पांच से छह बिकती हैं तो तीन इलेक्ट्रिक साइकिल बिक रही हैं। इलेक्ट्रिक साइकिल का फायदा है कि सुबह इसे पैडल से चलाया जा सकता है और दिन में बैटरी से चलने वाली मोटर का इस्तेमाल कर सकते हैं। इलेक्ट्रिक साइकिल की कीमत 30 हजार रुपये से 65 हजार तक है। सामान्य स्पोर्ट्स साइकिल आठ हजार रुपये की है। अब विभिन्न कंपनियां 40 फीसदी तक की छूट भी दे रही हैं। इसके अलावा ईएमआई पर भी उपलब्ध है।
साइकिल विक्रेता चंद्रपाल सिंह ने बताया कि स्पोर्ट्स साइकिल चलाने वालों में हेलमेट का प्रयोग बढ़ा है। इसके अलावा ग्लव्स और नी गार्ड्स भी खरीदते हैं। हेलमेट की कीमत पांच सौ रुपये के आसपास है। स्पोर्ट्स साइकिल में कम से कम छह से सात नए मॉडल आए हैं। इन सभी साइकिलों में गियर हैं। ब्यूरो