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हालात से ज्यादा अपनों से मिल रहा दर्द
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Tue, 16 Aug 2016 11:22 AM IST
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हादसा
- फोटो : demo
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अब इसे अपनों की बेरुखी कहा जाए या फिर बदनसीबी। परिस्थितियां ऐसी बनी कि अपनों ने साथ छोड़ दिया। कभी जिनपर नाज था वह बोझ बने गए। न तो अपना देखने वाला है और न सही सुनने वाला। हालत बदले तो किसी को पत्नी बोझ लगने लगी तो किसी को औलाद। अपनों से मिले दर्द को झेल रहे ये बदनसीब अपनों के ही बीच जाना चाहते हैं। कोई एक साल से इंतजार कर रहा है तो कोई महीनों से तो किसी का इंतजार दिनों का है। लेकिन अलीमा और रामवती का ये इंतजार खत्म नहीं हो रहा है।
जिला अस्पताल में भर्ती हलीमा और रामवती हालात की मारी है। परिस्थितियां ऐसी बनी कि दोनाें अस्पताल पहुंच गई। हलीमा एक साल से भर्ती है तो रामवती कुछ महीनों से। दोनों स्वस्थ है। अपनों के बीच जाना चाहती हैं। दोनों अपनों का नाम पता भी बता चुकी हैं। अस्पताल और पुलिस प्रशासन परिजनों से संपर्क भी कर चुका है। लेकिन दोनों के घरवालों की ओर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है।
डाक्टरों के मुताबिक दोनों की दिगामी हालत कुछ ठीक नहीं है। इसलिए परिवार वाले ले जाना नहीं चाहते हैं। वहीं दृष्टिहीन बच्चा दो साल बाद अपनों को बोझ लगने लगा। मुसाफिरों के बीच छोड़कर चले गए। जबकि दो साल पहले एक नवजात की गला रेतकर फेंक दिया गया था। लेकिन उस बच्ची की किस्मत तो देखिए स्वस्थ होकर नन्हीं मुस्कान लेकर उसी गांव में वापस पहुंच गई। लेकिन गैरों के बीच।
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- अलीमा के बताए पते के मुताबिक उस गांव के सरपंच से संपर्क किया जा चुका है। सरपंच के जरिए परिजनों तक संदेशा भी पहुंचाया जा चुका है। लेकिन कोई रिस्पांस नहीं आया। रामवती भी पहले बेहतर है। दोनों स्वस्थ होने के बावजूद अस्पताल में है। इससे दोनों को इंफेक्शन का भी खतरा रहता है। - डा. अशोक कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल
जाने की जिद में कर रही हंगामा
मुरादाबाद। जिला अस्पताल चिकित्सा अधीक्षक डा. राजेंद्र कुमार ने बताया कि मेडिकल वार्ड में भर्ती रामवती पिछले तीन चार दिनों हंगामा कर रही है। अपनों के बीच जाने की जिद में वह उल्टी सीधी हरकतें कर रही हैं। इससे दूसरे मरीजों को खासी परेशानी हो रही है। उसकी निगरानी के लिए अलग से स्टाफ लगाना पड़ रहा है।
केस एक
मुरादाबाद। तेलंगाना के संगा रेड्डी जिले की रहने वाली हलीम पत्नी भूरे मियां को जिला अस्पताल भर्ती हुए साल से अधिक का वक्त गुजर चुका है। वह पूरी तरह से स्वस्थ है। अस्पताल और पुलिस प्रशासन उसके गांव के सरपंच और घर वालों से संपर्क कर चुके हैं। लेकिन लेकिन उसे कोई लेने नहीं आया। फिलहाल वह अभी भी जिला अस्पताल रह रही है।
केस दो
मुरादाबाद। रामवती पिछले कुछ महीनों से जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती है। 108 एंबुलेंस के ईएमटी ने उसे भर्ती कराया था। उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं थी। स्वस्थ होने पर उसने खुद को जाटव मोहल्ला असमोली रहने वाली बता रही है। साथ ही पति और पिता का नाम बताया। स्वस्थ होने के बाद भी अस्पताल रहने से उसकी फिर दिगामी हालत बिगड़ने लगी है।
केस तीन
मुरादाबाद। करीब दो साल पहले संभल जिले के बहजोई के पुरा गांव में एक नवजात की गला रेतकर गोबर की ढेर पर फेंक दिया गया था। गांव के रामनिवास की नजर पर पड़ी तो वह उसे लेकर जिला अस्पताल मुरादाबाद ले आया। जहां उसका इलाज कराया गया। अपनों के नहीं आने पर करीब छह महीने बाद बच्ची को लाने वाले रामनिवास को ही सौंप दिया गया।
केस चार
मुरादाबाद। ताजा मामला शनिवार का है। रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर करीब दो साल का लावारिस बच्चा मिला। बच्चा अपनी आंखों से इस दुनिया को देख नहीं सकता है। इस दृष्टिहीन बच्चे को एक महिला छोड़ गई थी। जीआरपी ने लावारिस बच्चे की सूचना चाइल्ड लाइन को दी। कुदरत के साथ अपनों से मिले इस दर्द को झेल रहा बच्चा चाइल्ड लाइन के पास है।
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जिला अस्पताल में भर्ती हलीमा और रामवती हालात की मारी है। परिस्थितियां ऐसी बनी कि दोनाें अस्पताल पहुंच गई। हलीमा एक साल से भर्ती है तो रामवती कुछ महीनों से। दोनों स्वस्थ है। अपनों के बीच जाना चाहती हैं। दोनों अपनों का नाम पता भी बता चुकी हैं। अस्पताल और पुलिस प्रशासन परिजनों से संपर्क भी कर चुका है। लेकिन दोनों के घरवालों की ओर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है।
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डाक्टरों के मुताबिक दोनों की दिगामी हालत कुछ ठीक नहीं है। इसलिए परिवार वाले ले जाना नहीं चाहते हैं। वहीं दृष्टिहीन बच्चा दो साल बाद अपनों को बोझ लगने लगा। मुसाफिरों के बीच छोड़कर चले गए। जबकि दो साल पहले एक नवजात की गला रेतकर फेंक दिया गया था। लेकिन उस बच्ची की किस्मत तो देखिए स्वस्थ होकर नन्हीं मुस्कान लेकर उसी गांव में वापस पहुंच गई। लेकिन गैरों के बीच।
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- अलीमा के बताए पते के मुताबिक उस गांव के सरपंच से संपर्क किया जा चुका है। सरपंच के जरिए परिजनों तक संदेशा भी पहुंचाया जा चुका है। लेकिन कोई रिस्पांस नहीं आया। रामवती भी पहले बेहतर है। दोनों स्वस्थ होने के बावजूद अस्पताल में है। इससे दोनों को इंफेक्शन का भी खतरा रहता है। - डा. अशोक कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल
जाने की जिद में कर रही हंगामा
मुरादाबाद। जिला अस्पताल चिकित्सा अधीक्षक डा. राजेंद्र कुमार ने बताया कि मेडिकल वार्ड में भर्ती रामवती पिछले तीन चार दिनों हंगामा कर रही है। अपनों के बीच जाने की जिद में वह उल्टी सीधी हरकतें कर रही हैं। इससे दूसरे मरीजों को खासी परेशानी हो रही है। उसकी निगरानी के लिए अलग से स्टाफ लगाना पड़ रहा है।
केस एक
मुरादाबाद। तेलंगाना के संगा रेड्डी जिले की रहने वाली हलीम पत्नी भूरे मियां को जिला अस्पताल भर्ती हुए साल से अधिक का वक्त गुजर चुका है। वह पूरी तरह से स्वस्थ है। अस्पताल और पुलिस प्रशासन उसके गांव के सरपंच और घर वालों से संपर्क कर चुके हैं। लेकिन लेकिन उसे कोई लेने नहीं आया। फिलहाल वह अभी भी जिला अस्पताल रह रही है।
केस दो
मुरादाबाद। रामवती पिछले कुछ महीनों से जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती है। 108 एंबुलेंस के ईएमटी ने उसे भर्ती कराया था। उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं थी। स्वस्थ होने पर उसने खुद को जाटव मोहल्ला असमोली रहने वाली बता रही है। साथ ही पति और पिता का नाम बताया। स्वस्थ होने के बाद भी अस्पताल रहने से उसकी फिर दिगामी हालत बिगड़ने लगी है।
केस तीन
मुरादाबाद। करीब दो साल पहले संभल जिले के बहजोई के पुरा गांव में एक नवजात की गला रेतकर गोबर की ढेर पर फेंक दिया गया था। गांव के रामनिवास की नजर पर पड़ी तो वह उसे लेकर जिला अस्पताल मुरादाबाद ले आया। जहां उसका इलाज कराया गया। अपनों के नहीं आने पर करीब छह महीने बाद बच्ची को लाने वाले रामनिवास को ही सौंप दिया गया।
केस चार
मुरादाबाद। ताजा मामला शनिवार का है। रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर करीब दो साल का लावारिस बच्चा मिला। बच्चा अपनी आंखों से इस दुनिया को देख नहीं सकता है। इस दृष्टिहीन बच्चे को एक महिला छोड़ गई थी। जीआरपी ने लावारिस बच्चे की सूचना चाइल्ड लाइन को दी। कुदरत के साथ अपनों से मिले इस दर्द को झेल रहा बच्चा चाइल्ड लाइन के पास है।